दलितों आंदोलनों को माओवादी बताने का पैटर्न पुराना है: सिविल सोशायटी में आक्रोश

स्त्रीकाल डेस्क  6 जून की सुबह नागपुर-मुम्बई-दिल्ली से दलित कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों की गिरफ्तारी कर महाराष्ट्र पुलिस  1 जनवरी, 2018 को भीमा-कोरेगाँव में हुई हिंसा...

भीमा कोरेगाँव को अलग रंग देने की कोशिश: प्रोफेसर शोमा सेन, वकील गडलिंग, सहित...

स्त्रीकाल स्टाफ रिपोर्टिंग  महाराष्ट्र पुलिस ने आज सुबह, बुधवार 6 जून को,  देशव्यापी सक्रियता के साथ भीमा-कोरेगांव मामले में 5 लोगों की गिरफ्तारी की. नागपुर...

जब पक्ष-विपक्ष के लोगों ने महिला विधायक पर की द्विअर्थी टिप्पणियाँ ( बिहार विधानसभा...

दिव्या  श्री इंदर सिंह नामधारी : माननीय अध्यक्ष महोदय, विरोधी दल में एक ही महिला सदस्य हैं उनको भी यह सरकार संतुष्ट नहीं कर पा...

आप मिट्टी की तरह बने थे…

लेखक-आलोचक-प्रत्रकार आज 4 जून को निधन हो गया. उन्हें निगम बोध घाट में आख़िरी विदाई दी गयी. उनके परिनिर्वाण के बाद उनकी स्मृति में...

जानें उस महिला राजनेता को जिसने मोदी-रथ की रफ्तार रोक दी

स्त्रीकाल डेस्क  बीजेपी की सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयोगशाला बने इलाके और खासकर लोकसभा क्षेत्र में बेगम तबस्सुम हसन ने अपनी जीत दर्ज कर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण...

राष्ट्रपति के पूर्व ओसडी और उसके भाई पर शोधार्थी ने लगाया शोषण का आरोप

स्त्रीकाल डेस्क  आगरा में पीएचडी की छात्रा उपमा शर्मा  ने राष्ट्रपति के पूर्व ओएसडी और संपादक कन्हैया त्रिपाठी पर गंभीर आरोप लगाये हैं. छात्रा ने...

अभी तो बहुत कुछ शेष था ! (रजनी तिलक का असमय जाना)

संजीव चंदन अलग-अलग सरोकारों के लोग, वामपंथी लेखक और एक्टिविस्ट, अम्बेडकरवादी लेखक और एक्टिविस्ट, सामाजिक संस्थाओं के लोग, महिला अधिकार के कार्यकर्ता, एलजीबीटी समूह की...

आदिवासी बच्चों के स्कूल बंद कर रही सरकार और लूट लिये आदिवासी मद के...

महाराष्ट्र में आदिवासी मद के पैसों  के  बड़े बंदरबाँट  का मामला सामने आया है. संघ प्रायोजित स्कूलों  और निजी स्कूलों के हित में सरकारी...

पुलिस ज्यादती: कठपुतली कलाकारों पर दिल्ली में बरसीं लाठियां: हजारो गरीब जबरन बेघर किये...

एक वह दिन था, अभी तीन महीने पहले, जब कठपुतली कलाकार सरबती भट्ट ने  स्त्रीकाल से बात करते हुए आक्रोश और जोश के साथ...

महिला पत्रकार की हत्या: पनामा लीक की खबर से दुनिया भर में पैदा किया...

माल्टा की एक खोजी पत्रकार  17 अक्टूबर को अपनी कार में एक बम विस्फोट से मारी गयी. डेफने कारुआना गैलिज़िया नामक पत्रकार ने लीक...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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