पश्चिम उत्तर प्रदेश : स्त्री की नियति

प्रेमपाल शर्मा प्रेमपाल शर्मा सामाजिक -सांस्कृतिक चिन्तक हैं.संपर्क: 22744596(घर),23383315(कार्या),Email:prempalsharma@yahoo.co.in, Website www.prempalsharma.com ( प्रेमपाल शर्मा का यह आलेख पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पितृसत्तात्मक समाज के दीर्घकालीन ...

हरियाणा की मनीपुरी बहुएं

अफ़लातून अफलू अफ़लातून समाजवादी चिन्तक हैं . समाजवादी जनपरिषद के राष्ट्रीय सचिव हैं ,इनसे इनके ई मेल आई डी : aflatoon@gmail.com पर संपर्क किया...

बदलाव की बयार : जद्दोजहद अभी बाकी है

अमृता ठाकुर ( यह आलेख हरियाणा के सतरोल खाप के द्वारा , महिला विंग बनाने , अन्तरजातीय विवाहों को मान्यता देने आदि के फैसलों के...

बेहाल गाँव, बेहाल बेटियां , गायब पौधे… धरहरा , जहाँ बेटी पैदा होने पर...

 संजीव चंदन         यह गाँव अचानक से देश -विदेश में चर्चित हो गया, जब 2010 में सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने...

एक यायावर पत्रकार

राजेंद्र प्रसाद सिंह भाषाविद राजेन्द्र प्रसाद सिंह हिन्दी आलोचना में अपने हस्तक्षेप के लिए जाने जाते हैं. यह लेख उनकी पुस्‍तक  ‘हिंदी का अस्मितामूलक साहित्य...

प्रसंग : मोदी और दलित

तुलसीराम ( जब द्विज समूह मोदी की सत्ता की आगवानी के लिए पलक –पावडे बिछाये हुए है , तब मोदी को अति पिछडा और चाय वाला गरीब...

हिन्दू पराक्रम का कैसे हो प्रतिकार

  ( भगाणा में दलित लडकियों पर बलात्कार के पीछे की हिन्दू और द्विज मानसिकता  और उसके प्रतिकार की पडताल में एच एल दुसाध का...

कब तक नचवाते और तालियाँ बजवाते रहेंगे हम !

( थर्ड जेंडर की पीडा के प्रति संवेदनशीलता के साथ धर्मवीर सिंह ने अस्मिता की आवाज , उसके भीतर के अंतरविरोध , साहित्य ,...

किन्नर अब ‘थर्ड जेंडर’ की तरह पहचाने जाएंगे

(‘जल,जंगल और जमीन: उलट-पुलट पर्यावरण’ नामक चर्चित पुस्तक के लेखक सरोकारी पत्रकार स्वतंत्र मिश्र का यह लेख किन्नरों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘थर्ड जेंडर’...
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लोकप्रिय

रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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