जेंडर-स्वतन्त्रता के नाम एक “कवितामय” शाम

स्त्रीकाल और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के हिंदी विभाग द्वारा जेंडर-स्वतंत्रता को संबोधित कविता  पाठ का आयोजन किया गया. जेंडर से मुक्त समाज का उद्देश्य...

ब्राह्मणवाद,पितृसत्ता और पुनरुत्थानवाद की चुनौतियों से निपटने की जरूरत

स्त्रीकाल और राष्ट्रीय दलित महिला आंदोलन द्वारा वर्तमान का 'सामाजिक और सांस्कृतिक संकट तथा दलित साहित्य के समक्ष चुनौतियां', और ' समता की समग्र...

लोकतंत्र की हत्या हो रही है.. अब एक सिर्फ जुमला नहीं है !

भारती वत्स निर्भीक पत्रकार गौरी लंकेश की ह्त्या के एक महीने के बाद भी उनके हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं हुई है. उनकी ह्त्या पर...

बस्तर- आईजी ने महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं को दी गाली

 बेला भाटिया के घर पर सोमवार को क़रीब 30 अज्ञात लोगों ने हमला कर उन्हें बस्तर छोड़ देने की धमकी दी थी. इसके बाद...

दूसरी महिला रक्षामंत्री और पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण:प्रतिनिधित्व का अपना महत्व

वाणिज्य मंत्रालय  में स्वतंत्र प्रभार मंत्री निर्मला सीतारमण को देश का नया रक्षामंत्री बनाया गया है. इंदिरा गांधी के बाद सीतारमण देश की महिला...

ब्राह्मणवादियों द्वारा संविधान जलाने पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

स्त्रीकाल डेस्क  पिछले 9 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर आरक्षण विरोधी अभियान चलाने वाले सवर्णों ने भारतीय संविधान की प्रतियां जला डालीं. और...

हमारी पार्टी गरीबों की पार्टी है : दीपंकर भट्टाचार्य

बिहार चुनाव का तीसरा फेज 28 को है. छोटे -बड़े दलों के नेता हवाई मार्ग ( हेलीकॉप्टरों) से राज्य के खेत -खलिहानों में उतर...

युवा कवयित्री ने की आत्महत्या

स्त्रीकाल डेस्क  युवा कवयित्री और पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान, बीएचयू की शोधछात्रा ख्याति आकांक्षा सिंह ने मंगलवार की सुबह साढ़े चार बजे अपने किराये...

बिहार के 14 संस्थानों में बच्चों का यौन शोषण: रिपोर्ट

रोहिण कुमार  कुछ महीने पहले बिहार सरकार की पहल पर टाटा इंस्टिट्युट ऑफ सोशल साइंसेस (टीआईएसएस या टिस) ने बिहार के बालगृहों का एक सोशल...

भारत माता जार-बेजार रो रही है

 प्रेमकुमार मणि चर्चित साहित्यकार एवं राजनीतिक विचारक हैं. अपने स्पष्ट राजनीतिक स्टैंड के लिए जाने जाते हैं. संपर्क : manipk25@gmail.com ( 'भारत माता की जय'...

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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।