हैप्पी बड्डे #MeToo: एक साल का हुआ मीटू अभियान: कितना असर-कितना बेअसर!

सीमा आज़ाद 15 अक्टूबर 2018 यानि आज ‘मीटू’ आन्दोलन एक साल का हो गया, वह ‘हैशटैग’ आन्दोलन जिसे हॉलीवुड अभिनेत्री अलीसा मिलाने ने शुरू किया।...

#MeToo, पूर्व छात्र संघ अध्यक्षा ने प्र.मं. से कुलपति रतनलाल हंगलू के खिलाफ...

ऋचा सिंह विषय- इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रतन लाल हांगलू पर लगे आरोपों के संबंध में। माननीय प्रधानमंत्री जी, आपको पत्र द्वारा यह बताना चाहती हूं...

नफरत के खिलाफ “अमन की बातें”: महिलाओं की यात्रा का आज दिल्ली में...

स्त्रीकाल डेस्क  20 सितम्बर 2018 से देश की स्त्रियाँ "बातें अमन की" यात्रा पर हैं. यह यात्रा देश भर में अमन राग बिखेरते हुए अपने...

मी टू कैंपेन से जुड़े कुछ सवाल, शंकाएं और भविष्य का भारत

जया निगम  तनुश्री दत्ता के नाना पाटेकर द्वारा यौन उत्पीड़न के 10 साल पहले के एक हादसे की स्वीकारोक्ति ने हमारे देश में #MeToo की...

बनारस से लेकर वर्चुअल स्पेस तक वे हर आवाज को दबाने में लगे हैं

सुशील मानव  क्या सत्ता का हर अंग-उपांग जनता की आवाज को दबाने में लगे हैं. बनारस में किसानों के मुद्दे पर 'गाँव के लोग' के...

कुछ यूं आयी धारा 497:ऐतिहासिक संदर्भों में ऐडल्ट्री

लाल बाबू ललित  जब हम ऐडल्ट्री शब्द की बात करते हैं तो सामान्य अर्थों में इसका मतलब होता है दो विपरीतलिंगी व्यक्तियों के बीच अमान्य...

मेरा एक सपना है ! (मार्टिन लूथर किंग का उद्बोधन,1963)

 मार्टिन लूथर किंग, जूनियर  प्रस्तुति और अनुवाद : यादवेन्द्र    ‘मेरा एक सपना है’, 1963 में वाशिंगटन मार्टिन लूथर किंग, जूनियर द्वारा दिया गया प्रसिद्द भाषाण है, जो उन्होंने...

मन की बात और स्वच्छता की ढोंग वाली सरकार ज़रा हम सफाई कर्मियों का...

सुशील मानव अंबेडकर महासभा द्वारा सफाईकर्मियों की सीवर में मौत के खिलाफ़ 25 सितंबर को देशव्यापी आंदोलन के आह्वान पर ‘सफाई कर्मचारी यूनियन दिल्ली’ की...

मुजफ्फरपुर यौन-शोषण मामले में जांच की धीमी गति: सुप्रीम कोर्ट करेगा निगरानी, हटाया मीडिया...

सुशील मानव  बिहार के मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में बच्चियों से बलात्कार के मामले में जांच की गति और दिशा असंतोषजनक है. सुप्रीम कोर्ट को...

सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया पर प्रतिबंध मामले में बिहार सरकार से मांगा जवाब, मीडिया-गाइडलाइन...

स्त्रीकाल डेस्क  मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में बच्चियों से बलात्कार मामले की जांच पर मीडिया रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध लगाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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