‘राजनीति में महिला’ विषय पर बातचीत: मेरा रंग का वार्षिक उत्सव

अगर राजनीति में महिलाएं आ रही हैं तो उन्हें एक वैकल्पिक राजनीति के बारे में भी सोचना होगा। नहीं तो पितृसत्ता को कोई चुनौती मिलेगी और एक महिला भी परोक्ष रूप से पितृसत्ता को ही मजबूत बनाती रहेगी। जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे ने कहा कि इसके लिए यह जरूरी है कि इस वैकल्पिक राजनीति सैद्दांतिक सूत्रिकरण भी किया जाए। 

अभय दुबे मेरा रंग फाउंडेशन ट्रस्ट के वार्षिक समारोह में राजनिति और महिलाएं विषय पर उपस्थित श्रोताओं को संबोधित कर रहे थे। गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं की राजनीतिक भूमिका और भागीदारी पर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि एक महिला का राजनीति में आना ही साहसिक कदम है। राजनीति में बने रहना उससे भी अधिक कठिन है। सबसे यह स्वीकार किया कि बदलाव आ रहा है और आने वाले समय में इस प्रश्न पर ज्यादा गहराई से विचार-विमर्श करना होगा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी कैसे बढ़ाई जाए। 

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मेरा रंग की संस्थापक शालिनी श्रीनेत ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन की विशिष्ट अतिथि कथाकार व पत्रकार गीताश्री ने कहा कि मेरा रंग ने महिला मुद्दों पर वीडियो बनाने से शुरुआत की थी और शालिनी के सतत प्रयासों से आज यह एक स्त्री विमर्श का एक प्रमुख मंच है। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी आज के समय में एक बहुत जरूरी विषय है।  

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने कहा कि बिना किसी पोलिटिकल बैकग्राउंड के राजनीति में आना बहुत मुश्किल होता है, वह भी एक स्त्री के लिए। उन्होंने कहा कि जब एक स्त्री राजनीति मे आती है तो उस पर उम्मीदों का बहुत बड़ा बोझ भी लाद दिया जाता है। वो बदलाव तभी लाएंगी जब वह कुर्सी पर आसीन होंगी। महिला मुद्दों पर महिला ज्यादा संवेदनशील तरीके से सोच सकती है। 

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कार्यक्रम का संचालन करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक तथा स्त्री मुद्दों पर मुखर लेखक तारा शंकर ने कहा कि बड़े अफसोस की बात है कि बहुत बुनियादी हक भी हमें आजादी के बहुत साल बाद मिले हैं। राजनीतिक भागीदारी तो बहुत दूर की चीज लगती है।  शीबा असलम फ़हमी ने कहा कि महिलाओं में राजनीतिक चेतना का विकास न हो इसकी शुरुआत घर से ही होने लगती है। क्योंकि अगर लड़की के भीतर विवेक पैदा होगा तो वह इसकी शुरुआत सबसे पहले अपने घर से ही करेगी। वह सवाल करेगी, अधिकार मांगेगी।  

सपा नेता तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पहली महिला छात्रसंघ अध्यक्ष रिचा सिंह ने कहा कि जब एक लड़की राजनीति में आना चाहती है तो घर से लेकर बाहर तक उसके मनोबल को तोड़ने का पूरा प्रयास किया जाता है। अगर कहीं वह सफल हो जाती है तो माना जाता है कि वह अपनी प्रतिभा के दम पर सफल नहीं हुई है बल्कि उसने कुछ शॉर्टकट तलाशे हैं। 

जेएनयू से अध्यक्ष पद की छात्र राजद प्रत्याशी प्रियंका भारती ने कहा कि जब हम सदन में महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण की बात कहते हैं तो इस बात पर गौर करना होगा कि कहीं यह एक खास वर्ग तक तो नहीं सिमटकर रह जाएगा। उन्होंने फूलन देवी का जिक्र करते हुए कहा कि फूलन से हमें हथियार उठाना नहीं सीखना है मगर शोषण के खिलाफ आवाज उठाना जरूर सीखना है। 

कार्यक्रम का संचालन आँचल बावा ने किया और अंत में जाने-माने आर्टिस्ट सीरज सक्सेना ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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