हम तुम्हारा बलात्कार कर देंगे: भारत माता की जय!

 संजीव चंदन  ऐसा नहीं है कि उन्होंने पहली बार गुरमेहर कौर को और उसके दोस्तों को ही बलात्कार की धमकी दी है- ऐसा वे पहले...

संघ के गढ़ में गड़करी को चुनौती देगी यह बहुजन नेता: क्या है सन्देश

उनकी उम्मीदवारी का एक बड़ा महत्व यह है भी है कि उनका परिवार डा. अम्बेडकर के नेतृत्व में हुए स्त्री आंदोलनों का भी भागीदार रहा है.

दलित स्त्रियों पर पुलिसिया बर्बरता का नाम है नीतीश सरकार

भागलपुर में विभिन्न मांगो के साथ जिला कलक्टर  ऑफिस के सामने धरने पर बैठी महिलाओं पर पुलिस ने बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज किया  तस्वीरों में बर्बरता...

जन्मदिन पर झूठ, फर्जी जश्न और निर्दोषों का घर-बदर: क्या खूब मोदी जी!

1. सरदार सरोवर बाँध की ऊँचाई 138.68 मीटर है और वह 1979 में नर्मदा ट्रिब्यूनल में दिए गए फैसले के        ...

जाति, जेंडर, राजनीति और दलित मुक्ति का प्रश्न: कोविंद बनाम कुमार

रतनलाल  समाज और संस्थानों में भले ही दलितों का शोषण, भेदभाव और अत्याचार बदस्तूर जारी हो, लेकिन राजनीति में ‘दलित’ शब्द अब तक ब्रांड वैल्यू...

क्या वे लड़कियां सच में निर्वस्त्र रहती थीं: पटना शेल्टर होम की आँखों देखी...

रंजना  पटना शेल्टर होम की आँखों देखी कहानी बता रही हैं रंजना  बात  तब की है जब मै हर शनिवार पटना के सुधारगृह में जाती थी...

देश के किसी नेता में न यह हैसियत है, न हिम्मत की वह तानाशाही...

राज्यसभा सांसद और हिन्दी के विद्वान् देवीप्रासाद त्रिपाठी से संजीव चंदन और उत्पलकान्त अनीस की बातचीत   मूलतः हमलोग समय को लेकर बात करेंगे. आपको...

बिल्डर और डीडीए के गुंडों ने मुझे मारा, शुरुआत दिल्ली पुलिस ने की थी:...

‘पहली शुरुआत तो जरूर पुलिस ने की थी, लेकिन उसके बाद दिल्ली डेवलॉपमेंट अथॉरिटी (डीडीए) के और बिल्डर के गुंडों  के हवाले कर दिया....

कार्बाइड का कलंक

स्वाति तिवारी लेखन की कई विधाओं में सक्रिय स्वाति तिवारी मध्यप्रदेश सरकार की एक अधिकारी हैं.   संपर्क : stswatitiwari@gmail.com ( ३० साल हो गए...

महिला आरक्षण विधेयक को पारित करो [अपील पर हस्ताक्षर करें ]

इस लिंक पर जाकर अपील पर हस्ताक्षर करें  महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पहली बार १२ सितम्बर, १९९६ को प्रस्त्तुत किया गया था. उसके बाद...
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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।