महिला मताधिकार पर बहस : सन्दर्भ बिहार विधान परिषद ( १९२१ , १९२५, १९२९...

डा मुसाफिर बैठा डा मुसाफिर बैठा कवि और सामाजिक -सांस्कृतिक विषयों के चिन्तक हैं . सम्प्रति बिहार विधान परिषद् में कार्यरत हैं. संपर्क : 09835045947,...

भाजपा का चार साल: प्रधानमंत्री से नाराज आधी आबादी

डेस्क  भाजपा की अगुआई में एनडीए सरकार अपने चार साल पूरे होने का जश्न मना रही है. हालांकि विरोधी पार्टियां इस अवसर पर मंहगाई और...

‘दलित’ शब्द दलित पैंथर आंदोलन के इतिहास से जुड़ा है: रामदास आठवले

'दलित' शब्द पर प्रतिबंध के खिलाफ सरकार के मंत्री आठवले  केरल सरकार ने दलित और हरिजन शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. सरकार...

संघ के गढ़ में गड़करी को चुनौती देगी यह बहुजन नेता: क्या है सन्देश

उनकी उम्मीदवारी का एक बड़ा महत्व यह है भी है कि उनका परिवार डा. अम्बेडकर के नेतृत्व में हुए स्त्री आंदोलनों का भी भागीदार रहा है.

बीजेपी, आरएसएस में भगदड़, उबरने के लिए वे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करेंगे: अरुंधती रॉय

स्त्रीकाल डेस्क  लेखक और एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय ने कहा है कि देश की पूरी बुनियाद को ही तोड़ा जा रहा है और सत्ता के साथ...

क्या वे लड़कियां सच में निर्वस्त्र रहती थीं: पटना शेल्टर होम की आँखों देखी...

रंजना  पटना शेल्टर होम की आँखों देखी कहानी बता रही हैं रंजना  बात  तब की है जब मै हर शनिवार पटना के सुधारगृह में जाती थी...

स्मृति जी कंडोम के विज्ञापन वल्गर तो डीयो के संस्कारी कैसे?

श्वेता यादव अष्टभुजा शुक्ल की लाइनें हैं एक हाथ में पेप्सी कोला दूजे में कंडोम, तीजे में रमपुरिया चाकू चौथे में हरिओम, कितना ललित ललाम...

कार्बाइड का कलंक : औरतों की आपबीतियां

स्वाति तिवारी लेखन की कई विधाओं में सक्रिय स्वाति तिवारी मध्यप्रदेश सरकार की एक अधिकारी हैं.   संपर्क : stswatitiwari@gmail.com  ( ३० साल हो गए...

हैप्पी बड्डे #MeToo: एक साल का हुआ मीटू अभियान: कितना असर-कितना बेअसर!

सीमा आज़ाद 15 अक्टूबर 2018 यानि आज ‘मीटू’ आन्दोलन एक साल का हो गया, वह ‘हैशटैग’ आन्दोलन जिसे हॉलीवुड अभिनेत्री अलीसा मिलाने ने शुरू किया।...

देशवासियों के नाम पूर्वोत्तर की बहन का एक खत

तेजी ईशा प्रिय देशवासियों,  यह खत  इस उम्मीद के साथ कि आप इसे पढ़ पाएंगे. मुझे नहीं पता कि मेरे साथ यह सब क्यों हो रहा हैं?...
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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।