सावित्रीबाई फुले के नाम से बने स्त्री अध्ययन पीठ: सरकार से स्त्रीकाल की मांग, मंत्री रामदास आठवले का मिला साथ

बाएं से जनरल वी.के. सिंह, मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक, सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री (राज्य) रामदास आठवले और साथ में स्त्रीकाल के संपादक संजीव चंदन

नई दिल्ली, मंगलवार 3 दिसंबर को स्त्रीकाल की पहल पर सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री (राज्य) रामदास आठवले ने मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक से मिलकर देशभर के स्त्री अध्ययन विभागों को सावित्रीबाई फुले पीठ के रूप में बदलने की मांग की. इसके पूर्व स्त्रीकाल ने मानव संसाधन विकास मंत्री और पर सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री (राज्य) को पत्र लिखकर यह मांग की थी, जिसे सामाजिक न्याय मंत्री (राज्य) रामदास आठवले ने मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल को संस्तुत किया था. 3 दिसम्बर को वे इसी सिलसिले में स्त्रीकाल के सम्पादक संजीव चंदन के साथ डा. पोखरियाल से मिले.

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स्त्रीकाल ने अपने पत्र में लिखा था कि, “क्रान्तिज्योति सावित्रीबाई फुले ने सामाज के विशेषाधिकार तबके से विरोध झेलकर भी लड़कियों के लिए देश का पहला स्कूल खोला, उन्हें पढ़ाया. उनके स्कूल ने देश के पश्चिमी प्रांत में शिक्षा की महान अलख जलाई. फातिमा शेख, ताराबाई शिंदे आदि विदुषियां उस स्कूल की चिराग थीं. उन्होंने तत्कालीन ब्राह्मण विधवाओं के दर्द को समझा. उनके लिए और उनके बच्चों के लिए अनाथालय खोला. उनमें से एक ब्राह्मण विधवा के बेटे यशवंत को अपना बेटा बनाया. आगामी 3 जनवरी को इस महान विभूति की जयन्ती है.

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स्त्रीकाल की ओर से मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक को लिखा गया ख़त

‘स्त्रीकाल’ एक पत्रिका और संस्थान के रूप में सावित्रीबाई फुले सहित फुले-अम्बेडकरी विचारों के प्रति प्रतिबद्ध है. हमलोग लेखन और बौद्धिकता के क्षेत्र में ‘सावित्रीबाई फुले सम्मान’ भी देते हैं. आपसे आग्रह है कि देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों में चलाये जा रहे स्त्री अध्ययन विभागों को सावित्रीबाई फुले के नाम समर्पित पीठ के रूप में परिवर्तित किया जाये, जहाँ स्त्री-पुरुष समता के लिए प्रतिबद्ध पाठ्यक्रम संचालित हों. भारत सरकार और माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री का यह कदम युगांतकारी होगा. आपके इस कदम के लिए हम आभारी होंगे”

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डा. पोखरियाल से मुलाकात में रामदास आठवले ने निजी व डीम्ड विश्वविद्यालयों में आरक्षण नियमों के अनुपालन की मांग भी रखी वहीं उन्होंने इंदिरा गांधी अनुसूचित जनजाति विश्वविद्यालय, अमरकंटक की तर्ज पर एक अनुसूचित जाति विश्वविद्यालय की स्थापना की भी मांग की. मानव संसाधन विकास मंत्री इन मांगों के प्रति सकारात्मक रहे. हालांकि आरक्षण के सवाल पर उन्होंने कहा कि ‘यह नीतिगत मामला है इसे हमलोग नीतिगत फैसलों की तरह देखेंगे.’

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स्त्रीकाल सावित्रीबाई फुले के नाम से वैचारिकी के लिए एक सम्मान भी देता है. अबतक यह सम्मान दलित स्त्रीवाद की सैद्धांतिकी की सूत्रधारों में से एक शर्मिला रेगे और लेखिका व आलोचक अनिता भारती को मिल चुका है.

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