विश्वविद्यालय पढ़ायेगा इंद्रजाल, जादूगरी, प्रेत बाधा दूर करने की कला:संघ का एनजीओ दे रहा...

मनीषा   बीएचयू के बाद एक खबर यह भी: अभी 23 सितंबर की देर रात बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अपनी सुरक्षा की मांग के साथ शांतिपूर्ण...

‘टच ही तो किया है न और कुछ नहीं किया न’ : प्रशासन के...

विकाश सिंह मौर्य 21 सितम्बर 2017 को बीएचयू के दृश्य कला संकाय में बीएफए की छात्रा अनन्या (बदला हुआ नाम) शाम को लगभग 6.30 बजे...

बीएचयू की बेटियों को देश भर से समर्थन

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्राओं ने छेड़छाड़ के खिलाफ पिछले कई घंटों से प्रदर्शन कर रही हैं. बीएचयू के कुलपति प्रधानमंत्री से अपने...

दलित छात्रा को मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय ने चयन के बाद भी नहीं दिया...

स्त्रीकाल डेस्क  मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल अपने एक विवादास्पद फैसलों के कारण सुर्ख़ियों में है. इसने अपने यहाँ एक पाठ्यक्रम के लिए चयनित दलित...

एक दूसरे के खिलाफ लड़ाई जा रही अस्मिताएं

शालिनी आर्य  इस बार फिर मेरे हमसफर रतन लाल सूर्खियों में हैं. इस बार उनका सुर्खियों में होना पिछले अनेक बार की तुलना में अलग...

बीएचयू में प्रशासन के गुंडे थे सक्रिय: लाठीचार्ज का आँखों देखा हाल

विकाश सिंह मौर्य 23 सितम्बर को दोपहर बाद अखिल विद्यार्थी परिषद् के उपद्रवी लड़कों ने अफवाह उड़ाई कि मुख्य गेट के सामने स्थित मदन मोहन...

युवा कवयित्री ने की आत्महत्या

स्त्रीकाल डेस्क  युवा कवयित्री और पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान, बीएचयू की शोधछात्रा ख्याति आकांक्षा सिंह ने मंगलवार की सुबह साढ़े चार बजे अपने किराये...

अलीगढ़ विश्वविद्याल का छात्र आन्दोलन : एक आंतरिक विश्लेषण

कमलानंद झा  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर . संपर्क : 08521912909 अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विद्यार्थी अपने विश्वविद्यालय के अस्तित्व को बचाने...

एनएसडी में छेड़छाड़, मामले को दबाने की कोशिश, मीडिया में स्त्रीविरोधी रिपोर्टिंग

सुशील मानव  वर्कशॉप के दौरान एनएसडी के पूर्व  शिक्षक और वर्तमान में गेस्ट शिक्षक  सुरेश शेट्टी द्वारा छात्रा से छेड़छाड़ करने का आरोप नेशनल स्कूल...

पत्रकारों, वार्डनों, छात्राओं सब पर बरसायी लाठियां: बीएचयू में पुलिसिया राज

सिद्धांत मोहन  आज रविवार के दिन बीएचयू में कर्फ्यू की स्थिति बनी हुई है. मैं तीन-चार लाठियां खाने के बाद थोड़ी दूरी पर बैठा हुआ...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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