सावधान ! यहाँ बुर्के में लिपस्टिक भी है और जन्नत के लिप्स का आनंद...

संजीव चंदन  पुरुषों के मुकाबले हमारी यौनिकता अधिक दमित है. हमपर आचरण के जितने कड़े नियम आरोपित किये गये हैं उतने कभी भी पुरुषों पर...

प्रवेश सोनी के रेखाचित्र

प्रवेश सोनी  रंगों से बचपन से ही लगाव था ,पत्रिकाओं में आये चित्र कापी करके उनमे रंग भरना अच्छा लगता था |लेकिन निपुणता के लिए...

ब्राह्मणवाद ने की बाजीराव-मस्तानी की हत्या

चंद्र सेन संजय लीला भंसाली की एक और दुखान्त प्रेम-कहानी- बाजीराव-मस्तानी। हर फिल्म निर्देशक की अपनी एक खासियत होती है। भंसाली  को भव्य-सेट और प्रेम...

फिल्म तो हिट होती रहेंगी, माहवारी स्वच्छता को हिट करें

क्वीलिन काकोती आज मैं अपना सैनिटरी पैड खरीदने एक फार्मेसी गयी. दुकानदार के अलावा तीन अन्य पुरुष और एक महिला वहां खड़े थे। मैंने पैड...

मी लार्ड, स्त्रीवाद का रंग ‘पिंक’ है ! कुछ-कुछ (?) लाल और नीला ...

पिंक फिल्म के लिए बजती तालियों के बीच एक बहस फेसबुक पर अलग ढंग से हुई. एक ही उद्देश्य, स्त्रीवाद के पक्ष में, के लिए...

जब प्रलेस के बड़े लेखकों ने पाकिस्तानी महिलाओं से बदसुलूकी की

अब तो दोनों ऐसा शोर मचाने पर उतारू हुए कि दो कलाकारों ने तो कार कर दिया. एक जो हिम्मत करके गाने बैठी तो ‘ फूल नोचो, फूल फेंको’ की जैसे दोनों में बाजी लग गई. इस बार सिर्फ गायिका पर ही नहीं, आसपास बैठे लोगों पर भी फूल बरसने लगे. अब पाकिस्तानी मर्दों में भी कुछ बेचैनी दिखाई दी.ये वे लोग थे जिन्होंने अपनी बहनों, पत्नियों के शौक को दबा देने के बजाय उसे पनपने के मौके दिए थे. इन्हें ख़ुशी थी कि इनके घर की औरतें सर्फ आलिशान बंगलों में बैठकर बनती-संवारती नहीं रहतीं हैं, अपने हुनर को म्हणत और रियाज से निखारने की कोशिश करती हैं.

उम्मीदों के उन्मुक्ताकाश की क्वीन

नीलिमा चौहान पेशे से प्राध्यापक नीलिमा 'आँख की किरकिरी ब्लॉग का संचालन करती हैं. संपादित पुस्तक 'बेदाद ए इश्क' प्रकाशित संपर्क : neelimasayshi@gmail.com. एंड दे...

प्रिया वरियर तुमने ऐसा क्या किया कि मशहूर हो गई!

सुधा सिंह  मलयाली फिल्म 'ओरु आडार लव' की नई अदाकारा प्रिया वरियर का दो दिन पहले जारी वीडियो आज तक का सबसे बड़ा हिट रहा...

थियेटर ऑफ रेलेवेंस – स्वराजशाला

राजेश कासनियां  थियेटर ऑफ रेलेवेंस के बारे में एक शोधार्थी, एक अभिनेता का अनुभव, जिसने इसकी एक कार्यशाला में भाग लिया : मैंने 1 से 5 जुलाई...

न्याय के भंवर में भंवरी

मंजुल भारद्वाज 25 सालों से रंगमंच में सक्रिय. फाउंडर थियेटर ऑफ़ रेलेवेंस. संपर्क :09820391859 स्त्री-अधिकार की मुखर नायिका सावित्रीबाई फुले के स्मृति दिवस (10...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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