धारा 370 हटाये जाने की विरोधी भारतीय मूल की महिला अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद की...

भारतीय मूल की कमला हैरिस जो डेमोक्रेट्स पार्टी की ओर से उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं, वह पहली अश्वेत महिला होने के साथ-साथ भारतीय...

बंगाल का काला जादू नहीं, यह जादू सियासत का है: सुशांत प्रकरण

प्रेमकुमार मणि जहाँ लाखों  लोग महामारी से उत्पीड़ित हो रहे हों, हजारों मर रहे हों, और सरकारें विवश -लाचार दिख रही हों, वहाँ एक अभिनेता...

बेटियों के हक का फैसला

दीप्ति शर्मा  बेटियों के अधिकार की बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमे जन्म से ही बेटियाँ होंगी पिता की...

चार करोड़ की फेलोशिप पाने वाली बेटी सुदीक्षा को मर्दवाद ने मार दिया

सुदीक्षा भाटी ने 5वीं तक की पढ़ाई डेरी स्कैनर गांव के प्राइमरी स्कूल से की थी वह गरीब परिवार की होनहार बेटी थी, उसने...

‘सखुआ’ एक पहल

आदिवासी महिलाओं की एक नयी पहल है - 'सखुआ' आईआईएमसी की छात्रा रह चुकी मोनिका मारांडी की एक अनूठी पहल है- 'सखुआ'। इसके संचालन का...

हैदराबाद एनकाउंटर : इंसाफ के तकाजे पर, इंसाफ की बलि

भारतीय इतिहास में छह दिसंबर एक ऐतिहासिक दिन है। इस दिन देश के संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का महापरिनिर्वाण है। इसी दिन...

अपने विचारों और व्यक्तित्व की विराटता के साथ प्रासंगिक महामानव: डॉ. अम्बेडकर

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को आज उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर पूरा देश याद कर रहा है, पूरी दुनिया याद कर रही है. आज...

प्रसूति अवकाश पर गयी शिक्षिका को केंद्रीय विवि ने किया निलंबित

महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के जैव प्रौद्योगिकी एवं जीनोम विभाग अंतर्गत सहायक प्रोफेसर स्वा‍ती मनोहर को निलंबित कर दिया गया है। शिक्षक संघ,...

सावित्रीबाई फुले के नाम से बने स्त्री अध्ययन पीठ: सरकार से स्त्रीकाल की मांग,...

नई दिल्ली, मंगलवार 3 दिसंबर को स्त्रीकाल की पहल पर सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री (राज्य) रामदास आठवले ने मानव संसाधन विकास मंत्री डा....

भाई न होता तो मैं सावित्रीबाई फुले को नहीं जान पाती

किसी अपने के बारे में कुछ भी लिखना कितना मुश्किल होता है यह मुझे आज समझ में आया। वैसे मैंने सोचा नहीं था कि...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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