अश्लील चैट की जांच के लिए बनी जांच-समिति पर उठे सवाल, जज ने कहा मुझे नहीं है समिति-गठन की सूचना

सुशील मानव 

इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जांच कमेटी गठित करके मामले की जांच कराए जाने की सूचना के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय कैंपस में एक बार फिर छात्रों का गुस्सा अपने उफान पर है। छात्रों ने इविवि प्रशासन द्वार गठित जांच कमेटी की विश्वसनीयता और संवैधानिकता पर आपत्ति जताते हुए जांच कमेटी के बहाने मामलेको डायवर्ट करके उसकी लीपापोती करने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं महिला साहित्यकार ने भी कहा कि जिस जज की बेटी को पहले किया नियुक्त उसे ही सौपा है जांच का जिम्मा-जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती. इस बीच लेखकों और वामपंथी संगठनों पर भी सवाल उठ रहे हैं. सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि कई वामपन्थी शिक्षकों की नियुक्ति के कारण वामपंथी लेखक संगठन महिला साहित्यकार पर हमले के मामले में चुप हैं.

धरने पर बैठीं छात्राएं 

अपनी आपत्ति और माँगों को लेकर इविवि के आंदोलनरत छात्रों ने कल एक प्रेसविज्ञप्ति भी रिलीज की।


पढ़ें: कुलपति पर जांच 

प्रेस विज्ञप्ति:
आज जैसा कि सभी प्रमुख समाचार पत्रों से हम सबको यह ज्ञात हुआ है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति का प्रभार संभाल रहे प्रोफेसर के.एस. मिश्रा जी ने कल इलाहाबाद हाईकोर्ट से अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति माननीय अरुण टंडन जी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जाँच कमेटी का गठन कर दिया गया है, कुलपति रतन लाल हांगलू पर पद के दुरुपयोग एवं महिला उत्पीड़न के आरोपों की जांच की मांग को लेकर।
1- हम इस जांच कमेटी को पूरी तरह से अस्वीकार्य करते हैं, यह जाँच कमेटी किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है।
2- हमारी आपत्ति के प्रमुख कारण निम्न है-
• जब विश्वविद्यालय के कुलपति रतन लाल हांगलू छुट्टी पर चले गये तो उनके मातहत या एक्टिंग विस चांसलर स्थायी कुलपति के ऊपर जांच के लिए कैसे किसी कमेटी का गठन कर सकते हैं, कमेटी गठन करना एक्टिंग वीसी के अधिकार क्षेत्र के बाहर है।
• कुलपति रतन लाल हांगलू पर लग रहे आरोपों की जांच मानव संसाधन विकास मंत्रालय से कमतर किसी संस्था के द्वारा गठित नहीं की जा सकती जिसकी माँग पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह मानव संसाधन विकास मंत्रालय, माननीय राष्ट्रपति महोदय, माननीय प्रधानमंत्री जी,एवं महिला आयोग द्वारा की जा चुकी है।
• जांच कमेटी में महिला का न होना पुनः विश्वविद्यालय का महिला के प्रति असंवेदनशीलता का प्रमाण है। महिला उत्पीड़न पर बन रही किसी भी कमेटी में महिला सदस्य का होना अनिवार्य है, यह कानून कहता है और यूजीसी के नियम कहते हैं।
• कनफ्लिक्ट ऑफ इनटेरेस्ट: माननीय न्यायमूर्ति श्री अरुण टंडन जी जो खत्री पाठशाला के सम्बन्धित है और श्री एस.एस. खन्ना, खत्री पाठशाला द्वारा संचालित है। अतः ऐसे व्यक्ति द्वारा जांच न्यायसंगत कैसे हो सकती जो विश्वविद्यालय के अधीन एवं सम्बद्ध हो।
• कमेटी के नोडल अधिकारीजो कि विश्वविद्यालय में असिस्टेंट रजिस्ट्रार हैं, जिनकी नियुक्ति लगभग एक महीने पहले हुयी है और वर्तमान में प्रोबेशन पीरियड पर हैं और कुलपति के मातहत हैं जिनसे जांच कमेटी प्रभावित हो सकती है।
• जांट कमेटी में टाइम बाउंड का नहीं होना अर्थात समय सीमा का निर्धारण न करना, विश्वविद्यालय द्वारा जाँच के नाम पर की जा रही लीपापोती की कलई खोलता है।
• विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि विश्वविद्यालय द्वारा कथित महिला पर दबाव बनाकर उसको प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है और यह विश्वविद्यालय द्वारा जांच को प्रभावित करने का घृणित प्रयास है जो बेहद निंदनीय है।
3- यह स्पष्ट है विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और बयानों से कि विश्वविद्यालय प्रशासन, छात्रों एवं इलाहाबाद प्रशासन में भ्रम की स्थिति को पैदा करके परिसर में विपरीत स्थितियों को पैदा करने पर अमादा है।  एक तरफ कुलपति जी का बयान आता है कि जब तक जाँच नहीं हो जाती वह परिसर में प्रवेश नहीं करेंगे दूसरी तरफ रजिस्ट्रार द्वारा स्थापना दिवस दिनांक 23.09.2018 में कुलपति के उपस्थिति को निश्चित किया जाता है और पत्र जारी करके। जो कि कैंम्पस में टकराव की स्थिति बनाने का विश्वविद्यालय द्वारा प्रयास है जिस संबंध में आज वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर भी सूचित कर दिया गया है, कि कैंपस में कुलपति का प्रवेश किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
4- आज ऋचा सिंह द्वारा पुनः मानव संसाधन को पत्र लिखकर इस तथ्य से अवगत कराया गया कि किस तरह से विश्वविद्यालय प्रशासन जांच कमेटी के नाम पर एक गंभीर मामले की लीपापोती करने का प्रयास कर रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जांच कमेटी का गठन करना जब उसके अधिकार क्षेत्र में है ही नहीं तो वह जांच कमेटी का गठन कैसे कर सकता है। अतः मंत्रालय तत्काल अपने स्तर पर जांच कमेटी का गठन करे और इस कमेटी को भंग करने का आदेश विश्वविद्यालय के दे।

