जान बचाने की महिला साहित्यकार की गुहार: छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष को लिखा पत्र

सुशील मानव 


इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रतन लाल हंगलू का महिला साहित्यकार के साथ अश्लील चैट सार्वजनिक होने के बाद साहित्यकार को मिल रही हैं धमकियां. इलाहबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह को पत्र लिखकर जीवन-रक्षा की उन्होंने अपील की है.  पत्र में उन्होंने लिखा है कि ‘ये प्रकरण न सिर्फ़ सम्मानित व्यक्ति, प्रतिष्ठित परिवार, संभ्रांत साहित्यिक जगत् को बुरी तरह से आहत कर रहा है बल्कि समस्त विश्वविद्यालयीय गरिमा और प्रशासनिक अधिकारियों के पद को भी मलिन कर रहा है…’  इस बीच विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने कुलपति को खुला पत्र लिखा है. 





पीड़ित साहित्यकार का पत्र: 

प्रिय ऋचा,
कैसी हो?

तुमने ‘चैट वायरल” जैसे ज़लील मुद्दे के सन्दर्भ में मुझे कॉल करके चिंता व्यक्त की, अच्छा लगा।
ये प्रकरण न सिर्फ़ सम्मानित व्यक्ति, प्रतिष्ठित परिवार, संभ्रांत साहित्यिक जगत् को बुरी तरह से आहत कर रहा है बल्कि समस्त विश्वविद्यालयीय गरिमा और प्रशासनिक अधिकारियों के पद को भी मलिन कर रहा है। हमारे अज़ीज़ इलाहाबाद विश्वविद्यालय की एकमात्र महिला छात्र संघ की अध्यक्ष होने के नाते आप मुझे इन निंदनीय, दु:खद और असम्मानजनक घटनाक्रम से दूर करो, साथ ही मेरे जीवन की भी सुरक्षा की व्यवस्था करने का प्रयास करो। बड़ी कृपा होगी, क्योंकि अब तो मुझे जान से मारने की धमकियां भी मिलने लगीं हैं।

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इस बीच विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने कुलपति को एक खुला पत्र लिखा है: 

खुला पत्र: 

कुलपति प्रो0 रतन लाल हांगलू पर लग रहे कथित व्याभिचार के आरोपों पर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं की ओर से कुलपति के नाम खुला पत्र ।

महोदय विश्वविद्यालय में जब से आपने कुलपति का कार्यभार ग्रहण किया है आप अपने फैसलों के लेकर हमेशा चर्चा में रहे हैं। जब-जब छा़त्र-कर्मचारी-शिक्षक-विभागाध्यक्ष पर कोई आरोप लगे हैं, आपने जॉच से पहले सम्बन्धित व्यक्ति को पद से हटाने का काम किया है, यह कहते हुए कि सम्बन्धित व्यक्ति जॉच को प्रभावित न कर सके।

महोदय आज जब स्वयं आप पर अपने पद का लाभ उठाते हुए एक  महिला को लाभ देने का आश्वासन सम्बन्धी खबरें एवं बेहद अशोभनीय-अभद्र वार्तालाप वायरल हो रहा है और लगातार शहर के सभी प्रमुख समाचार पत्रों मे प्रकाशित हो रहा है,  जिसकी पुष्टि स्वयं महिला द्वारा भी की जा रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर बने रहने का आपको नैतिक अधिकार नहीं रह जाता है। विश्वविद्यालय की गरिमा एवं छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान मे रखते हुये आपसे अपेक्षा की जाती है कि आप उक्त आरोपों की जॉच तक कैम्पस के अंदर प्रवेश न करें, साथ ही अगर आपके अन्दर जरा भी नैतिकता है, तो कुलपति पद की गरिमा को ध्यान मे रखते हुये आप नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें, तथा इस अतिसंवेदनशील विषय पर जॉच में सहयोग करें।

