मर्दोत्सव और स्त्रीविलाप बीच होलिका का लोकमिथ

सुशील मानव स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन तथा एक्टिविज्म. सम्पर्क: susheel.manav@gmail.com फोन- 6393491351 अवध वह क्षेत्र है जहाँ से राम की कट्टर मर्यादा पुरुषोत्तम छवि के साथ साथ...

जेंडर की अवधारणा और अन्या से अनन्या

भावना मासीवाल भावना मासीवाल महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय में शोध छात्रा हैं संपर्क :bhawnasakura@gmail.com; जब महिलाओं ने अपनी सामाजिक भूमिका को लेकर सोचना-विचारना...

स्त्री यौनिकता से भयभीत हिन्दी आलोचना और ‘उर्वशी’

'उर्वशी' की ख्याति काम को प्रधान विषय बनाने के कारण है लेकिन इसका सबसे कमजोर पक्ष काम को आध्यात्मिक रंगत दे देना है। कवि अगर भौतिक सुख की विशेषकर संभोग और रति सुख को ही अपने काव्य का विषय बनाता है तो रचना श्रेष्ठ नहीं कहलाएगी, कहीं न कहीं रचनाकार की चेतना में यह भाव है।

निर्मला पुतुल की कविताएँ: आदिवासी पीड़ा और प्रतिरोध का काव्य-संसार

रेखा सेठी   हिंदी विभाग, इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय, दिल्ली वि वि, में एसोसिएट प्रोफेसर. विज्ञापन डॉट कॉम सहित आधा दर्जन से अधिक आलोचनात्मक और...

एक विदुषी पतिता की आत्मकथा: दूसरी क़िस्त

कुमारी (श्रीमती) मानदा देवी  अनुवाद और सम्पादन: मुन्नी गुप्ता 1929 में मूल बांग्ला में प्रकाशित किताब “शिक्षिता पतितार आत्मचरित”, का हिन्दी अनुवाद एवं सम्पादन...

आपहुदरी : रमणिका गुप्ता की आत्मकथा -पहली किस्त

रमणिका गुप्ता रमणिका गुप्ता स्त्री इतिहास की एक महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं . वे आदिवासी और स्त्रीवादी मुद्दों के प्रति सक्रिय रही हैं . 'युद्धरत...

समकालीन महिला लेखन को संबोधित संगोष्ठी

पहले सत्र में मुंबई के कलाकारों की एक टीम 'जश्न- ए- कलम' की शश्विता शर्मा ने इस्मत चुग़ताई की प्रसिद्ध कहानी 'छुईमुई' तथा राजेश कुमार ने राजेंद्र यादव की कहानी 'किनारे से किनारे तक' की एकल प्रस्तुति की।

‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ उपन्यास में प्रकृति चित्रण

कस्तूरी चक्रवर्ती  प्रकृति व्यापक अर्थ में, प्राकृतिक, भौतिक या पदार्थिक जगत या ब्रह्माण्ड हैं। प्रकृति का मूल अर्थ ब्रह्माण्ड है। इस ब्रह्माण्ड के एक छोटे...

वर्जिन : जयप्रकाश कर्दम की कहानी (आख़िरी क़िस्त)

सुनीता को यथार्थ का आइना दिखाते हुए वह बोला, ’दुनियाँ के इस बाज़ार में तुम्हारा शरीर तुम्हारा अपना माल है। इससे पहले कि कोई ज़बरदस्ती तुमसे तुम्हारा माल तुमसे लूटे, यह बेहतर है कि तुम इसको किसी उचित ग्राहक को बेच दो। कम से कम इसमें पाशविक हिंसा से बचोगी, और तुम्हारे अंदर लुटने और हारने की पीड़ा नहीं, बल्कि कहीं न कहीं जीतने का अहसास होगा। …….और, एक बार तुम लुटीं तो यह कोई गारंटी नहीं है कि फिर कभी नहीं लुटोगी।

वर्जिन : जयप्रकाश कर्दम की कहानी (पहली क़िस्त)

उन लड़कों की बातों के तेवर से अशोक को यह आभास हो गया था कि आने वाला समय सुनीता के लिए बहुत अच्छा नहीं है। उसके साथ कुछ भी हो सकता है। और यदि वह इसी तरह सुनीता के साथ स्कूल जाता रहा तो वह भी चपेट में आए बिना नहीं रहेगा। कई दिन वह इस बात को लेकर परेशान रहा और सोचता रहा कि वह क्या करे और क्या नहीं करे।
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लोकप्रिय

भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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