पढ़ें: महिला साहित्यकार से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति की अश्लील बातचीत

महिला साहित्यकार की आपत्ति 
वहीं दूसरी ओर पिछले दो दिन से लगातार इलाहाबाद से दिल्ली तक उक्त महिला साहित्यकार द्वारा पैसे लेकर अपना स्टैंड बदलने की बातें होती रही। इस मामले में जब हमने महिला साहित्यकार से संपर्क किया तो उन्होंने इसका पुरजोर खंडन करते हुए कहा-“असंभव। सवाल ही नहीं उठता। मैं इलाहाबाद के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक की पत्नी हूँ। अगर कोई आपको पैसे जैसी बात कहता है तो वो दुनिया का सबसे मूर्ख और नीच भी है। मेरा संबंध सबसे ज्यादा पढ़े लिखे और साहित्यिक परिवार से है। मैं अपना स्टैंड क्यूं बदलूँगी। जब जज मुझे बुलाएंगे, मैं अपना पक्ष सौ प्रतिशत रखूँगी। मैं मरते दम तक सच का साथ दूँगी”

कुलपति-निवास के सामने प्रदर्शनकारी छात्र 

वहीं महिला साहित्यकार का ये भी कहना है कि-“मैंने रतन लाल हांगलू को अपनी किताब नहीं दी थी। किताब उन्हें मीरा सम्मान देने वाली संस्था की ओर से ही दी गयी थी। और मेरे दिल्ली निवास पर हमला 8 सितंबर को हुआ था।”महिला साहित्यकार ने एबीवीपी छात्र नेता अविनाश दूबे पर फोन पर धमकी देने और अश्लील मेसेज भेजने का आरोप लगाया। महिला साहित्यकार का कहना है कि ‘कभी ये आदमी खुद रतनलाल हांगलू का आदमी बताता है, कभी कहता है कि रजिस्ट्रर ने, तो कभी कहता है कि पीआरओ चितरंजन कुमार सिंह ने भेजा है। ये आदमी मुझसे पैसे उगाहने के चक्कर में लगा हुआ है।’  महिला साहित्यकार ने इविवि प्रशासन द्वारा जांच कमेटी की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। महिला साहित्यकार का कहना है कि ‘इविवि के कुलपति हाँगलू ने 26 जनवरी को रिटायर्ड जज अरुण टंडन को अपने यहाँ बुलाकर विशेष पुरस्कार दिया गया था और फिर बदले में जज अरुण टंडन द्वारा एसएस खन्ना गर्ल्स डिग्री कॉलेज में कुलपति रतल लाल हांगलू पति-पत्नीको विशिष्ट अतिथि के तौर पर बुलाया जाता है।दोनों एक दूसरे के घर अक्सर लंच-डिनर पर आते-जाते रहे हैं। महिला साहित्यकार काकहना है कि जज टंडन और कुलपति हांगलू के इसी म्युचुअल संबंधों के चलते ही इविवि के कुलपति रतन लाल हांगलू ने जज अरुण टंडन की बेटी को बतौर टीचर इविवि में नियुक्ति दी है।‘

सुशील मानव फ्रीलांस जर्नलिस्ट हैं. संपर्क: 6393491351

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