केंद्र सरकार के न चाहने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने खत्म की व्यभिचार की...

स्त्रीकाल डेस्क  केंद्र सरकार के न चाहने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ ने गुरुवार को भारतीय आचार दंड संहिता (आईपीसी)...

भीमा-कोरेगांव हिंसा पर एनडीए के डिप्टी मेयर की फैक्ट फायन्डिंग रिपोर्ट से उड़ सकती...

एक ओर पुणे, महाराष्ट्र की पुलिस सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, वकीलों को भीमा-कोरेगाँव में 1 जनवरी को हुई हिंसा का दोषी मानते हुए गिरफ्तार कर...

देशवासियों के नाम पूर्वोत्तर की बहन का एक खत

तेजी ईशा प्रिय देशवासियों,  यह खत  इस उम्मीद के साथ कि आप इसे पढ़ पाएंगे. मुझे नहीं पता कि मेरे साथ यह सब क्यों हो रहा हैं?...

सखी का सखी को प्रेम पत्र: खुल गई बेडियां!

यशस्विनी पाण्डेय प्यारी सखी , वैसे तो आमतौर पर मै पत्र लिखते हुए कोई संबोधन नहीं देती, क्योंकि ये मेरा पत्र लिखने का अपना आइकॉन है....

समलैंगिकता को मिली सुप्रीम मान्यता: अंतरंगता निजी मामला

राजीव सुमन  नई दिल्ली, 6 सितम्बर : समलैंगिकता की धारा 377 को लेकर चल रहे घमासान पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना अहम फैसला सुना...

एशियाड में स्त्रीकाल: मर्दवादी रूढ़ियों को हराकर महिलाओं ने फहराये परचम

सुशील मानव मर्दवादी रुढ़ियों व आर्थिक-सामाजिक बाधाओं को पारकर भारतीय महिला खिलाड़ियों ने एशियाड के फलक पर दर्ज़ किया अपना नाम इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में...

जांच और एसपी के ट्रांसफर से असंतुष्ट कोर्ट ने सीबीआई को लताड़ा: मुजफ्फरपुर शेल्टर...

स्त्रीकाल डेस्क मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में बच्चियों से बलात्कार मामले में सीबीआई जांच की प्रगति से असंतुष्ट हाई कोर्ट ने आज सीबीआई को जमकर...

केरल का आपदा संकट, तंगदील मोदी सरकार और पीड़ितों को ट्रोल करते उत्साही हिन्दू

राजीव सुमन  देश का एक राज्य केरल इस वक़्त बहुत बड़ी प्राकृतिक विपदा से जूझ रहा है. र्प्राकृतिक सौन्दर्य से लैस केरल आज सदी की...

बिहार: असिस्टेंट प्रोफेसर की पिटाई मामले में किसी की नहीं हुई गिरफ्तारी, राजद सांसद...

स्त्रीकाल डेस्क  महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एक असिस्टेंट प्रोफेसर को अपने कुलपति के खिलाफ मुखरता के लिए हमले का शिकार बनाया गया. हमला करने...

ब्राह्मणवादियों द्वारा संविधान जलाने पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

स्त्रीकाल डेस्क  पिछले 9 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर आरक्षण विरोधी अभियान चलाने वाले सवर्णों ने भारतीय संविधान की प्रतियां जला डालीं. और...
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भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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