यौन उत्पीड़क प्रोफेसरों की जारी सूची पर छिड़ा विवाद: जेएनयू, डीयू सहित 33 बड़े...

अमेरिका स्थित एक स्त्रीवादी भारतीय वकील राया  सरकार ने उन शिक्षाविदों के नामों की सूची  अपने  फेसबुक पेज पर डाली है, जिनपर उनकी विद्यार्थियों...

मेडिकल की छात्रा का सुसाइड नोट शिक्षा और व्यवस्था पर तीखा सवाल

12 जून को इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज में एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली. उसने यह निर्णय लेने के पहले जो आख़िरी नोट...

कंडोम- राष्ट्रवाद, जे एन यू और गार्गी का मस्तक

संजीव चंदन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महिलाओं की सदस्यता नहीं लेता है, स्पष्ट है कि उनके राष्ट्रवाद में महिलाओं की जगह नहीं है- हालांकि उनकी अनुसंगी...

बिहार: असिस्टेंट प्रोफेसर की पिटाई मामले में किसी की नहीं हुई गिरफ्तारी, राजद सांसद...

स्त्रीकाल डेस्क  महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एक असिस्टेंट प्रोफेसर को अपने कुलपति के खिलाफ मुखरता के लिए हमले का शिकार बनाया गया. हमला करने...

#MeToo, पूर्व छात्र संघ अध्यक्षा ने प्र.मं. से कुलपति रतनलाल हंगलू के खिलाफ...

ऋचा सिंह विषय- इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रतन लाल हांगलू पर लगे आरोपों के संबंध में। माननीय प्रधानमंत्री जी, आपको पत्र द्वारा यह बताना चाहती हूं...

इस काण्ड में महिला है, साहित्य है, साहित्य का सम्मान है, उत्पीड़न है, स्कैंडल...

सुशील मानव  इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रतनलाल हंगलू के व्हाट्सऐप चैट और बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद इलाहाबाद में हंगामा बरपा है. मामला...

बुलंद इरादे और युवा सोच के साथ

'स्त्री नेतृत्व की खोज’ श्रृंखला के तहत आज  इलाहाबाद  विश्वविद्यालय की  पहली महिला  छात्रसंघ  अध्यक्ष ऋचा सिंह  की कहानी उनके अपने शब्दों में ....

बीएचयू में लड़कियों की आवाज से क्यों परेशान होते हैं दक्षिणपंथी (?)

राजीव सुमन  पिछले वर्ष 23 सितम्बर 2017 को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बी.एच.यू) में लैंगिग भेदभाव और हिंसा, छेड़खानी, उत्पीड़न व प्रशासन के पितृसत्तात्मक रवैया के...

एबीवीपी-सदस्य की आत्मग्लानि:पत्र से खोला राज, कहा रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या थी ...

शिवसाईं राम / अनुवादक :पूजा सिंह  हैदराबाद  विश्वविद्यालय में एबीवीपी के सदस्य रहे शिवसाईं राम बता रहे है कैसे हुई थी रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या की साजिश.पत्र लिख कर  एबीवीपी की...

बीएचयू में लड़कियों के आंदोलन को हड़पने की रस्साकशी

अनिता भारती  बीएचयू में लड़कियों के स्वतःस्फूर्त आन्दोलन को एबीवीपी और एनएसयूआई द्वारा हड़पने की कोशिश के बारे में बता रही हैं आन्दोलन की एक...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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