महोदय विश्वविद्यालय में अध्ययन करने वाली छात्रायें जो कुलपति के संरक्षण में यह आशा करती है कि परिसर छात्राओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध करायेगा, परन्तु पिछले दिनों आपके उपर लग रहे आरोपों के चलते समस्त विश्वविद्यालय परिवार बेहद आहत और शर्मिन्दगी महसूस कर रहा है।

आप पर यह पहला आरोप नहीं है इससे पहले कल्याणी विश्वविद्यालय जहॉ के आप भूतपूर्व कुलपति रहे हैं, वहॉं एक छात्रा की मॉ ने आपके चरित्र पर सवाल उठाते हुये इलाहाबाद विश्वविद्यालय के महिला सलाहकार बोर्ड को पत्र लिख कर छात्राओं की सुरक्षा के सम्बन्ध में विश्वविद्यालय को आगाह कराते हुये आपकी कार्यप्रणाली-अपने पद का दुरूपयोग करते हुये महिलाओं का शोषण करने के आरोप लगाये हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गम्भीर चिन्ता व्यक्त की थी।

महोदय पिछले कई दिनों से जिस तरह की खबरें शहर के सभी प्रमुख समाचार पत्रों में छप रही हैं इससे छात्राओं समेत तमाम अभिभावक जो गॉव तथा दूर- दराज के क्षेत्रों से अपनी बेटियों को विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिये भेजते हैं, वह सभी विश्वविद्यालय कैम्पस को संदेह के घेरे में महसूस करते हुए छात्राओं की सुरक्षा के लिए संशंकित है। छात्रायें भी कैम्पस में अपने आप को सुरक्षित महसूस नही कर रही हैं। साथ ही एक बेहद अहम और चिन्ताजनक सवाल यह है कि अगर किसी छात्रा को अपनी सुरक्षा या यौन उत्पीड़न से सम्बन्धित किसी घटना की शिकायत करनी हो तो वह किस संस्था के पास करेगी? जबकि संस्था प्रमुख स्वयं आरोपो में घिरा हुआ है।

कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हंगलू

महोदय यूजीसी गाइडलाइन के अनुसार कैम्पस के अन्दर जी0एस0कैश0 समिति को अनिवार्य किया गया है जहॉ पर महिला शोषण एवं उत्पीड़न सम्बन्धी किसी भी शिकायत को दर्ज कराया जा सके, परन्तु लम्बे समय से हम छात्र-छात्राओं द्वारा जी0एस0कैश0 कमेटी गठित करने की मॉग आपसे लगातार की गयी परन्तु कमेटी गठित ना करना आपकी कार्यप्रणाली पर इन आरोपों को देखते हुये प्रश्नचिन्ह लगाता है। एक ऐसा विश्वविद्यालय या संस्था जहॉ कुलपति, रजिस्ट्रार सभी महिला उत्पीडन के आरोपों में घिरे हुये हैं उस परिसर में छात्राओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी यह बेहद गंभीर सवाल हैं।

अतः आपसे अनुरोध है कि विश्वविद्यालय की गरिमा एवं छात्राओं की सुरक्षा तथा यौन उत्पीड़न सम्बन्धी, विशाखा गाइडलाइन  के अनुसार ‘जिसमें यह कहा गया है कि ऐसा व्यक्ति जिस पर महिला शोषण सम्बन्धी आरोप लगे हों वह जॉच पूरी होने तक अपने पद पर नही रह सकता है’ इस गाइडलाइन तथा कुलपति पद की गरिमा को ध्यान में रखते हुये आपसे यह अपेक्षा की जाती है कि आप तत्काल नैतिक आधार पर इस्तीफा दें तथा सम्बन्धित विषय की जॉच पूरी होने तक कैम्पस में प्रवेश न करके जॉच में सहयोग करें।
समस्त छात्र’ छात्राएं

सुशील मानव फ्रीलांस जर्नलिस्ट हैं. संपर्क: 6393491351

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