प्रिंट त्रैमासिक

स्त्रीकाल (अक्टूबर-दिसंबर) पढ़ें नॉटनल पर

स्त्रीकाल का ताजा अंक (अक्टूबर-दिसंबर) नॉटनल पर. ऑनलाइन पढ़ने के लिए सबसे नीचे दिये गए लिंक को क्लिक करें:  ताजा अंक में संसद के दोनो सदनों में...

स्त्रीकाल -अंक 8

( स्त्रीकाल के प्रिंट एडिशन का यह ८ वां अंक है . ' वैयक्तिक / राजनीतिक' विशेषांक का अतिथि सम्पादन   कवयित्री और स्त्रीवादी...

स्त्रीकाल द्विमासिक ई जर्नल (शोध), अंक 27-28 ( दिसम्बर मार्च )

स्त्रीकाल शोध द्विमासिक का यह दिसम्बर-मार्च अंक है. अंक 27-28. इस अंक में .दीनानाथ मौर्य,  अनिता शुक्ल, अंजली पटेल, रतन लाल,विकल सिंह, सीमा मिश्रा,...

स्त्रीकाल : स्त्रीवादी चिंतन का आर्काइव

नूतन यादव नूतन यादव दिल्ली विश्वविद्यालय  में पढ़ा रही  हैं. फेसबुक पर सक्रीय स्त्रीवादी टिप्पणीकार हैं. संपर्क  :09810962991  ( स्त्रीकाल , स्त्री का समय...
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भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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