बलात्कृत रंगकर्मियों को पुलिस ने कैद कर रखा है: फैक्ट फाइंडिंग टीम

'यौन हिंसा एवं दमन के खिलाफ महिलायें (WSS)' की अगुआई में झारखंड गयी फैक्ट फाइंडिंग टीम ने अपने अंतरिम रिपोर्ट में कोचांग में गत...

देवी के नाम पर शेल्टर होम और चलता था सेक्स रैकेट त्रिपाठी परिवार: एक...

सुशील मानव  “ यहाँ   कई दीदी हैं। उन्हें बड़ी मैडम रात को कहीं भेजती थी। कभी लाल गाड़ी तो कभी काली गाड़ी आती थी उनको...

प्रधानमंत्री को पत्र लिखना हुआ गुनाह: 6 बहुजन छात्र निष्कासित

ये सिलसिला आगे बढ़ता है जब महात्मा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के प्रशासन ने छह विद्यार्थियों को निष्काशित कर दिया जाता है, चन्दन सरोज, नीरज कुमार, राजेश सारथी, रजनीश अम्बेडकर, पंकज वेला और वैभव पिंपलकर इन लोगों ने इस अलोकतांत्रिक कार्रवाई का विरोध करते हुए 9 अक्टूबर को विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री को पत्र लिखने का सामूहिक कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें छात्र-छात्राओं ने अपने पत्र में पीएम मोदी प्रधानमंत्री से देश के मौजूदा हालात को देखते हुए कुछ सवालों का जवाब मांगा है. छात्र-छात्राओं ने देश में दलित-अल्पसंख्यकों के मॉबलिंचिंग से लेकर कश्मीर को पिछले दो माह से कैद किए जाने; रेलवे-बीपीसीएल-एयरपोर्ट आदि के निजीकरण; दलित-आदिवासी नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं एवं बुद्विजीवी- लेखकों के बढ़ते दमन और उनपर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने पर भी सवाल खड़े किए हैं. छात्र-छात्राओं ने महिलाओं पर बढ़ती यौन हिंसा व बलात्कार की घटनाओं के सवाल पर भी जवाब माँगा है. क्या ये सवाल जायज नहीं है? इन सवालों से देश की छवि खराब हो जाएगी?

जब पक्ष-विपक्ष के लोगों ने महिला विधायक पर की द्विअर्थी टिप्पणियाँ ( बिहार विधानसभा...

दिव्या  श्री इंदर सिंह नामधारी : माननीय अध्यक्ष महोदय, विरोधी दल में एक ही महिला सदस्य हैं उनको भी यह सरकार संतुष्ट नहीं कर पा...

अमेज़न क्यों जला?

आज दुनिया भर में आदिवासियों पर खतरा मंडरा रहा है पूंजीवादी सत्ता का. भारत में ब्राह्मणवादी व्यवस्था पहले से ही आदिवासीयों को हिन्दू बता कर उनकी संस्कृति उनकी पहचान को ख़त्म कर रही है और आरएसएस बीजेपी जैसे ब्राह्मणवादी फासीवादी हिन्दूवादी संगठन आक्रामक रूप से उनको शारीरिक और मानसिक रूप से ख़त्म करने की प्रक्रिया में है. जिसे हम जंगल, नदी, पहाड़ों के रखवाले के तौर पर जानते हैं क्या वो थे में बदल जायेंगे?

एम.जे. अकबर के मानहानि मुकदमे में नया मोड़: दिल्ली बार काउंसिल दिल्ली ने वकालतनामे...

स्त्रीकाल डेस्क  पूर्व केन्द्रीय मंत्री एम जे अकबर द्वारा दिल्ली के पटियाला हाई कोर्ट में दायर मानहानि के मुकदमे में खुद उनके लिए मुश्किलें बढ़...

बिहार: असिस्टेंट प्रोफेसर की पिटाई मामले में किसी की नहीं हुई गिरफ्तारी, राजद सांसद...

स्त्रीकाल डेस्क  महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एक असिस्टेंट प्रोफेसर को अपने कुलपति के खिलाफ मुखरता के लिए हमले का शिकार बनाया गया. हमला करने...

पत्थलगड़ी के खिलाफ बलात्कार की सरकारी-संघी रणनीति (!)

अश्विनी कुमार पंकज  क्या बिरसा मुंडा की धरती खूंटी से शुरू हुए पत्थलगडी आंदोलन को वहां  21 जून को 5 नुक्कड़ नाट्यकर्मियों  से हुए सामूहिक...

पानी लाने के लिए कई शादियाँ करते हैं मर्द: औरतों को पानी वाली सौतन...

कहते हैं कि तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा। तीसरे विश्व युद्ध का इंतजार किए बिना देश की अधिसंख्य महिलाएं रोज ही पानी...

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पूर्व व पहली महिला अध्यक्ष ने राष्ट्रपति से चाही इच्छा मृत्यु...

महामहिम आज आपको यह पत्र लिखते समय मैं जीवन के सबसे निराशा के दौर में हूँ क्योंकि हमें नहीं पता कि आप तक हमारी आवाज़ पहुंचेगी भी या नहीं। हम बेहद निराश हैं क्योंकि हम छात्रों ने विश्वविद्यालय में चल रही अनियमिताओं के खिलाफ़, विश्वविद्यालय प्रशासन के भरष्टाचार के खिलाफ़, अपने छात्रसंघ को बचाने के लिये पिछले साठ दिनों से लगातार अहिंसात्मक ढंग से आंदोलनरत हैं, हमारे नौजवान छात्रों ने क्रमिक अनशन से होते हुए आमरण अनशन तक करते हुए अपनी जान को दांव पर लगा दिया, आमरण अनशन पर बैठे छात्रों को ख़ून की उल्टियां होने लगी पर हमारी आवाज़ न आप तक पहुँची न ही मानव संसाधन मंत्रालय तक। हमारे अहिंसात्मक आंदोलन को एक तानाशाह ने बूटों से कुचल दिया, पर केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए ज़िम्मेदार संस्थाओं की नींद नहीं टूटी।
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‘प्रसाद की रचनाओं में स्त्री स्वर की अभिव्यक्ति’

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