समलैंगिकता को मिली सुप्रीम मान्यता: अंतरंगता निजी मामला

राजीव सुमन  नई दिल्ली, 6 सितम्बर : समलैंगिकता की धारा 377 को लेकर चल रहे घमासान पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना अहम फैसला सुना...

सखी का सखी को प्रेम पत्र: खुल गई बेडियां!

यशस्विनी पाण्डेय प्यारी सखी , वैसे तो आमतौर पर मै पत्र लिखते हुए कोई संबोधन नहीं देती, क्योंकि ये मेरा पत्र लिखने का अपना आइकॉन है....

सावित्रीबाई फुले के नाम से बने स्त्री अध्ययन पीठ: सरकार से स्त्रीकाल की मांग,...

नई दिल्ली, मंगलवार 3 दिसंबर को स्त्रीकाल की पहल पर सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री (राज्य) रामदास आठवले ने मानव संसाधन विकास मंत्री डा....

महिला पत्रकार की हत्या: पनामा लीक की खबर से दुनिया भर में पैदा किया...

माल्टा की एक खोजी पत्रकार  17 अक्टूबर को अपनी कार में एक बम विस्फोट से मारी गयी. डेफने कारुआना गैलिज़िया नामक पत्रकार ने लीक...

जानें उस महिला राजनेता को जिसने मोदी-रथ की रफ्तार रोक दी

स्त्रीकाल डेस्क  बीजेपी की सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयोगशाला बने इलाके और खासकर लोकसभा क्षेत्र में बेगम तबस्सुम हसन ने अपनी जीत दर्ज कर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण...

पुलिस कहती है सरकारी फंड पाने के लिए सेक्स रैकेट चलाता था ब्रजेश ठाकुर

स्त्रीकाल डेस्क  बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की जांच की कमान सीबीआई ने 29 जुलाई को अपने हाथों में ले ली थी लेकिन 6...

एशियाड में स्त्रीकाल: मर्दवादी रूढ़ियों को हराकर महिलाओं ने फहराये परचम

सुशील मानव मर्दवादी रुढ़ियों व आर्थिक-सामाजिक बाधाओं को पारकर भारतीय महिला खिलाड़ियों ने एशियाड के फलक पर दर्ज़ किया अपना नाम इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में...

प्रसूति अवकाश पर गयी शिक्षिका को केंद्रीय विवि ने किया निलंबित

महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के जैव प्रौद्योगिकी एवं जीनोम विभाग अंतर्गत सहायक प्रोफेसर स्वा‍ती मनोहर को निलंबित कर दिया गया है। शिक्षक संघ,...

अमेज़न क्यों जला?

आज दुनिया भर में आदिवासियों पर खतरा मंडरा रहा है पूंजीवादी सत्ता का. भारत में ब्राह्मणवादी व्यवस्था पहले से ही आदिवासीयों को हिन्दू बता कर उनकी संस्कृति उनकी पहचान को ख़त्म कर रही है और आरएसएस बीजेपी जैसे ब्राह्मणवादी फासीवादी हिन्दूवादी संगठन आक्रामक रूप से उनको शारीरिक और मानसिक रूप से ख़त्म करने की प्रक्रिया में है. जिसे हम जंगल, नदी, पहाड़ों के रखवाले के तौर पर जानते हैं क्या वो थे में बदल जायेंगे?

नये पेशवाओ की नई थ्योरी ‘अर्बन माओइस्ट’

सीमा आज़ाद  सीमा आज़ाद  सामाजिक कार्यकर्ता एवं साहित्यकार हैं. संपर्क :seemaaazad@gmail.com 6 जून 2018 को सुबह ही यह खबर देश भर में फैल गयी कि देश...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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