नीतीश सरकार के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन 30 जुलाई को

स्त्रीकाल डेस्क  मुजफ्फरपुर बालिका-संरक्षण गृह में बच्चियों से बलात्कार के मामले में यद्यपि राज्यसरकार ने सीबीआई जांच का आदेश दे दिया है, लेकिन सरकार के...

बिहार: असिस्टेंट प्रोफेसर की पिटाई मामले में किसी की नहीं हुई गिरफ्तारी, राजद सांसद...

स्त्रीकाल डेस्क  महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एक असिस्टेंट प्रोफेसर को अपने कुलपति के खिलाफ मुखरता के लिए हमले का शिकार बनाया गया. हमला करने...

नये पेशवाओ की नई थ्योरी ‘अर्बन माओइस्ट’

सीमा आज़ाद  सीमा आज़ाद  सामाजिक कार्यकर्ता एवं साहित्यकार हैं. संपर्क :seemaaazad@gmail.com 6 जून 2018 को सुबह ही यह खबर देश भर में फैल गयी कि देश...

बेपनाह क्रूरता:शिवपुरी का भावखेड़ी हत्याकांड

सामूहिक हिंसा की किंचित पुरानी किंतु एक उल्लेखनीय घटना जाटव समुदाय के साथ सितंबर 1988 में घटी थी. शिवपुरी के थाना रन्नौत, तहसील बदरवास के गाँव हिनोतिया में दबंगों ने धावा बोलकर जाटवों की झोपड़ियाँ लूट लीं और 43 झोपड़ियों को आग के हवाले कर दिया. इनमें रहने वाले 200 से अधिक जाटव निर्वासित कर दिए गए. उनका अपराध यह था कि उन्होंने चरागाह की कुछ बीघे भूमि जोतकर फसल उगा ली थी

केरल का आपदा संकट, तंगदील मोदी सरकार और पीड़ितों को ट्रोल करते उत्साही हिन्दू

राजीव सुमन  देश का एक राज्य केरल इस वक़्त बहुत बड़ी प्राकृतिक विपदा से जूझ रहा है. र्प्राकृतिक सौन्दर्य से लैस केरल आज सदी की...

हैदराबाद एनकाउंटर : इंसाफ के तकाजे पर, इंसाफ की बलि

भारतीय इतिहास में छह दिसंबर एक ऐतिहासिक दिन है। इस दिन देश के संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का महापरिनिर्वाण है। इसी दिन...

सावित्रीबाई फुले के नाम से बने स्त्री अध्ययन पीठ: सरकार से स्त्रीकाल की मांग,...

नई दिल्ली, मंगलवार 3 दिसंबर को स्त्रीकाल की पहल पर सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री (राज्य) रामदास आठवले ने मानव संसाधन विकास मंत्री डा....

बिहार:महिला कांस्टेबल की हत्या: संदेहास्पद पुलिस, बेखबर सरकार, बेशर्म मीडिया

स्थानीय अखबारों के अनुसार पुलिस अपनी इंट्री के साथ ही संदिग्ध भूमिका में दिख रही है. दैनिक हिन्दुस्तान ने 5 जून को लिखा, ‘सीवान पुलिस स्नेहा के शव के साथ लगातार साजिश रच रही है। सोमवार की देर रात को सीवान पुलिस ने स्नेहा के शव को नौवागढ़ी स्थित उसके घर पहुंचाया। इसके बाद सीवान पुलिस के द्वारा रात में ही शव को जलाने का दबाव बनाया जा रहा था। लेकिन परिजनों ने कहा कि अधिक रात होने के कारण शव मंगलवार को जलाया जाएगा।

अमेज़न क्यों जला?

आज दुनिया भर में आदिवासियों पर खतरा मंडरा रहा है पूंजीवादी सत्ता का. भारत में ब्राह्मणवादी व्यवस्था पहले से ही आदिवासीयों को हिन्दू बता कर उनकी संस्कृति उनकी पहचान को ख़त्म कर रही है और आरएसएस बीजेपी जैसे ब्राह्मणवादी फासीवादी हिन्दूवादी संगठन आक्रामक रूप से उनको शारीरिक और मानसिक रूप से ख़त्म करने की प्रक्रिया में है. जिसे हम जंगल, नदी, पहाड़ों के रखवाले के तौर पर जानते हैं क्या वो थे में बदल जायेंगे?

बिहार के 14 संस्थानों में बच्चों का यौन शोषण: रिपोर्ट

रोहिण कुमार  कुछ महीने पहले बिहार सरकार की पहल पर टाटा इंस्टिट्युट ऑफ सोशल साइंसेस (टीआईएसएस या टिस) ने बिहार के बालगृहों का एक सोशल...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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