कला-संस्कृति

वासना नाजायज नहीं होती: लिपिस्टिक अंडर बुर्का बनाम बुर्के का सच

कुमारी ज्योति गुप्ता कुमारी ज्योति गुप्ता भारत रत्न डा.अम्बेडकर विश्वविद्यालय ,दिल्ली में हिन्दी विभाग में शोधरत हैं सम्पर्क: jyotigupta1999@rediffmail.com ‘लिपिस्टिक अंडर माय बुर्का’ स्त्री जीवन...

‘डेंजर चमार’ की गायिका गिन्नी माही का प्रतिरोधी स्वर : हमारी जान इतनी सस्ती...

कौशल कुमार   'द डेंजर चमार' अल्बम के माध्यम से गिन्नी  माही के गीतों में  प्रतिरोध की अभिव्यक्ति का अध्ययन: प्रतिरोध के रूप में प्रदर्शन-  असंतोष से...

पढ़ी-लिखी चुड़ैल: ‘स्त्री’!

साक्षी सिंह  अमर कौशिक द्वारा निर्देशित और श्रद्धा कपूर, राजकुमार राव स्टारर हिंदी फिल्म 'स्त्री' देख कर आई. जाने की कोई ख़ास इच्छा नहीं थी...

नये हिंदी सिनेमा में नयी स्त्री

सुधा अरोडा सुधा अरोडा सुप्रसिद्ध कथाकार और विचारक हैं. सम्पर्क : 1702 , सॉलिटेअर , डेल्फी के सामने , हीरानंदानी गार्डेन्स , पवई ,...

न्याय के भंवर में भंवरी

मंजुल भारद्वाज 25 सालों से रंगमंच में सक्रिय. फाउंडर थियेटर ऑफ़ रेलेवेंस. संपर्क :09820391859 स्त्री-अधिकार की मुखर नायिका सावित्रीबाई फुले के स्मृति दिवस (10...

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायन में महिला कलाकारों का योगदान

राकेश कलोत्तरा पी.एच.डी. शोधार्थी,संगीत विभाग,दिल्ली विश्वविद्यालय,दिल्ली . सम्पर्क:  rakeshkalotra21@gmail.comमो. 9717655412 भारतीय शास्त्रीय संगीत का इतिहास वैदिक काल से ही माना जाता है. मानव और संगीत का...

रंडी, या रंडी से कम और हाँ, बीबी से भी बलात्कार हक़ नहीं

अखिलेश कुमार बी.एच.यु. से इतिहास में स्नातक कर रहे है संपर्क:akhileshfssbhu@gmail.com मैंने पहली बार जब 'ना' कहा तब मैं 8 बरस की थी, "अंकल नहीं .....

जातिरूढ़ सास ‘अनारो’ की भूमिका में मैं अपनी सास को कॉपी कर रही हूँ

स्टार भारत का लोकप्रिय धारवाहिक 'निमकी मुखिया' अपनी ड्रैमेटिक सीमाओं के बावजूद ग्रामीण समाज की जाति व्यवस्था और महिला मुखिया के संघर्ष पर बना...

मेरा एक सपना है ! (मार्टिन लूथर किंग का उद्बोधन,1963)

 मार्टिन लूथर किंग, जूनियर  प्रस्तुति और अनुवाद : यादवेन्द्र    ‘मेरा एक सपना है’, 1963 में वाशिंगटन मार्टिन लूथर किंग, जूनियर द्वारा दिया गया प्रसिद्द भाषाण है, जो उन्होंने...

लिपस्टिक अंडर माय बुर्का : क़त्ल किए गए सपनों का एक झरोखा

ज्योति प्रसाद सुनिए, कहानी की शुरुआत पर ध्यान दीजिये। यह किसी लड़की के जीवन में वहीं से शुरू हो जाती है जब दाई या नर्स क्या...
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लोकप्रिय

भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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