प्रधानमंत्री को पत्र लिखना हुआ गुनाह: 6 बहुजन छात्र निष्कासित

जब देश में अख़लाक़, जुनैद, तबरेज और ना जाने कितने नाम हैं तथा झारखण्ड में आदिवासियों को, राजस्थान, असम, छतीसगढ़, उत्तरप्रदेश और देश के कई हिस्सों में गाय के नाम पर हिन्दू संगठनों द्वारा प्रायोजित भीड़ द्वारा हत्या की जा रही है और देश के प्रधानमंत्री अमेरिका में कहते हैं “वहां सब अच्छा है” अब प्रधानमंत्री न मिडिया से वाकिफ़ होते हैं और न ही जनता से तो ये सवाल देश के अमन पसंद लोग कैसे पूछेंगे की यहाँ क्या सब अच्छा है आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 का निरस्त होना या अल्पसंख्यकों पर प्रायोजित ढंग से मॉबलिंचिंग? जेएनयू का छात्र नजीब जो तक़रीबन तीन साल से गायब है उसको आरएसएस की एक छात्र शाखा जो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् है इस संगठन के लोगों पर आरोप है की इनके द्वारा नजीब को पिटा जाता है और फिर गायब कर दिया जाता है, तो सवाल पूछना पड़ेगा, जब सवाल पूछा जाता है तो उनके ऊपर देशद्रोह का केस दर्ज कर दिया जाता है. रामचंद्र गुहा, मणिरत्नम और अपर्णा सेन अनुराग कश्यप श्याम बेनेगल समेत 49 अमन पसंद लोगों ने प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिख कर उनको अवगत कराने का कोशिश किया गया की देश में मॉबलिंचिंग की घटनाएँ बहुत ज्यादा बढ़ गई है, लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर में इन 49 लोगों के खिलाफ गुरुवार को देशद्रोह का केस दर्ज कर दिया जाता है.

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ये सिलसिला आगे बढ़ता है जब महात्मा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के प्रशासन ने छह विद्यार्थियों को निष्काशित कर दिया जाता है, चन्दन सरोज, नीरज कुमार, राजेश सारथी, रजनीश अम्बेडकर, पंकज वेला और वैभव पिंपलकर इन लोगों ने इस अलोकतांत्रिक कार्रवाई का विरोध करते हुए 9 अक्टूबर को विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री को पत्र लिखने का सामूहिक कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें छात्र-छात्राओं ने अपने पत्र में पीएम मोदी प्रधानमंत्री से देश के मौजूदा हालात को देखते हुए कुछ सवालों का जवाब मांगा है. छात्र-छात्राओं ने देश में दलित-अल्पसंख्यकों के मॉबलिंचिंग से लेकर कश्मीर को पिछले दो माह से कैद किए जाने; रेलवे-बीपीसीएल-एयरपोर्ट आदि के निजीकरण; दलित-आदिवासी नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं एवं बुद्विजीवी- लेखकों के बढ़ते दमन और उनपर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने पर भी सवाल खड़े किए हैं. छात्र-छात्राओं ने महिलाओं पर बढ़ती यौन हिंसा व बलात्कार की घटनाओं के सवाल पर भी जवाब माँगा है. क्या ये सवाल जायज नहीं है? इन सवालों से देश की छवि खराब हो जाएगी?

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चन्दन सरोज कहते हैं की देश में आज दलितों-अल्पसंख्यकों की मॉबलिंचिंग की बढ़ती घटनाओं के लिए बीजेपी-आरएसएस जैसे संगठन जिम्मेवार है. बीजेपी-आरएसएस के नेता मॉबलिंचिंग करनेवालों को सम्मानित करते रहे हैं। एक सम्प्रदाय विशेष के खिलाफ नफरत फैलाने वालों को आज केन्द्र-राज्य की सरकारों में अहम ओहदे पर बिठाने का भी काम आरएसएस-बीजेपी ने ही किया है। ऐसी स्थिति में केन्द्र सरकार के मुखिया होने के नाते पीएम मोदी की ही यह जिम्मेदारी है कि वे इन घटनाओं पर रोक लगाएं.

