देशवासियों के नाम पूर्वोत्तर की बहन का एक खत

तेजी ईशा प्रिय देशवासियों,  यह खत  इस उम्मीद के साथ कि आप इसे पढ़ पाएंगे. मुझे नहीं पता कि मेरे साथ यह सब क्यों हो रहा हैं?...

मुजफ्फरपुर बलात्कार मामले में मीडिया रिपोर्टिंग बैन के खिलाफ स्त्रीकाल संपादकीय सदस्य निवेदिता पहुँची...

राजीव सुमन   5 सितम्बर 2018 को सर्वोच्च न्यायालय में पटना उच्च न्यायलय द्वारा मुजफ्फरपुर शेल्टर होम-बलात्कार मामले की जांच से सम्बंधित मीडिया रिपोर्ट पर प्रतिबन्ध-आदेश  को...

अभिव्यक्ति के खतरे : क्या मोदी दूसरी इंदिरा होंगे!

अरविंद जैन आपातकालीन कार्यवाही में देश के जाने-माने बुद्धिजीवियों (लेखक-वकील-पत्रकार) की गिरफ्तारी के साथ अनेक आशंकाएँ और गंभीर सवाल आमने-सामने आ खड़े हुए हैं. क्या...

मंडल मसीहा को याद करते हुए

लेखक : प्रेमकुमार मणि 25 अगस्त उस विन्ध्येश्वरी प्रसाद मंडल का जन्मदिन है , जिनकी अध्यक्षता वाले आयोग के प्रस्तावित फलसफे को लेकर 1990 के...

जांच और एसपी के ट्रांसफर से असंतुष्ट कोर्ट ने सीबीआई को लताड़ा: मुजफ्फरपुर शेल्टर...

स्त्रीकाल डेस्क मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में बच्चियों से बलात्कार मामले में सीबीआई जांच की प्रगति से असंतुष्ट हाई कोर्ट ने आज सीबीआई को जमकर...

नीतीश कुमार को कौन दे रहा धीमा जहर (!)

संजीव चंदन नीतीश जी उम्मीद है मजे में होंगे, सत्ता मजे में ही रखती है! चाहे लाख बलाएँ आयें, राज्य में बेटियों से राज्य-संरक्षित बलात्कार हो...

वह भविष्य का नेता था लेकिन राजनीति ने उसे तुष्टिकरण में फंसा दिया (!)

लाल बाबू ललित  परिस्थितिजन्य मजबूरियों के कारण राजनीति में पदार्पण को विवश हुआ वह शख्स अपनी मस्ती में अपनी बीवी, अपने बच्चों  और अपने पेशे...

साम्प्रदायिक हिंसा से अलग तासीर है मॉब लींचिंग की

इरफान इंजीनियऱ पिछले कुछ वर्षों में मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा व्यक्ति या व्यक्तियों को पीट-पीटकर मार डालना) की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है,...

वर्मा जी,शर्मा जी, रावत जी, सबके हैं संबंध बच्चियों के बलात्कार काण्ड से

स्त्रीकाल डेस्क  इधर देश का ध्यान मीडिया ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लम्बी बीमारी के बाद मृत्यु पर केन्द्रित कर रखा है उधर...

अटल निर्णयों में अटल नहीं रहे, किये वंचित समाज विरोधी फैसले भी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक ओर भावभीनी श्रद्धांजलि दी जा रही है तो दूसरी ओर उनकी निर्मम आलोचना भी हो रही है....
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भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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