प्रसूति अवकाश पर गयी शिक्षिका को केंद्रीय विवि ने किया निलंबित

प्रोफेसर स्वा‍ती मनोहर

महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के जैव प्रौद्योगिकी एवं जीनोम विभाग अंतर्गत सहायक प्रोफेसर स्वा‍ती मनोहर को निलंबित कर दिया गया है। शिक्षक संघ, महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वपविद्यालय, मोतिहारी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर के ये जानकारी दी है कि निलंबन की वजह प्रसूति अवकाश के बाद शिशु देखभाल अवकाश हेतु आवेदन करना था. शिक्षक संघ ने आरोप लगाया है कि कुलपति ने व्यक्तिगत द्वेष होने के कारण प्रो. स्वाती मनोहर को निलंबित किया गया है. प्रो. स्वाती के पति दिल्ली में नौकरी करते हैं तथा अपनी पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वे अपने शिशु के लालन-पालन के साथ अपने शैक्षणिक दायित्वों का समुचित निर्वाह करने में अक्षम थीं. घर में ऐसा कोई नहीं है जो मोतिहारी में इनके साथ रहकर शिशु पालन में इनका हाथ बँटा सके। शिक्षक संघ के अनुसार विश्वशविद्यालय में सरकारी नियमों के अनुसार महिला कर्मचारियों और शिक्षिकाओं के लिए शिशु पालनागृह तक नहीं है ऐसी हालात है कि विश्वविद्यालय में कोई चिकित्सक तक नहीं है. विश्ववविद्यालय प्रशासन से बारंबार शिशु देखभाल अवकाश का अनुरोध करने के बाद भी इन्हें समुचित जबाव नहीं मिल पाया और पिछले लगभग 5 महीनों से इनकी अनुपस्थिति को मुद्दा बनाकर इनका वेतन रोक दिया गया था। ऐसी प्रतिकूल स्थितियों में अंतत: उन्होंने पिछले कुछ दिनों पहले विश्वविद्यालय में सेवाभार भी ग्रहण कर लिया था।

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निलंबन आदेश के ठीक एक दिन बाद 4 दिसंबर को विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ ने एक आपात बैठक करके सर्वसम्मति से प्रकार के स्त्री विरोधी निलंबन की पुरजोर शब्दों में निंदा की। शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने इस संदर्भ में कुलपति से बातचीत का प्रयास भी किया किंतु उन्होंने मिलने से साफ मना कर दिया.
शिक्षक संघ ने सरकार और विश्विद्यालय प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा है कि ‘बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाली सरकार की नाक तले एक स्त्री को जरूरत पड़ने पर भी शिशु देखभाल अवकाश न देना मानवता विरोधी ही कहा जाएगा। कार्यस्थल पर शिशु पालाना गृह जैसी आधारभूत सुविधा तक मुहैया न करा पाना यह दर्शाता है कि विश्वाविद्यालय प्रशासन अपनी शिक्षिकाओं के प्रति कितना असंवेदनशील है।

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महात्माा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी शिक्षक संघ ने प्रेस विज्ञप्ति में निम्नलिखित मांगें रखी है: विश्ववविद्यालय बिना शर्त डॉ. स्वांती मनोहर का निलंबन वापस ले और उनका रोका गया वेतन जारी करे। विश्ववविद्यालय में महिलाओं को शिशु देखभाल अवकाश सरीखे उनके हक प्रदान किये जाएँ। कार्यस्थल पर सरकारी नियमों के अनुसार शिशु पालना गृह की व्यवस्था भी की जाए ताकि घर-गृहस्थी के भार तले महिला शिक्षिकाओं और महिला कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ न धोना पड़े। शिक्षक संघ विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद् और कार्यकारी परिषद्, दोनों में स्त्रियों के साथ-साथ दलितों, आदिवासियों, अल्पपसंख्यंकों के प्रतिनिधित्वय की भी मांग करता है।

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