किन्नर अब ‘थर्ड जेंडर’ की तरह पहचाने जाएंगे

(‘जल,जंगल और जमीन: उलट-पुलट पर्यावरण’ नामक चर्चित पुस्तक के लेखक सरोकारी पत्रकार स्वतंत्र मिश्र का यह लेख किन्नरों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘थर्ड जेंडर’...
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भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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