सिमोन द बोउआर के 10 कथन

प्रस्तुति: शिप्रा किरण

20वीं सदी की महान दार्शनिकों में से एक, स्त्रीवादी विमर्शों में के लिए बेकन लाईट सिमोन द बोउआर का आज स्मृति दिवस है. 14 अप्रैल 1986 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा था. आइये पढ़ते हैं उनके 10 उल्लेखनीय कथन:

सिमोन द बोउआर

  1. उसके पर कुतर दिए गए और फिर उस पर ये इल्ज़ाम कि वो उड़ना नहीं जानती.
  2. अगर आपने लंबी ज़िंदगी पाई है तो इस उम्र को जीते हुए एक दिन आप पाएंगे कि हर जीत एक न एक दिन गहरे हार में बदल जानी है.
  3. अपनी देह पर से यकीन का उठ जाना, ख़ुद पर से यकीन का उठ जाना है.
  4. मर्दों को इंसान समझा गया और औरतों को मादा. जब-जब यह मादा इंसानों की तरह बर्ताव करती, इस के सिर पर मर्दों की नकल के इल्ज़ाम होते.
  5. मेरी बुद्धिमत्ता, मेरी जरूरतें और तमाम जिम्मेवारियों को उठाने में पूरी तरह सक्षम होना – ये कुछ ऐसी बातें हैं कि कभी भी कोई मुझे अपने वश में नहीं कर सकता.न तो कोई मुझे पूरी तरह समझ सकता है और न ही प्यार कर सकता है. वह सिर्फ़ मैं हूँ – जिसने खुद को जाना और खुद को चाहा भी है.
  6. वह इस ब्रह्माण्ड और यहाँ तक कि समय के अस्तित्व को भी नकार सकती थी लेकिन किसी भी कीमत पर ये नहीं मान सकती थी कि प्यार शाश्वत नहीं होता.
  7. मैं बेतरह लालची हूँ. मुझे इस ज़िंदगी से सब कुछ चाहिए. मैं औरत भी होना चाहती हूँ और मर्द भी. मुझे अनगिन दोस्त चाहिए और मेरा अपना अकेलापन भी.ढेरों काम करने हैं मुझे और बेहतरीन किताबें लिखनी हैं. खुद की खुशी के लिए यात्राओं पर निकल जाना है. मुझे ख़ुदगर्ज़ होना है और ख़ुदगर्ज़ी से दूर भी रहना है… मैं जानती हूँ कि ये सारी चीजें एक साथ पा लेना बेहद मुश्किल है और इस मुश्किल को सोचना भी मुझे गुस्से से पागल कर देता है.
  8. मर्द, औरत से इसलिए नहीं बंधता कि वह औरत को खुशियाँ दे सके, असल में, वह अपनी खुशी की तलाश में औरत तक जाता है.
  9. वो दिन : जिस दिन औरत अपनी कमजोरियों से नहीं बल्कि अपनी ताकतों से प्यार करना जान लेगी, जिस दिन वो खुद से भागना छोड़, खुद की तलाश में निकल जाएगी, अपना मान करना और पूरे दावे के साथ अपनी बात रखना जान पाएगी, उस दिन से प्यार पर उसका भी उतना ही हक़ होगा, जितना किसी मर्द का और उसी दिन से प्यार उसके लिए खतरा नही बल्कि उसकी ज़िंदगी होगा.
  10. यूं तो उसने खुद को इतना साधा कि वह कभी न बदले लेकिन एक किसी दिन उँगलियों की एक छुअन भर से वह पिघल उठ्ठेगी.

शिप्रा किरण लेफ्ट वर्ड बुक्स की एडिटर हैं. संपर्क: [email protected]

लिंक पर  जाकर सहयोग करें , सदस्यता लें :  डोनेशन/ सदस्यता आपका आर्थिक सहयोग स्त्रीकाल (प्रिंट, ऑनलाइन और यू ट्यूब) के सुचारू रूप से संचालन में मददगार होगा. स्त्रीकाल का प्रिंट और ऑनलाइन प्रकाशन एक नॉन प्रॉफिट प्रक्रम है. यह ‘द मार्जिनलाइज्ड’ नामक सामाजिक संस्था (सोशायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत रजिस्टर्ड) द्वारा संचालित है. ‘द मार्जिनलाइज्ड’ के प्रकशन विभाग  द्वारा  प्रकाशित  किताबें  अमेजन ,   फ्लिपकार्ट से ऑनलाइन  खरीदें संपर्क: राजीव सुमन: 9650164016, [email protected]

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here