रक्तरंजित कहानी महिला प्रतिनिधित्व की

उपेन्द्र कश्यप  (आज बिहार विधान सभा के लिए चुनाव का प्रथम चरण शुरू हुआ है. इस अवसर 2001 में मारी गई महिला मुखिया की कहानी...

कंडोम , सनी लियोन और अतुल अंजान की मर्दवादी चिंता

दरवाजे पर धीमे बदलावों की थाप                                      ...

संघ प्रमुख की सुरक्षा पर हंगामा , आगे आये दलित संगठन

संजीव चंदन  पिछले दिनों नागपुर में मोहन भागवत को लेकर हंगामा खडा हो गया, जब नागपुर महानगरपालिका ने शहर के ऊंटखाना इलाके के डा. बाबासाहब...

इस दुनिया को जितनी जल्दी हो बदल देना चाहिए

सीमा आज़ाद ये आंखें हैं तुम्हारी तकलीफ का उमड़ता हुआ समन्दर इस दुनिया को जितनी जल्दी हो बदल देना चाहिए गोरख पाण्डे की ये कविता 16 दिसम्बर से ही बार-बार जेहन...

कार्बाइड का कलंक : औरतों की आपबीतियां

स्वाति तिवारी लेखन की कई विधाओं में सक्रिय स्वाति तिवारी मध्यप्रदेश सरकार की एक अधिकारी हैं.   संपर्क : stswatitiwari@gmail.com  ( ३० साल हो गए...

कार्बाइड का कलंक

स्वाति तिवारी लेखन की कई विधाओं में सक्रिय स्वाति तिवारी मध्यप्रदेश सरकार की एक अधिकारी हैं.   संपर्क : stswatitiwari@gmail.com ( ३० साल हो गए...

भाजपा सरकार से अपील : फॉरवर्ड प्रेस पर पुलिस कार्यवाई और उसके संपादकों के...

( देश भर से साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फॉरवर्ड प्रेस पर हुए हमले के खिलाफ यह अपील जारी की है . यदि आप...

महिला मताधिकार पर बहस : सन्दर्भ बिहार विधान परिषद ( १९२१ , १९२५, १९२९...

डा मुसाफिर बैठा डा मुसाफिर बैठा कवि और सामाजिक -सांस्कृतिक विषयों के चिन्तक हैं . सम्प्रति बिहार विधान परिषद् में कार्यरत हैं. संपर्क : 09835045947,...

मंडल और महिला आरक्षण

वासंती रामन ( इस सरकार में ६ महिला मंत्रियो को विशिष्ट विभागों का पदभार दिया गया है . यह लोकसभा भी महिला सदस्यों के मामले...

बेहाल गाँव, बेहाल बेटियां , गायब पौधे… धरहरा , जहाँ बेटी पैदा होने पर...

 संजीव चंदन         यह गाँव अचानक से देश -विदेश में चर्चित हो गया, जब 2010 में सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने...
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लोकप्रिय

भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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