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समसामयिक | स्त्रीकाल | Page 3

देवी के नाम पर शेल्टर होम और चलता था सेक्स रैकेट त्रिपाठी परिवार: एक...

सुशील मानव  “ यहाँ   कई दीदी हैं। उन्हें बड़ी मैडम रात को कहीं भेजती थी। कभी लाल गाड़ी तो कभी काली गाड़ी आती थी उनको...

कार्बाइड का कलंक

स्वाति तिवारी लेखन की कई विधाओं में सक्रिय स्वाति तिवारी मध्यप्रदेश सरकार की एक अधिकारी हैं.   संपर्क : stswatitiwari@gmail.com ( ३० साल हो गए...

हिन्दी पाठ्यपुस्तकों में स्त्री छवि

कमलानंद झा कमलानंद झा केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिहार में हिन्दी अध्ययन के विभागाध्यक्ष हैं. इन्होने पाठ्यक्रमों की सामाजिकी पर शोध किया है : मोबाइल...

इस्लाम में हराम परिवार-नियोजन: एक मिथक

हुस्न  तबस्सुम निंहां शोध-सारांश अब तक के समय में जहां भारत ने विभिन्न  क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है वहीं कुछ समस्याएं आज भी जस की...

एफ जी एम / सी यानि योनि पर पहरा

नीलिमा चौहान पेशे से प्राध्यापक नीलिमा 'आँख की किरकिरी ब्लॉग का संचालन करती हैं. संपादित पुस्तक 'बेदाद ए इश्क' प्रकाशित संपर्क : neelimasayshi@gmail.com. नाइजीरिया ने...

किन्नर अब ‘थर्ड जेंडर’ की तरह पहचाने जाएंगे

(‘जल,जंगल और जमीन: उलट-पुलट पर्यावरण’ नामक चर्चित पुस्तक के लेखक सरोकारी पत्रकार स्वतंत्र मिश्र का यह लेख किन्नरों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘थर्ड जेंडर’...

न मार्क्सवाद, न अंबेडकरवाद, न स्त्रीवाद , बस एक्सपोजर चाहिए और मंच

सुशील मानव  देश और समाज में  नफ़रत, वैमनस्य, असहिष्णुता, हताशा और मातम का माहौल है और साहित्य में लगातार एक के बाद उत्सव मनाए जा...

पैसे की हवस विरासत में मिली थी हंटर वाले अंकल ‘ब्रजेश ठाकुर’ को !

वीरेन नंदा मुजफ्फरपुरकाण्ड के मुख्य सरगना ब्रजेश ठाकुर के अन्तःपुर की कहानी बता रहे हैं वरिष्ठ साहित्कार वीरेन नंदा. वीरेन नंदा अयोध्या प्रसाद खत्री सम्मान...

अगर सांवली रात खूबसूरत है तो सांवला चेहरा कैसे बुरा हो सकता हैं ?

इति शरण  ( मेरी दो बहनें हैं , एक गोरी है और एक सांवली. मैं दोनो से क्रमशः 10 और 12 साल बड़ा  हूँ.  टी....

क्या आप छत्तीसगढ़ की पहली महिला सांसद मिनीमाता को जानते हैं?

ज्योति प्रसाद कुछ ही हफ़्ते बाक़ी हैं इस देश के लोकतंत्र के चुनावों में. मीडिया से लेकर देश...
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लोकप्रिय

रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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