धारा 370 हटाये जाने की विरोधी भारतीय मूल की महिला अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार

भारतीय मूल की कमला हैरिस जो डेमोक्रेट्स पार्टी की ओर से उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं, वह पहली अश्वेत महिला होने के साथ-साथ भारतीय मूल की भी पहली महिला हैं जो इस बड़े मुकाम तक पहुंची हैं, वह भारतीय होने के साथ-साथ पहली एशियायी महिला हैं जिन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। यह खबर ही भारतीय जन-मानस में खुशी की लहर है कि अगर वह ये चुनाव जीत जाती हैं तो राष्ट्रपति पद की भी प्रमुख दावेदार होंगी। इस खुशी में वे लोग भी शामिल हैं जो सोनिया गांधी के भारतीय राजनीति में होने पर सवाल करते रहे हैं.

कमला हैरिस अक्टूबर 1964 में ऑकलेंड कैलिफोर्निया में पैदा हुई, उनकी किताब THE TRUTH WE HOLD, An American Journey किताब में उन्होंने अपनी बचपन की बातें याद कर बताई की किस तरह वह अपने नाना के साथ समुद्र किनारे जाया करती थीं अपनी नानी के साथ वो प्रदर्शनों में जाती थीं वो नारे, वो आवाज़ें आज भी उनके कानों में गूँजती है।

अपने उम्मीदवार चुने जाने पर कमला हैरिस का कहना है, “आपने मुझे बुलाया, मैं इस जिम्मेदारी के लिए अत्यंत गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ और काम शुरू करने को तैयार हूँ, देश के इतिहास में इस सबसे कठिन प्रणाली से ये संदेश आया है कि बाइडेन ही वो शख्स हैं जो हमारा नेतृत्व कर सकते हैं, मुझे आपके साथ खड़े होने पर गर्व हैं।” 

अमेरिकी राजनीति में कमला हैरिस की सफलता को एक बहुसांस्कृतिक समाज का प्रतीक माना जा रहा है, वहाँ लोग इनकी नीतियों की समीक्षा कर रहे हैं कई लोग निराश है कि इस सदी में नस्लीय न्याय के लिए, जेलों और कानून सुधार के मामलों में हैरिस इनके विरोध में खड़ी मिली जिसके कारण इनकी आलोचना हुई, आलोचना होने का मुख्य कारण यह है कि जब कमला कैलिफोर्निया में अटर्नी जनरल थीं तो उन्होंने ऐसे फैसले लिए जिसने  नस्लीय और आर्थिक असमानताओं को ज्यादा मजबूत किया।

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जब बात अनुच्छेद 370 की हो तो कमला हैरिस का रुख सख्त हो जाता है, उन्होंने इस अनुच्छेद को हटाने का विरोध भी किया था, पिछले साल अक्टूबर में अपने एक बयान में उन्होंने कहा था कि, “हमें कश्मीरियों को याद दिलाना होगा कि वो दुनिया में अकेले नहीं हैं, हम उनके हालात पर नजर रख रहे हैं, मानवाधिकार का हनन करने वाला हमेशा यकीन दिलाता है कि उसकी हिंसा को कोई देख नहीं रहा है, उसे फ़र्क नहीं पड़ता, यही हनन करने वाले का औज़ार है, लेकिन हम देख रहे हैं। हमारे मूल्यों का हिस्सा है कि हम बोलें, मानवाधिकार के हनन के मामले में बोलें और जरूरत पड़े तो दखल दें।”

इस बात से उनका रुख तो साफ हो जाता है कि वह क्या सोचती हैं अब सोचने वाली बात यह है कि अगर वो उपराष्ट्रपति और उसके बाद राष्ट्रपति बन जाती हैं तो उनका कश्मीर मसले पर मत जानने के बाद भी भारत के उन उत्साही लोगों का, जो सोनिया गांधी के विदेशी मूल को लेकर सवाल करते रहे हैं, या धारा 370 हटाये जाने का समर्थन करते रहे हैं. उनके लिए यही उत्साह रहेगा ? क्योंकि भारत में अपने हक के लिए आवाज उठाना नारे लगाना क्राइम माना जाता है अगर आप सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं तो आप राष्ट्रद्रोही हैं।

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एक तरफ जहां कमला हैरिस का उपराष्ट्रपति के पद का उम्मीदवार होना भारत में गर्व की बात समझी जा रही है वहीं भारत में अगर कोई दूसरे देश की महिला शादी करके बस गई है तथा वह चुनाव लड़ना चाहती है तो उसे विदेशी कहकर ताने दिए जाते हैं उस पर गर्व नहीं किया जाता इसका उदाहरण सोनिया गाँधी हैं जो इटेलियन मूल की हैं जिन्हें चुनाव लड़ने पर गर्व नहीं किया जाता बल्कि उलहाने दिए जाते हैं।

 

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