जाने क्या कुछ है महिलाओं के लिए कांग्रेस के पिटारे में: कांग्रेस का घोषणापत्र

समाज के श्रमशील वर्ग की महिलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणा है जिसमे प्रवासी महिला श्रमिकों के लिए पर्याप्त रैन बसेरों, कसबों और शहरों में महिलाओं के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित शौचालयों की संख्या बढ़ाने, सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों और कॉलेजों में सेनेटरी नेपकिन वेंडिंग मशीने लगाने की बात है.

चुनाव आयोग को महिला संगठनों का पत्र: समुचित राजनीतिक प्रतिनिधत्व के लिए हस्तक्षेप की...

हम सभी राजनीतिक दलों से, उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से परे जकार आग्रह करते हैं, कि वे महिलाओं के सशक्तीकरण और मुक्ति के उनके बार-बार के चुनावी दावे की दिशा में काम करें। दक्षिण या वाम, हर पंथ के राजनीतिक दलों में सभी ने व्यक्तिगत या सामूहिक क्षमता में महिला आरक्षण के पारित होने का समर्थन करने की बात की है। यह भाषणों और चुनाव घोषणापत्रों में अक्सर किया जाने वाला एक चुनावी वादा रहा है। फिर भी, इस विधेयक को न तो लोकसभा में लाया गया है और न ही राजनीतिक दलों द्वारा अपने स्वयं संगठन के भीतर जेंडर-न्याय की दिशा में कोई कदम उठाया गया है।

सुधा उपाध्याय को मिला 14वां शीला सिद्धान्तकर स्मृति सम्मान: पढ़ें उनकी दो कविताएं

14वां शीला सिद्धान्तकर स्मृति सम्मान इस साल कवयित्री सुधा उपाध्याय को दिये जाने का निर्णय लिया गया है. उन्हें यह सम्मान उन्हें उनके...

एक बहुजन नेत्री की संभावनाएं : मनीषा बांगर

इर्शादुल हक़ मायावती को कांशी राम ने अवसर दिया तो उन्होंने अपनी लीडरशिप साबित करके दिखाई. वह...

मेरी माँ मेरा आदर्श..!

इंदिरा जी के इस कथन से सीख लेते हुए कि “राजनीति में अगर रहना है तो टीका-टिप्पणी, निंदा, सहन करने की और पचाने की क्षमता होनी चाहिए” माँ ने जीवन के कटु-अनुभवों से सिख लेते हुए हर स्थिति का सामना करने की शक्ति प्राप्त की. जब मैं जिला परिषद् की अध्यक्षा बनी तो भी उन्होंने मुझे यही समझाया कि ‘किसी का बुरा मत करना. नेकी कर दरिया में डाल’ उनका कहना है कि गरीब के सेवा से ही भगवान की पूजा हो जाती है.

चार अप्रैल को बदलाव का आगाज करती महिलायें होंगी सड़क पर

महिलाओं का मानना है कि वे नफरत और हिंसा के मौजूदा माहौल के खिलाफ और लोकतांत्रिक गणराज्य के नागरिकों के रूप में अपने संवैधानिक अधिकारों का दावा करने सडक पर उतर रही हैं. महिला मार्च फॉर चेंज का उद्देश्य भारत में महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों पर हमलों के खिलाफ आ राही है आवाजों को एकजुट करना है।

पटना में याद की गयीं रमणिका गुप्ता

हित्यिक संगठन बागडोर, दूसरा शनिवार, समन्वय और कोरस की संयुक्त पहल पर पटना कॉलेज सेमिनार हॉल में इसका आयोजन संपन्न हुआ।उपस्थित लोगों ने रमणिका गुप्ता की फोटो पर पुष्पांजलि अर्पित की, उनसे जुड़ी स्मृतियां साझी की और उनकी कविताओं का भी पाठ किया।

‘विज्ञापनों में महिलाओं का प्रस्तुतीकरण:आर्थिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य’

उपासना गौतम पी-एच. डी शोधार्थी,महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय,वर्धा. सम्पर्क: sonpari2003@gmail.com प्रस्तावना लिंगाधारित व्यवस्था में खड़ी विभिन्न संस्थाओं  और उसके घटकों ने स्त्री अधीनस्थता का पूरा लाभ...

अभी तक रॉड, तेज़ाब, मोमबत्ती और अब औरत के गुप्तांग में सिगरेट भी: सोशल...

स्त्रीकाल डेस्क  इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक सोशल मीडिया में अपने विरोध के बावजूद अमेज़न इंडिया ने  महिलाओं  के यौन अंग को टार्गेट कर...

समकालीन महिला लेखन को संबोधित संगोष्ठी

पहले सत्र में मुंबई के कलाकारों की एक टीम 'जश्न- ए- कलम' की शश्विता शर्मा ने इस्मत चुग़ताई की प्रसिद्ध कहानी 'छुईमुई' तथा राजेश कुमार ने राजेंद्र यादव की कहानी 'किनारे से किनारे तक' की एकल प्रस्तुति की।
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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