फातिमा लतीफ़: संस्थानों में जाति और धार्मिक भेदभाव की ताजा शिकार(?)

  पिछले साल आईआईटी एंट्रेंस परीक्षा में नेशनल लेवल में टॉपर केरल के कोल्लम जिले की रहने वाली 19 वर्षीय फातिमा लतीफ जो आइआइटी मद्रास...

बेपनाह क्रूरता:शिवपुरी का भावखेड़ी हत्याकांड

सामूहिक हिंसा की किंचित पुरानी किंतु एक उल्लेखनीय घटना जाटव समुदाय के साथ सितंबर 1988 में घटी थी. शिवपुरी के थाना रन्नौत, तहसील बदरवास के गाँव हिनोतिया में दबंगों ने धावा बोलकर जाटवों की झोपड़ियाँ लूट लीं और 43 झोपड़ियों को आग के हवाले कर दिया. इनमें रहने वाले 200 से अधिक जाटव निर्वासित कर दिए गए. उनका अपराध यह था कि उन्होंने चरागाह की कुछ बीघे भूमि जोतकर फसल उगा ली थी

बिहार में बढ़ते बलात्कार: उधर चुनावी नारा नीतीशे कुमार

बिहार के नालंदा जिले के राजगीर में 13 साल की एक नाबालिग के साथ 8 लोगों ने सामूहिक बलात्कार कर उसका वीडियो बनाते हैं और देश भर में वायरल कर देते हैं. वीडियो में बलात्कारी उस लड़की को मारते-पीटते दीखते हैं, उसका साथी जब बलात्कारियों को रोकता है तो उसके साथ भी मारपीट किया जाता है पीड़िता बलात्कारियों से रोती-गिडगिडाती हुए कह रही है, ‘भैया छोड़ दो, हमको अपना बहन समझ के छोड़ दो’. पुलिस ने गंगा राजवंशी, करण राजवंशी, गुगल राजवंशी, विजय कुमार और सोनू कुमार को गिरफ्तार किया है. इनके पास से ऐसे बलात्कार के कई वीडियो बरामद किये गये हैं ऐसा बताया जा रहा है. लेकिन पुलिस ने उन वीडियो की घटनाओं के आधार पर जांच को आज तक नहीं बढाया है. राज्य की जनता आक्रोशित है. घटना के बाद जनता ने शहर में और पिछले दिनों पटना में जमकर प्रदर्शन किया. पुलिस ने उनपर पुरी तरह लाठी चार्जकर उन्हें तीतर-बीतर कर दिया था.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पूर्व व पहली महिला अध्यक्ष ने राष्ट्रपति से चाही इच्छा मृत्यु...

महामहिम आज आपको यह पत्र लिखते समय मैं जीवन के सबसे निराशा के दौर में हूँ क्योंकि हमें नहीं पता कि आप तक हमारी आवाज़ पहुंचेगी भी या नहीं। हम बेहद निराश हैं क्योंकि हम छात्रों ने विश्वविद्यालय में चल रही अनियमिताओं के खिलाफ़, विश्वविद्यालय प्रशासन के भरष्टाचार के खिलाफ़, अपने छात्रसंघ को बचाने के लिये पिछले साठ दिनों से लगातार अहिंसात्मक ढंग से आंदोलनरत हैं, हमारे नौजवान छात्रों ने क्रमिक अनशन से होते हुए आमरण अनशन तक करते हुए अपनी जान को दांव पर लगा दिया, आमरण अनशन पर बैठे छात्रों को ख़ून की उल्टियां होने लगी पर हमारी आवाज़ न आप तक पहुँची न ही मानव संसाधन मंत्रालय तक। हमारे अहिंसात्मक आंदोलन को एक तानाशाह ने बूटों से कुचल दिया, पर केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए ज़िम्मेदार संस्थाओं की नींद नहीं टूटी।

प्रधानमंत्री को पत्र लिखना हुआ गुनाह: 6 बहुजन छात्र निष्कासित

ये सिलसिला आगे बढ़ता है जब महात्मा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के प्रशासन ने छह विद्यार्थियों को निष्काशित कर दिया जाता है, चन्दन सरोज, नीरज कुमार, राजेश सारथी, रजनीश अम्बेडकर, पंकज वेला और वैभव पिंपलकर इन लोगों ने इस अलोकतांत्रिक कार्रवाई का विरोध करते हुए 9 अक्टूबर को विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री को पत्र लिखने का सामूहिक कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें छात्र-छात्राओं ने अपने पत्र में पीएम मोदी प्रधानमंत्री से देश के मौजूदा हालात को देखते हुए कुछ सवालों का जवाब मांगा है. छात्र-छात्राओं ने देश में दलित-अल्पसंख्यकों के मॉबलिंचिंग से लेकर कश्मीर को पिछले दो माह से कैद किए जाने; रेलवे-बीपीसीएल-एयरपोर्ट आदि के निजीकरण; दलित-आदिवासी नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं एवं बुद्विजीवी- लेखकों के बढ़ते दमन और उनपर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने पर भी सवाल खड़े किए हैं. छात्र-छात्राओं ने महिलाओं पर बढ़ती यौन हिंसा व बलात्कार की घटनाओं के सवाल पर भी जवाब माँगा है. क्या ये सवाल जायज नहीं है? इन सवालों से देश की छवि खराब हो जाएगी?

