श्रद्धांजलि : कपिला वात्स्यायन

प्रेमकुमार मणि यह अजीब संयोग है कि कपिला वात्स्यायन जी के निधन की सूचना मुझे तब मिली ,जब मैं उन्ही द्वारा लिखित एक किताब में...

स्त्री विमर्श की वैचारिकी में मील पत्थर है ‘बधिया स्त्री’

ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह (शोधार्थी)     आज हम लोग जिस समाज में रह रहे हैं, उसमें समाज के उपेक्षित वर्गों के हित के पक्ष में...

जामिया हिंसा पुलिस की इस्लामोफोबिया का उदाहरण:रिपोर्ट

अरुणा  सिन्हा  74वां स्वतंत्रता दिवस का वर्ष! लेकिन आज जितना अंग्रेजी राज का दौर याद  आ रहा है,और दिमाग में यह भ्रम पैदा कर रहा...

बंगाल का काला जादू नहीं, यह जादू सियासत का है: सुशांत प्रकरण

प्रेमकुमार मणि जहाँ लाखों  लोग महामारी से उत्पीड़ित हो रहे हों, हजारों मर रहे हों, और सरकारें विवश -लाचार दिख रही हों, वहाँ एक अभिनेता...

बेटियों के हक का फैसला

दीप्ति शर्मा  बेटियों के अधिकार की बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमे जन्म से ही बेटियाँ होंगी पिता की...

चार करोड़ की फेलोशिप पाने वाली बेटी सुदीक्षा को मर्दवाद ने मार दिया

सुदीक्षा भाटी ने 5वीं तक की पढ़ाई डेरी स्कैनर गांव के प्राइमरी स्कूल से की थी वह गरीब परिवार की होनहार बेटी थी, उसने...

अलविदा ‘इलीना सेन’

'संजीव चंदन' इलीना (मैडम) सेन क्या भूलूँ क्या याद करूं ...! इलीना मैडम चाहता हूँ कि आपको अपने स्वर्णिम यादों में याद रखूं, याद रखूं कि...

नबनीता देव सेन की कविताएं

7 नवंबर 2019 को कैंसर की वजह से नबनीता देव सेन नहीं रहीं. बंगाल की कवयित्री, गीतकार, व्यंग्य लेखिका राधारानी देबी की बेटी पद्मश्री...

प्यार से आपलोग किन्नर बुलायें तो अच्छा लगेगा

जब मैं 12 या 13 साल की हुई तो मुझे लड़का-लड़की से अलग महसूस होने लगा था. वैसे तो मैं बचपन से ही लड़कियों के साथ गुड्डा–गुड्डी, भांडी–भांडी,रस्सी उड़ी, खो-खो खेलती थी. जब मैं 13 साल की हो गई तब मेरा लड़कों की ओर आकर्षण और बढ़ने लगा. तब मुझे महसूस हुआ कि मैं लड़का-लड़की से अलग हूँ.

अपनी वैचारिकी को समसामयिक आंदोलनों से जोड़ने को तत्पर दिखे लेखक संगठन

आशुतोष कुमार, ‘ अब हमारे लेखकों पहचान बदली जा रही है| चाहे सूरदास हों , निराला हों, उनसब को ‘हिन्दू राष्ट्रवादी’ सिद्ध किया जा रहा है|’ उन्होंने आन्दोलन को आंबेडकरी बनाने और आंबेडकर (विचार) को रेडिकल बनाने की आवश्यकता बताई| धीरेन्द्र नाथ के पर्चे का वाचन संजीव कुमार ने किया| धीरेन्द्र ने उन स्रोतों की तरफ फिर से जाने की बात की जिन्हें हम अति प्रगतिशीलता के दबाव में अनदेखा करते आए हैं|
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‘प्रसाद की रचनाओं में स्त्री स्वर की अभिव्यक्ति’

पूनम प्रसाद जयशंकर प्रसाद आधुनिक हिन्दी साहित्य के गौरान्वित व महान लेखक हैं।जिनके कृतित्व का गौरव अक्षुण है। उनकी प्रतिभा का निरूपण कविता, कहानी, नाटक,...
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