महिला शोधार्थियों की प्रताड़ना: विश्वविद्यालय नहीं कलह का केंद्र, पुलिस पर भी सवाल

स्टाफ रिपोर्टर  हिन्दी विश्वविद्यालय में प्रशासनिक भ्रष्टाचार की खबरें आती रहती हैं, विद्यार्थियों के खिलाफ उनके मनमाने निर्णय की भी. इधर विश्वविद्यालय के शोधार्थी एक...

युवा कवयित्री ने की आत्महत्या

स्त्रीकाल डेस्क  युवा कवयित्री और पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान, बीएचयू की शोधछात्रा ख्याति आकांक्षा सिंह ने मंगलवार की सुबह साढ़े चार बजे अपने किराये...

अलीगढ़ विश्वविद्याल का छात्र आन्दोलन : एक आंतरिक विश्लेषण

कमलानंद झा  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर . संपर्क : 08521912909 अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विद्यार्थी अपने विश्वविद्यालय के अस्तित्व को बचाने...

शोधार्थियों ने मनाई सावित्रीबाई फुले जयंती

डेस्क  किसी भी समाज में क्रांतिकारी बदलाव तब ही आ सकता है जब प्रत्येक स्वाभिमानी व्यक्ति एक ईकाई के रूप में स्वतंत्र एवं व्यापक समाज...

यौन उत्पीड़क प्रोफेसरों की जारी सूची पर छिड़ा विवाद: जेएनयू, डीयू सहित 33 बड़े...

अमेरिका स्थित एक स्त्रीवादी भारतीय वकील राया  सरकार ने उन शिक्षाविदों के नामों की सूची  अपने  फेसबुक पेज पर डाली है, जिनपर उनकी विद्यार्थियों...

स्त्री अध्ययन विभागों पर शामत, असोसिएशन भी सवालों के घेरे में

देश भर में विभिन्न विश्वविद्यालयों में लगभग दो सौ  के आस-पास स्त्री अध्ययंन विभाग/केंद्र आज नयी चुनौतियों से जूझ रहे हैं. अभी बमुश्किल चार दशक...

लड़कियाँ सड़को पर आईं तो सौ सालों में बीएचयू को पहली महिला प्रॉक्टर (कुलानुशासक)...

सामाजिक परिवर्तन का परिणाम, एक सौ एक वर्ष का इतिहास टूटा अनिल कुमार सौ सालों में बीएचयू में नियुक्त पहली महिला कुलानुशासक रोयोना ...

बीएचयू में लड़कियों के आंदोलन को हड़पने की रस्साकशी

अनिता भारती  बीएचयू में लड़कियों के स्वतःस्फूर्त आन्दोलन को एबीवीपी और एनएसयूआई द्वारा हड़पने की कोशिश के बारे में बता रही हैं आन्दोलन की एक...

बीएचयू में प्रशासन के गुंडे थे सक्रिय: लाठीचार्ज का आँखों देखा हाल

विकाश सिंह मौर्य 23 सितम्बर को दोपहर बाद अखिल विद्यार्थी परिषद् के उपद्रवी लड़कों ने अफवाह उड़ाई कि मुख्य गेट के सामने स्थित मदन मोहन...

बीएचयू की छात्राओं के समर्थन में आये लेखक संगठन : 25 सितंबर को जंतर...

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के जवाबी नारे ‘बचेगी बेटी तो पढ़ेगी बेटी’ के साथ सड़क पर उतरी बीएचयू की छात्राओं पर बर्बर लाठीचार्ज करवाकर...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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