कई अन्य शेल्टर होम में बलात्कार की पुष्टि, सरकार की भूमिका संदिग्ध

सुशील मानव बिहार के शेल्टर होम को लेकर एक के एक बाद नये खुलासे हो रहे हैं। मुजफ्फरपुर के बालिका गृह ‘सेवा संकल्प’ के बाद...

नीतीश सरकार के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन 30 जुलाई को

स्त्रीकाल डेस्क  मुजफ्फरपुर बालिका-संरक्षण गृह में बच्चियों से बलात्कार के मामले में यद्यपि राज्यसरकार ने सीबीआई जांच का आदेश दे दिया है, लेकिन सरकार के...

कार्बाइड का कलंक : औरतों की आपबीतियां

स्वाति तिवारी लेखन की कई विधाओं में सक्रिय स्वाति तिवारी मध्यप्रदेश सरकार की एक अधिकारी हैं.   संपर्क : stswatitiwari@gmail.com  ( ३० साल हो गए...

झारखण्ड के 20 सामाजिक कार्यकर्त्ताओं पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज, आलोका कुजूर का...

प्रस्तुति और रिपोर्ट : राजीव सुमन  26 जुलाई  को करीब साढ़े ग्यारह बजे झारखण्ड के खूँटी जिले के खूँटी थाना में 20 लोगो पर देशद्रोह...

हृदयहीन शासकों, सुनो बच्चों की चीख और माओं की आहें !

गोरखपुर ज़िले के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाने से लगभग 60 बच्चों के मरने की ख़बर है. हालांकि योगी...

आप मिट्टी की तरह बने थे…

लेखक-आलोचक-प्रत्रकार आज 4 जून को निधन हो गया. उन्हें निगम बोध घाट में आख़िरी विदाई दी गयी. उनके परिनिर्वाण के बाद उनकी स्मृति में...

दलित स्त्रियों पर पुलिसिया बर्बरता का नाम है नीतीश सरकार

भागलपुर में विभिन्न मांगो के साथ जिला कलक्टर  ऑफिस के सामने धरने पर बैठी महिलाओं पर पुलिस ने बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज किया  तस्वीरों में बर्बरता...

जब पक्ष-विपक्ष के लोगों ने महिला विधायक पर की द्विअर्थी टिप्पणियाँ ( बिहार विधानसभा...

दिव्या  श्री इंदर सिंह नामधारी : माननीय अध्यक्ष महोदय, विरोधी दल में एक ही महिला सदस्य हैं उनको भी यह सरकार संतुष्ट नहीं कर पा...

कुछ यूं आयी धारा 497:ऐतिहासिक संदर्भों में ऐडल्ट्री

लाल बाबू ललित  जब हम ऐडल्ट्री शब्द की बात करते हैं तो सामान्य अर्थों में इसका मतलब होता है दो विपरीतलिंगी व्यक्तियों के बीच अमान्य...

पुलिस कहती है सरकारी फंड पाने के लिए सेक्स रैकेट चलाता था ब्रजेश ठाकुर

स्त्रीकाल डेस्क  बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की जांच की कमान सीबीआई ने 29 जुलाई को अपने हाथों में ले ली थी लेकिन 6...
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भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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