क्या है चलत मुसाफिर
एक प्लेटफोर्म है, उन सभी लोगों के लिए जिनके अंदर घूमक्कड़ी वाला बड़ा कीड़ा है। जो फेसबुक पर ‘इफ ट्रैवेलिंग वॉज फ्री,  यू वुड नेवर सी मी अगेन’ जैसा पोस्ट पड़ कर तुरंत शेयर करते हैं। मन ही मन निश्चय करते  हैं। एक दिन पूरा भारत घूम डालेंगे। जो टूरिस्ट नहीं ट्रैवलर बनना चाहते हैं। जानना चाहते हैं भारत के हर एक कोने को और मिलना चाहते हैं भारत हर कबीले, जनजाति से, और देखना चाहते हैं हर संस्कृति, नृत्य और कला को। चाहते हैं एक जगह पर इन सभी चीज़ों को डोक्यूमेंट करना। वो भी हिन्दी में। क्योंकि देश को देखने का असली मज़ा अपनी भाषा में है ना?’

किसने शुरू किया
“प्रज्ञा श्रीवास्तव” और “मोनिका मरांडी” ने। देश के सर्वोच्च संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई करती हैं। प्लेसमेंट हो जाती है। अच्छे खासे चैनल में, जहां नौकरी पाना ज्यादातर लोगों का सपना होता है। पर कुछ साल नौकरी करने के बाद समझ आता है कि ये तो नहीं करना था। घूमना था और भारत में रह रहे अनछुए जगहों को देखना था, आदिवासीयों  के बारे जानना था और उन लोगों से मिलना था जिन्होंने समाज के बहुत काम किया पर मैन स्ट्रिप मीडिया उन्हें जगह नहीं दे पाया है। यही तो सपना था। सपने को हकीकत में बदलती हैं। नौकरी छोड़ देती हैं। “चलत मुसाफिर” की नीव रखती है, फिर उठाती है झोला और निकल पड़ती है भारत को जानने के लिए। कहानियां खोजती हैं। उन कहानियों को और उन लोगों को हम तक लेकर आती हैं जिनके बारे में हमें भनक तक नहीं है।  ‘अकेले’ देश के 29 से ज्यादा राज्य घूम चुकी हैं।
क्यों शुरू किया –
चलत मुसाफिर की टीम चाहती है कि हिंदी में ज्यादा से ज्यादा ट्रैवेलॉग लिखा जाए, और भारत के ऊपर लिखा जाए। आपने लास्ट बहुत अच्छा यात्रा साहित्य कब पढ़ा था, हिंदी में, भारत पर? आपकी स्मृति में जो नाम दर्ज हैं, उन्हें  उंगलियों पर गिना जा सकता है। अपनी विदेशी यात्रओं  पर लोग काफी बढ़ा-चढ़ा कर लिखते हैं, लेकिन बात जब देश के पर्यटन पर लिखने, बोलने और वीडियो बनाने की हो, तो हमारा हिंदी तबका उदासीन रह जाता है। हालांकि अभी हमारे नौजवान हिंदीभाषी साथी अपनी यात्राओं का विवरण फेसबुक पर, अपने ब्लॉग्स पर दर्ज करने लगे हैं।
“चलत मुसाफिर” का उद्देश्य है उन सबको एक मंच पर लाना। कैमरे में भारत की खूबसूरती कैद होती रहे, लोग भारत में के भिन्न-भिन्न प्रकार के लोगों, भोजन, कला और संस्कृति को जाने। यही “चलत मुसाफिर की जुस्तजू है।”
चलत मुसाफिर पर ताज महल और लाल किला जैसी सुप्रसिद्ध चीजों पर लिस्टिकल वाले आर्टिकल नहीं मिलेंगे।
यह भी आयें –  ‘सखुआ’ एक पहल
