पंखुरी सिन्हा

अनेकों पुस्तकों की विदुषी रचयिता, गोआ की पूर्व राज्यपाल, आदरणीया मृदुला सिन्हा जी के असमय निधन से साहित्य, राजनीति और लोक जीवन के विकास शील सपनों को भारी क्षति हुई है। उनके साथ कितनी ही बार फ़ोन पर बात चीत के साथ, उनके कई भाषण सुनने का मौका मिला। अदभुत अदा थी गम्भीर , ज्ञान की बातों के बीच, लोक गीत को मधुर आवाज़ में गाने की उनकी! वह आवाज़ और उनकी हँसी गूंजती रहेगी, कानों में, एक बहुत लंबे समय तक। अलविदा हिन्दी का सबसे कठिन शब्द! सांत्वना इतनी ही कि आप का लिखा साथ रहेगा। आप की चर्चित कृतियों में ‘विजयिनी’, ‘घरवास’, सम्भवतः जिसका अंग्रेजी अनुवाद ‘A Home At Last’, भी काफ़ी लोकप्रिय रहा है, ‘यायावरी आँखों से’, ‘ज्यों मेहँदी को रंग’, संभवतः जिसका अंग्रेजी अनुवाद ‘Flames of Desire’ भी बहुत पसंद किया गया है, ‘जैसे उड़ि जहाज को पंछी’, ‘ढ़ाई बीघा ज़मीन’, ‘देखन में छोटन लगै’, सम्भवतः जिसका अंग्रेजी अनुवाद ‘Sobs That Bloom’, बहुचर्चित, ‘नारी: न कठपुतली, न उड़नपडी’, जिसका अंग्रेजी अनुवाद ‘Neither Puppet Nor Butterfly’, तो अति लोकप्रिय, ‘सीता पुनि बोली’, संभवतः जिसका अंग्रेजी अनुवाद ‘At That Very Moment’, विश्व विख्यात, ‘परितप्त लंकेश्वरी’, ‘एक दिए की दिवाली’, ‘उस आँगन का आकाश’, और अभी सबसे हाल में, ‘अहिल्या उवाच’ शामिल है। ऐसी कृतियों
की यशस्विनी लेखिका के जाने से उनके शहर मुजफ्फरपुर में छठ पर्व के बीच शोक की लहर दौड़ गई। यह गौर तलब है कि कितने लोगों का जुड़ाव था उनसे, जिन सबने अपने स्नेह सिक्त संस्मरण सुनाते हुए अपना हृदय उनकी श्रद्धांजलि में उड़ेल दिया। कितने लोगों को व्यक्तिगत रूप से क्षति का एहसास हुआ। उनसे तीन बार मिलने का मौका मुझे मिला है, और तीनों ही बार, उनकी वाक पटुता के साथ, अपनत्व भरी उनकी शैली ने आकर्षित, सम्मोहित किया है। पहली बार मुजफ्फरपुर के एक कॉलेज के जलसे में उनसे भेंट हुई और उसी दिन, सरकिट हाउस में उनका साक्षात्कार करने का मौका मिला। इस बात चीत के क्रम में उन्हें बहुत करीब से जानना सुखद रहा। दूसरी बार, व्यास सम्मान समारोह में उनसे मिलने का मौका मिला और यहाँ वो एक अलग ही तेवर में थी। फिर भी, उनका स्नेह, जो लगभग हर किसी के लिए छलका पड़ता था, छिपाये नहीं छिपता था, गंभीर मुद्रा के बावजूद! तीसरी बार, पटना में बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के कार्यकम में भी उन्होनें इसी तरह, अपनी ऊर्जा से अचंभित किया था। आश्चर्यजनक है कि इतनी जीवंत आवाज़, इतना कुछ कहते अचानक खामोश हो गई। उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते गहरे दुख की अनुभूति है।

लेखक चर्चित साहित्यकार हैं ।

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