बलात्कारी के खिलाफ छात्र

मुकेश कुमार   जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शोध छात्रा के साथ भाकपा-माले के छात्र संगठन आइसा के नेता अनमोल रतन द्वारा बलात्कार मामले के खिलाफ...

एक दूसरे के खिलाफ लड़ाई जा रही अस्मिताएं

शालिनी आर्य  इस बार फिर मेरे हमसफर रतन लाल सूर्खियों में हैं. इस बार उनका सुर्खियों में होना पिछले अनेक बार की तुलना में अलग...

अपनी -अपनी वेश्यायें : सन्दर्भ : जे एन यू सेक्स रैकेट

संजीव चंदन प्रोफ़ेसर अमिता सिंह , सोचता हूँ कि आपकी 'जे एन यू सेक्स रैकेट वाली रिपोर्ट'  पर क्या कहूं. आजकल चिट्ठियाँ लिखने का चलन...

महिलाओं दलितों के खिलाफ है इनका राष्ट्रवाद : अपराजिता राजा

जे एन यू पर सरकार और दक्षिणपंथी जमातों के हमले के दौरान बी जे पी के लोगों और हिंदूवादी जमातों के द्वरा सबसे ज्यादा...

कंडोम- राष्ट्रवाद, जे एन यू और गार्गी का मस्तक

संजीव चंदन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महिलाओं की सदस्यता नहीं लेता है, स्पष्ट है कि उनके राष्ट्रवाद में महिलाओं की जगह नहीं है- हालांकि उनकी अनुसंगी...

ब्राह्मणवाद का प्रतीक है राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय

 अरविन्द गौड़ (यह आलेख समकालीन रंगमंच पत्रिका के ‘‘रंगकर्म और प्रशिक्षण‘‘ पर केन्द्रित नये अंक में प्रकाशित होने जा रहे मूल आलेख का एक अंश...

एक सपने की मौत/अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शिक्षा संस्थानों में प्रतिभावान दलितों की आत्महत्या

सुधा अरोड़ा सुधा अरोड़ा सुप्रसिद्ध कथाकार और विचारक हैं. सम्पर्क : 1702 , सॉलिटेअर , डेल्फी के सामने , हीरानंदानी गार्डेन्स ,...

आधुनिक गुरुकुलों में आंबेडकर के वंशजों की हत्या

चंद्र सेन ( रोहित वेमुला की आत्महत्या के कारणों की अकादमिक जगत में व्याप्तता की पड़ताल कर रहे हैं , जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के...

राष्ट्रपति से जातिवादी हत्यारों के खिलाफ कारवाई की मांग

आइये रोहित वेमुला के लिए न्याय की मांग करते हुए राष्ट्रपति से जातिवादी हत्यारों के खिलाफ कारवाई की मांग करें . आपके हस्ताक्षर के लिए...

संघ प्रमुख की सुरक्षा पर हंगामा , आगे आये दलित संगठन

संजीव चंदन  पिछले दिनों नागपुर में मोहन भागवत को लेकर हंगामा खडा हो गया, जब नागपुर महानगरपालिका ने शहर के ऊंटखाना इलाके के डा. बाबासाहब...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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