यहां मिलेगा किसी राज्य के किसी छोटे से आदिवासी इलाके में सदियों से चला आ रहा छाउ नृत्य, राजस्थान के किसी छोटे से गाँव में 110 सालों से चली आ रही कोई मूक रामलीला, उत्तराखंड के किसी सुदूर इलाके में रह रहे एक ऐसे डॉक्टर जिनकी पूरी ज़िन्दगी ही लोगों की फ्री में प्लास्टिक सर्ज़री करते गुजर गयी, शहरों की डीजे वाली होली न मिले लेकिन बरसाने की लठमार और वृंदावन की विधवा होली मिल ही जाएगी। स्टेचू ऑफ यूनिटी की वर्ल्ड क्लास हाइट पर कोई आर्टिकल मिलेगा इसकी गारंटी नहीं पर हां किसी राज्य में हनुमान और शिव की सबसे बड़ी मूर्तियों के बारे में जरूर मिल जाएगा। दिल्ली का इंडिया गेट नहीं मिलेगा पर पुरानी दिल्ली की संकरी गलियों में बसी-छिपी कहानियां मिल जाएंगी आपको। कश्मीर का कोई घर जहां सब अपना सा है। बस्तर की दबी-छिपी कहानियां। आदिवासी औरतें और नक्सली इलाकों में पल रहे बच्चों की मासूम मुस्कान की कहानियां। बुंदेलखंड, छत्तीसगढ़ की कोई प्रथा, लहलहाती हुई फसलें, बहती हुई नदी, उड़ती हुई चिड़ियाँ। ये सब मिलेगा चलत मुसाफिर पर। सबकुछ रॉ। जैसे आप और हम उस जगह को देखना चाहते हैं बिना किसी एडिटिंग के, एकदम नेचुरल।
कैसे अलग है चलत मुसाफिर दूसरी ट्रेवल वेबसाइट से?
जैसे ‘ट्रेवलर’ और ‘टूरिस्ट’ एक जैसे शब्द लगते जरूर हैं पर होते नहीं हैं। ठीक वैसे ही। वो लाइन सुनी है कि, “जब हम किसी जगह पर ‘घूमने’ जाते हैं तब हम टूरिस्ट कहलाते हैं। लेकिन जब हम किसी जगह को जानने, महसूस करने और समझने जाते हैं तब हम ट्रेवलर कहलाते हैं।” बस एकदम यही फर्क है दूसरी ट्रेवल वेबसाइट में और ‘चलत मुसाफिर’ में। ये आपको घुमाती जरूर है लेकिन जानने के लिए, समझाने के लिए उस जगह के नुक्कड़-नुक्कड़, गली-गली से आपको मिलवाती है। घुमक्कड़ी से ही पत्रकारिता करती हैं। और सबसे अच्छी बात की देशभर के घुमक्कड़ यहां लिखते हैं। तो आपको कहीं और जाने की जरूरत भी नहीं होगी। आप एक ही जगह ढेर से घुमक्कडों से मिल सकते हैं। उनकी नज़र से हर जगह को देख सकते हैं। घर बैठे बैठे।
क्या है चलत मुसाफिर का दूरगामी उद्देश्य
चलत मुसाफिर का एक ही दूरगामी उद्देश्य है। भारत के बारे में ज्यादा से ज्यादा लिखा जाए, वो भी हिंदी में। भारत विभिताओं का देश है, हजारों लोग हैं जो विभिन्न वर्ग से आते हैं, अपने साथ लाते हैं एक अलग संस्कृति, खाना-पान और भाषा। जिसके बारे बहुत ही कम लोग जानते हैं। अगर इसके बारें में नहीं लिखा गया। तो भविष्य में ये सब विलुप्त हो जाएगा। साथ चलत मुसाफिर का उद्देश्य है। लोगों को ऐसी जगह की यात्रा करवाना। लोग सिर्फ फेमस हिल्स स्टेशन न देखें, बल्कि भारत की असली संस्कृति से रूबरू हों। अलग अलग जनजातियों से मिलें, उनके खाने को चखें, लोकगीतों और कहानियों को जानें। चलत मुसाफिर यही चाहता है कि भविष्य में अगर कोई भी भारत के बारे में जानना चाहे, वो भी हिंदी में, तो एक जगह पढ़ सके। साथ ही, जितने भी ट्रैवलर हैं जो हिंदी में लिखना पसंद करते हैं। उन्हें एक प्लेटफॉर्म देना। जहां आपको पूरे देश से सभी ट्रैवलर के ब्लॉग एक जगह पर मिलें। बस यही है, चलत मुसाफिर का उद्देश्य।
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