कुछ यूं आयी धारा 497:ऐतिहासिक संदर्भों में ऐडल्ट्री

लाल बाबू ललित  जब हम ऐडल्ट्री शब्द की बात करते हैं तो सामान्य अर्थों में इसका मतलब होता है दो विपरीतलिंगी व्यक्तियों के बीच अमान्य...

कार्बाइड का कलंक : औरतों की आपबीतियां

स्वाति तिवारी लेखन की कई विधाओं में सक्रिय स्वाति तिवारी मध्यप्रदेश सरकार की एक अधिकारी हैं.   संपर्क : stswatitiwari@gmail.com  ( ३० साल हो गए...

समलैंगिकता को मिली सुप्रीम मान्यता: अंतरंगता निजी मामला

राजीव सुमन  नई दिल्ली, 6 सितम्बर : समलैंगिकता की धारा 377 को लेकर चल रहे घमासान पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना अहम फैसला सुना...

क्या वे लड़कियां सच में निर्वस्त्र रहती थीं: पटना शेल्टर होम की आँखों देखी...

रंजना  पटना शेल्टर होम की आँखों देखी कहानी बता रही हैं रंजना  बात  तब की है जब मै हर शनिवार पटना के सुधारगृह में जाती थी...

करुणानिधि: एक ऐसा व्‍यक्ति जिसने बिना आराम किए काम किया, अब आराम कर रहा...

मनोरमा सिंह  तमिलनाडु  की राजनीति के भीष्म पितामह कहे जाने वाले तमिलनाडु  के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके नेता एम करुणानिधि की 94 वर्ष की आयु में कल...

सखी का सखी को प्रेम पत्र: खुल गई बेडियां!

यशस्विनी पाण्डेय प्यारी सखी , वैसे तो आमतौर पर मै पत्र लिखते हुए कोई संबोधन नहीं देती, क्योंकि ये मेरा पत्र लिखने का अपना आइकॉन है....

एम.जे. अकबर के मानहानि मुकदमे में नया मोड़: दिल्ली बार काउंसिल दिल्ली ने वकालतनामे...

स्त्रीकाल डेस्क  पूर्व केन्द्रीय मंत्री एम जे अकबर द्वारा दिल्ली के पटियाला हाई कोर्ट में दायर मानहानि के मुकदमे में खुद उनके लिए मुश्किलें बढ़...

कार्बाइड का कलंक

स्वाति तिवारी लेखन की कई विधाओं में सक्रिय स्वाति तिवारी मध्यप्रदेश सरकार की एक अधिकारी हैं.   संपर्क : stswatitiwari@gmail.com ( ३० साल हो गए...

दलितों आंदोलनों को माओवादी बताने का पैटर्न पुराना है: सिविल सोशायटी में आक्रोश

स्त्रीकाल डेस्क  6 जून की सुबह नागपुर-मुम्बई-दिल्ली से दलित कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों की गिरफ्तारी कर महाराष्ट्र पुलिस  1 जनवरी, 2018 को भीमा-कोरेगाँव में हुई हिंसा...

भीमा कोरेगाँव को अलग रंग देने की कोशिश: प्रोफेसर शोमा सेन, वकील गडलिंग, सहित...

स्त्रीकाल स्टाफ रिपोर्टिंग  महाराष्ट्र पुलिस ने आज सुबह, बुधवार 6 जून को,  देशव्यापी सक्रियता के साथ भीमा-कोरेगांव मामले में 5 लोगों की गिरफ्तारी की. नागपुर...
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भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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