मीरा को ब्राह्मण सिद्ध करने वालों के पुरखों ने कबीर को भी बनाया था ब्राह्मण

प्रेमकुमार मणि 


भाजपा का असली चेहरा राष्ट्रपति चुनाव में एक बार फिर उजागर हुआ है . कुछ ही महीने पूर्व उत्तरप्रदेश चुनावों में दोनों हाथ उठाकर जात-पात से ऊपर उठकर वोट करने की अपील करने वाली पार्टी यह कहते फूले नहीं समा रही कि उसका उम्मीदवार दलित है. कहा जा रहा है कि यह मोदी का मास्टर स्ट्रोक है . लेकिन जैसे ही विपक्ष का भी उम्मीदवार दलित हुआ भाजपा परेशान हो गई. उसने अपनी पूरी ताकत दूसरे उम्मीदवार के चरित्र -हनन में झोंक दी है . कहा जा रहा है हमारा उमीदवार असल दलित है,तुम्हारा कम-असल. भारतीय संस्कृति के संरक्षक पूछने लगे हैं- मीरा कुमार तेरी जात क्या है ? आप समझ सकते हैं कि हम पतन के किस दौर में हैं .

पिता बाबू जगजीवनराम के साथ और परिवार में  मीरा कुमार 

भाजपा मीरा को नहीं जानती ऐसा नहीं है लेकिन  आज उन्हें अपने उम्मीदवार से कमतर बताना है . मुश्किल है कि मीरा पढाई -लिखाई और राजनयिक अनुभव में कोविंद से बीस पड़ती हैं . लेकिन हमारे यहाँ पढाई -लिखाई और योग्यता से चरित्र नहीं बनता .चरित्र बनता है जाति से . इसलिए जाति रूप में वह कितना वास्तविक है इसे सिद्ध कर दो . जो जाति की मर्यादा रखता है ,वर्णव्यवस्था की मर्यादा रखता है वह हमारे यहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है . जैसे राम . उन्होंने भी अयोनिजा ( जाति -गोत्र विहीन ) सीता से विवाह कर मर्यादा तोड़ी थी ,लेकिन वशिष्ठ के कहने पर सीता को वनवास दिया और मर्यादापुरुषोत्तम का विरुद हासिल किया .

मीरा ने भी जाति की मर्यादा तोड़ी है . प्रेम -विवाह किया और वह भी अंतरजातीय . यानि जाति की परवाह किये बिना . वह पक्की दलित कैसे हो सकती हैं . संघ वाले अभियान चलाकर उनका चरित्र -हनन कर रहे हैं . कोई उनके पति को ब्राह्मण बता रहा है ,कोई कुछ. यहाँ तक कि पतियों की संख्या बतलाने की भी बेशर्मी की गई है. यही लोग हैं जो नेहरू को मुसलमान सिद्ध कर चुके हैं .मीरा को ब्राह्मण सिद्ध कर दें तो क्याआश्चर्य ! ( इनके पुरखों ने ही तो कबीर को ब्राह्मण सिद्ध किया था .)

अपने पति मंजुल कुमार के साथ मीरा कुमार 

संयोग से मैं मीरा कुमार के पति परिवार से घनिष्ट रहा हूँ ,इसलिए मुझे यह सब देख -सुन कुछ ज्यादा आनंद आ रहा है .मीरा कुमार की सास बिहार की पहली महिला मंत्री रहीं और स्वसुर उर्दू -हिंदी के चुनिंदा विद्वान् , उर्दू समालोचना पर उनकी दो किताबें अभी भी मेरे पास हैं. चालीस के दशक में मानवेन्द्र नाथ राय के साथ मिलकर उन्होंने रेडिकल ह्यूमिनिस्ट का संघटन किया था. वह पिछड़े वर्गों के राजनीतिक -सांस्कृतिक संघटन त्रिवेणी संघ से भी जुड़े रहे . जात -पात और रूढ़ियों का इस परिवार ने हमेशा विरोध किया .

चुनाव जो जीते ,वह भारत का राष्ट्रपति होगा .हमारा राष्ट्रीय महामहिम . दोनों उम्मीदवार काबिल और गंभीर हैं . हमें अपनी राजनीतिक सामाजिक और सांस्कृतिक मर्यादा को हर हाल में बनाये रखना चाहिए . आलोचना की अगंभीर और कुत्सित प्रवृतियों को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए .

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