शिल्पा भगत ने कहा कि आज देश में बलात्कार और यौन हिंसा के मामले थमने के बजाय बढ़ते ही जा रहे हैं. कुलदीप सेंगर से लेकर चिन्मयानंद जैसों को बचाने में सरकार ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली सरकार महिला सुरक्षा के मुद्दे पर पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है. बलात्कारियों के पक्ष में जुलूस तक निकाले जा रहे हैं. इसलिए हम प्रधानमंत्री से उम्मीद करते हैं कि वे महिलाओं पर जारी यौन हिंसा-बलात्कार को रोकने हेतु सख्त कदम उठाएं.

रजनीश कुमार अम्बेडकर ने कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए कश्मीर से जिस प्रकार धारा-370 हटाया गया और यह कहा गया  कि इससे कश्मीर के लोगों को लोकतांत्रिक अधिकारों की गारंटी होगी. जबकि आज दो माह से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी कश्मिरीयों को कैद कर रखा गया है. वहां आज भी कर्फ्यू जैसे हालात क्यों हैं? इसका पीएम मोदी को जवाब देना होगा.

वैभव पिम्पलकर ने कहा कि मोदी सरकार एक तरफ राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ रेलवे, बीपीसीएल, एयरपोर्ट से लेकर कई अन्य राष्ट्रीय महत्व के उद्दमों को पूंजीपतियों के हाथों बेच रही है. सरकार देश के विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है और स्थिति यह है कि रिजर्व बैंक से लेकर अन्य बैंक कंगाली की तरफ बढ़ रहे हैं. कंपनियों में नौकरी करनेवालों की बड़ी पैमाने पर छंटनी हो रही है. बेरोजगारी कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है. छात्र-युवाओं के भविष्य के साथ किए जा रहे इस खिलवाड़ का प्रधानमंत्री मोदी को सामने आकर जवाब देना चाहिए. क्योंकि उन्होंने प्रतिवर्ष दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का देश की जनता से वादा किया था।

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नीरज कुमार ने कहा कि केन्द्र सरकार नागरिकता संशोधन कानून को सामने लाकर मुसलमानों में खौफ पैदा कर रही है. कई पीढ़ियों से किसी जगह पर रह रहे आम लोगों को लगातार भयभीत किया जा रहा है. देश के गृहमंत्री धर्म के आधार पर मुस्लिमों को नागरिकता के मामले में टारगेट कर देश-समाज में हिंसा, नफरत व अशांति फैला रहे हैं. प्रधानमंत्री को ऐसे गंभीर मामले में संज्ञान लेना चाहिए. यह देश सभी धर्म के लोगों का है. भारत का संविधान जाति, धर्म, वर्ण, लिंग, संप्रदाय के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव का निषेध करता है. पीएम को संविधान के इन मूल्यों की रक्षा करनी होगी.

इन विद्यार्थियों ने बहुजन नायक मान्यवर कांशीरामजी के पूण्यतिथि के कार्यक्रम करने के लिए प्रशासन को परमीशन के लिए पत्र दिया गया था लेकिन इनको कार्यक्रम करने का परमीशन यह बोल कर नहीं मिला की उसमें तारीख नहीं लिखा है. चंदन सरोज बताते हैं की यहाँ आरएसएस की शाखा बिना किसी परमीशन के रोज चलाई जा रही है और हमें कोई भी कार्यक्रम के लिए प्रशासन का परमीशन नहीं मिलता है. यहाँ के विद्यार्थियों के साथ सभी अमन पसंद लोगों, संगठनों को एक जुट होकर इनके पक्ष में खड़े होने की जरुरत है और इनका निष्कासन को तुरंत वापस लेना चाहिए.

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