अमेज़न क्यों जला?

आज दुनिया भर में आदिवासियों पर खतरा मंडरा रहा है पूंजीवादी सत्ता का. भारत में ब्राह्मणवादी व्यवस्था पहले से ही आदिवासीयों को हिन्दू बता कर उनकी संस्कृति उनकी पहचान को ख़त्म कर रही है और आरएसएस बीजेपी जैसे ब्राह्मणवादी फासीवादी हिन्दूवादी संगठन आक्रामक रूप से उनको शारीरिक और मानसिक रूप से ख़त्म करने की प्रक्रिया में है. जिसे हम जंगल, नदी, पहाड़ों के रखवाले के तौर पर जानते हैं क्या वो थे में बदल जायेंगे?

खौफ और आशंकाओं में जी रहे कश्मीर के लोग, नाबालिगों और महिलाओं पर भी...

श्रीनगर के एक लल्ला डेड महिला अस्पताल में कई युवा महिला डॉक्टरों ने अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से उन बाधाओं पर अपनी पूरी निराशा व्यक्त की वहां कई ऐसे मामले हैं महिलाएं प्रसव के लिए समय पर नहीं आ सकती हैं। बहुत कम एम्बुलेंस हैं; जो एम्बुलेंस चल रहा होता है उन्हें रास्ते में ही पिकेट पर रोक दिया जाता है। प्रसव के कई मामले ऐसे हैं अच्छे से इलाज नहीँ होने के कारण बच्चे विकृति के साथ जन्म जन्म ले रहे हैं. यह उनके माता-पिता को आजीवन कष्ट दिया जा रहा है। वर्तमान स्थिति में तनाव और खौफ (भय) के कारण कई महिलाएं समय से पहले बच्चों को जन्म दे रही हैं। एक युवा महिला चिकित्सक ने दुख के साथ हमें बताया ऐसा लगता है कि सरकार हमारा गला घोंट रही है.

डीयू (DU) प्रशासन का महिला विरोधी और अमानवीय व्यवहार

एक महिला जो कि बीमार है, जिस पर वह पीरियड में भी है क्या उसकी मूलभूत सुविधाओं को ध्यान नहीं रखना चाहिए? क्या उस अकेली लड़की से इस व्यवस्था को इतना डर था कि उसको बाहर ही रखा गया। जबकि उसकी स्थिति खराब थी? यदि कोई आ जा नहीं सकता तो इनके जानने वाले लोग हम तक कैसे पहुँच गए। यदि यहाँ से यानी इस फ्लोर से बाहर जाना ही आंदोलन को खत्म करना माना जा रहा है तो रात में मीडियाकर्मियों के आने पर हमपर नीचे आने का दवाब क्यों बनाया गया। वह लड़की रात 11 बजे यहां से अकेले गई, यदि उसको कुछ हो जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता।

बिहार:महिला कांस्टेबल की हत्या: संदेहास्पद पुलिस, बेखबर सरकार, बेशर्म मीडिया

स्थानीय अखबारों के अनुसार पुलिस अपनी इंट्री के साथ ही संदिग्ध भूमिका में दिख रही है. दैनिक हिन्दुस्तान ने 5 जून को लिखा, ‘सीवान पुलिस स्नेहा के शव के साथ लगातार साजिश रच रही है। सोमवार की देर रात को सीवान पुलिस ने स्नेहा के शव को नौवागढ़ी स्थित उसके घर पहुंचाया। इसके बाद सीवान पुलिस के द्वारा रात में ही शव को जलाने का दबाव बनाया जा रहा था। लेकिन परिजनों ने कहा कि अधिक रात होने के कारण शव मंगलवार को जलाया जाएगा।

बिहार शेल्टर होम: जारी है लड़कियों का यौन-शोषण, पूर्णिया से नया मामला, लड़कियों को...

बिहार के शेल्टर होम में लड़कियों का यौन-शोषण बदस्तूर जारी है. ताजा मामला बिहार के पूर्णिया शेलटर होम से सामने आया है....
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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