फातिमा लतीफ़: संस्थानों में जाति और धार्मिक भेदभाव की ताजा शिकार(?)

 

पिछले साल आईआईटी एंट्रेंस परीक्षा में नेशनल लेवल में टॉपर केरल के कोल्लम जिले की रहने वाली 19 वर्षीय फातिमा लतीफ जो आइआइटी मद्रास में ह्यूमैनिटीज एंड डिवेलपमेंट स्टडीज (इंटीग्रेटेड) विषय में एमए फस्ट ईयर की छात्रा थी 9 नवंबर को अपने हॉस्टल में मृत पायी गई. पुलिस ने आत्महत्या का केस दर्ज किया है। जबकि फातिमा के पिता समेत वहां के विद्यार्थियों का मानना है कि ये आत्महत्या नहीं है ये संस्थानिक हत्या है.

फातिमा के पिता अब्दुल लतीफ का कहना है की आइआइटी मद्रास में फातिमा के साथ वहां के प्रोफेसर उसके मुसलमान होने के कारण भेदभाव करते थे, उनका मानना है कि उनकी बेटी के साथ इसलिए भी भेदभाव होता था कि फातिमा एक मुस्लिम होकर भी वह अपने क्लास में टॉप कर रही थी. अब्दुल लतीफ ने केरल के मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री से निष्पक्ष न्याय की मांग की है.

प्रोफेसर सुदर्शन पद्मनाभन

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फातिमा मोबाइल के स्क्रीन पर लिखे एक नोट में प्रोफेसर सुदर्शन पद्मनाभन को अपने मौत की वजह बता रही है, उसमें फातिमा ने लिखा है कि उसके सैमसंग नोट पर पूरी जानकारी लिखी हुई है. फोन अभी पुलिस के पास है जो इस मामले की तहकीकात कर रही है.

फातिमा लतीफ के मामले को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सह केरल से राज्यसभा सांसद बिनॉय विस्वम ने शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल को एक चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने इस मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जाँच कराने की मांग की है.

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फातिमा लतीफ के न्याय की मांग करते हुए देश के कई विश्वविद्यालयों आइ.आइ.टी. मद्रास, जे.एन.यू., दिल्ली विश्वविद्यालय, हैदराबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा प्रदर्शन भी किया जा रहा है.

दक्षिण केरल के अदूर में इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट (IHRD) इंजीनियरिंग कॉलेज के एक मलयाली छात्र रेजानी एस आनंद ने 22 जुलाई 2004 को आत्महत्या कर ली।

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISC), बैंगलोर में एक तेलुगु लड़के और एक एकीकृत-पीएचडी के विद्यार्थी अजय श्री चंद्रा ने 27 अगस्त 2007 को आत्महत्या कर ली थी।

ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले एक तमिल छात्र, सेंथिल कुमार का, जो हैदराबाद विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फिजिक्स में पीएचडी कर रहा था, 24 फरवरी 2008 को जीवन समाप्त हो गया।

फातिमा के मोबाइल का स्क्रीन

6 फरवरी, 2011 को आइ.आइ.टी. रुड़की का एक छात्र मनीष कुमार गुड्डोलियन अपने छात्रावास की 5 वीं मंजिल से कूदकर जान दे देता है.

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हैदराबाद विश्वविद्यालय में पीएचडी का छात्र रोहित वेमुला 17 जनवरी, 2016 को अपनी जान ले लेता है.

इस तरह कई सारी घटनाएँ है जो शिक्षण संस्थानों में हुए हैं. इन सब की जान धार्मिक और जातीय भेदभाव के कारण चली गई है.

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