इतिहास से अदृश्य स्त्रियाँ

कुसुम त्रिपाठी स्त्रीवादी आलोचक.  एक दर्जन से अधिक किताबेंप्रकाशित हैं , जिनमें ' औरत इतिहास रचा है तुमने','  स्त्री संघर्ष  के सौवर्ष ' आदि चर्चित...

डा. अम्बेडकर की पहली जीवनी का इतिहास और उसके अंश

संदीप मधुकर सपकाले  डा. अम्बेडकर  की प्रमुख जीवनियों में  चांगदेव भवानराव खैरमोड़े द्वारा लिखित जीवनी (मराठी, प्रथम खंड प्रकाशन 14 अप्रैल 1952), धनंजय कीर द्वारा लिखी...

क्या आप जानते हैं गांधी की पहली जीवनी लेखिका कौन थीं, कब और किस...

संदीप मधुकर सपकाले  महात्मा गांधी की किसी भी भाषा में  पहली जीवनी मराठी में 1918 में लिखी गयी थी. अवंतिकाबाई गोखले द्वारा लिखी गयी इस...

महाराणा प्रताप भील थे,राजपूत नहीं: बताने वाली लेखिका असुरक्षित, मिल रही धमकियां

स्त्रीकाल डेस्क  राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य और  दलित लेखिका डॉ. कुसुम मेघवाल द्वारा महाराणा प्रताप पर लिखी किताब पर विवाद बढ़ता जा रहा...

तस्वीरों में बाबा साहब

तस्वीरों में बाबा साहेब ..... बाबा साहब डॉक्टर भीम राव अंबेडकर अम्बेडकर की मुम्बई की कान्हेरी गुफाओं की सैर. तस्वीर 1952-53 की है. तस्वीर नेपाल की राजधानी काठमांडू...

90 प्रतिशत ग्रामीण अब्राह्मणों को भूल जाना पतन का कारण : डा. आंबेडकर

बाबा साहब डा. आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर उनका  एक जरूरी व्याख्यान "मित्रों ,जहाँ तक मैंने अध्ययन किया है , मैं कह सकता हूँ कि...

यह जनता है

फिदेल कास्त्रो जब हम जनता की बात करते हैं तो हमारा मतलब उन आरामतलब रईसों और देश के दकियानूस तत्वों से हरगिज नहीं होता जो...

सामाजिक परिवर्तन के अगुआ शाहूजी महाराज

ललिता धारा आम्बेडकर कालेज आॅफ कामर्स एण्ड इकानामिक्स, पुणे के गणित व सांख्यिकी विभाग की अध्यक्ष और संस्थान की उपप्राचार्या. ‘फुलेज एण्ड वीमेन्स क्वश्चन...

पीड़ाजन्य अनुभव और डा आंबेडकर का स्त्रीवाद

डा. भीम राम आंबेडकर के स्त्रीवादी सरोकारों की ओर, क़िस्त तीन शर्मिला रेगे की किताब  'अगेंस्ट द मैडनेस ऑफ़ मनु : बी आर आम्बेडकर्स राइटिंग...

अशोक विजय दशमी : दशहरा

दशहरा पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता रहा है. मुख्यतःइस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में रावन के...
249FollowersFollow
606SubscribersSubscribe

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।