महाराणा प्रताप भील थे,राजपूत नहीं: बताने वाली लेखिका असुरक्षित, मिल रही धमकियां

स्त्रीकाल डेस्क 

राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य और  दलित लेखिका डॉ. कुसुम मेघवाल द्वारा महाराणा प्रताप पर लिखी किताब पर विवाद बढ़ता जा रहा है, जिसमें उन्होंने महाराणा प्रताप को भील कहा है. किताब के अनुसार राजपूत या क्षत्रिय कोई जाति नहीं होती है, उसमें अलग-अलग जाति समूह के लोग होते हैं. किताब बताती है कि किस तरह राजस्थान में भीलों का शासन रहा है, उनके कई राजवंश रहे हैं और महाराणा प्रताप के इर्द-गिर्द, उन्हें मदद करने वालों में भी भील ही रहे हैं.

स्त्रीकाल से बातचीत करते हुए कुसुम मेघवाल ने बताया कि ‘मैंने यह किताब पिछले दो साल पहले लिखी है, जिसमें मैंने शोध के आधार पर लिखा है कि महाराणा प्रताप भील थे, न कि  राजपूत. इसी बात से बौखला कर करणी सेना के सदस्य बनकर लगातार फोन पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है.’ उन्होंने बताया कि ‘ पुलिस को 21 अप्रैल को तथाकथित धमकी देने वालों के खिलाफ शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अभी तक सुरक्षा की कोई पहल नहीं हुई है. वे राजस्थान की वसुंधरा सरकार पर आरोप लगाती हैं कि उन्होंने ही इन उपद्रवी ताकतों पर कार्रवाई न कर उन्हें शह दे रखा है.’ वे पूछती हैं, ‘ क्या पुलिस किसी घटना के अंदेशा का इंतजार कर रही, कि घटना घट जाए और उसके बाद कोई कार्रवाई की जाए?  यह देश किसी तथाकथित करणी सेना से चलेगा या संविधान से , जो हमें अभिव्यक्ति की आजादी देता है?’ वे स्पष्ट कहती हैं कि ‘आप को किसी बात पर आपत्ति है तो न्यायालय जाओ, या किताब के बदले किताब लिखों या फिर किताब पर प्रतिबंध लगवाओ।’

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इस बीच उन्हें मारने की धमकी वाली खबर मीडिया में आई तो लेखकों बुद्धिजीवियों में बेचैनी है. इसके पहले भी कलबुर्गी, पान्सारे जैसे लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं की ह्त्या हो चुकी है. 14 मई को मुस्लिम महिलाओ के संगठन नेशनल वीमेन फ्रंट की प्रदेशाध्यक्ष वाफिया अन्सार ने उदयपुर में उनके निवास पर मुलाकात कर उनसे पूरे  मामले की जानकारी ली. प्रदेशाध्यक्ष वाफिया अन्सार ने डॉ.कुसुम को मिल रही धमकियों को लेकर कहा कि सरकार को जल्द से जल्द ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए साथ ही उन्होंने मांग की है कि डॉ.मेघवाल को सुरक्षा मुहैया करवाई जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर डॉ.कुसुम मेघवाल पर किसी भी तरह का प्रहार होता है तो हमारा संगठन चुप नहीं बैठेगा और इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी.
राष्ट्रीय दलित महिला आंदोलन की राष्ट्रीय अध्यक्ष रजनी तिलक ने कहा कि ‘जिन्हें आपत्ति है वे गुंडागर्दी की जगह शोधपूर्ण तरीके से लेखिका की बात काटें.’

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