विष्णु नागर की कवितायें

 ( विष्णु नागर के लिए  और उनकी कविताओं के लिए आलोचक विजय कुमार से बढिया नहीं कहा जा सकता : आप क्या हैं? कोई पीर...

हिन्दी नवजागरण और स्त्री

अंजली पटेल ,गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत है. Email : anjalipatelbindki@gmail.com नवजागरणएक कालवाची शब्द है, जहाँ इसकी पृष्ठभूमि विभिन्न आन्दोलनों से जुड़ती है तो वहीं स्त्री उत्थान की...

प्रतिभा श्री की कविताएं: वर्णमाला व अन्य

प्रतिभा श्री शिक्षिका, परास्नातक, आजमगढ, सम्पर्क : मोबाईल raseeditikat8179@gmail.com "वर्णमाला "वे सिखाते हैं तुम्हें 'क' से कन्या 'प' से पूजाजबकि,उनकी वर्णमाला में है'क'से कुतिया 'प' से पगलीवे सिखाते...

निर्मला पुतुल की कविताएँ: आदिवासी पीड़ा और प्रतिरोध का काव्य-संसार

रेखा सेठी   हिंदी विभाग, इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय, दिल्ली वि वि, में एसोसिएट प्रोफेसर. विज्ञापन डॉट कॉम सहित आधा दर्जन से अधिक आलोचनात्मक और...

सुधा अरोड़ा की कहानियाँ :स्त्री नारी अस्मिता की संघर्ष-गाथा

पूर्णिमा रानी प्रस्तावना “हे स्त्री ! तू स्वयं को पहचान, तू सिंहस्वरूपा है। तू शत्रु रूपी मृगों का मर्दन करने वाली है। स्वयं में सामर्थ्य उत्पन्न कर। हे...

क्या पुरुष अपने समदुखी ‘मीत’ की व्यथा -कथा समानुभूति से लिखेंगे ?

सुधा अरोड़ा सुधा अरोड़ा सुप्रसिद्ध कथाकार और विचारक हैं. सम्पर्क : 1702 , सॉलिटेअर , डेल्फी के सामने , हीरानंदानी गार्डेन्स ,...

नबनीता देव सेन की कविताएं

7 नवंबर 2019 को कैंसर की वजह से नबनीता देव सेन नहीं रहीं. बंगाल की कवयित्री, गीतकार, व्यंग्य लेखिका राधारानी देबी की बेटी पद्मश्री...

घृणित विचारों और कृत्यों वाले पत्रकार की आत्मप्रशस्ति है यह, आत्मभंजन नहीं मिस्टर जोशी

श्वेता यादव सामाजिक कार्यकर्ता, समसामयिक विषयों पर लिखती हैं. संपर्क :yasweta@gmail.com पिछले दिनों एक किताब हाथ आई, नाम है “मैं बोनसाई अपने समय का” लेखक हैं...

‘मध्यरात्रि के बीच’ और अन्य कविताएं ( कवयित्री इला कुमार)

इला कुमार इला कुमार का पहला कविता संग्रह 'जिद मछली की' है । 'किन्‍हीं रात्रियों में' 'ठहरा हुआ अहसास' और 'कार्तिक का पहला...

सावित्री बाई फुले की कवितायें

( आज 3 जनवरी को भारत की आदि शिक्षिका सावित्री बाई फुले की जयंती है . उन्होंने 1848 में लडकियों के लिए प्रथम स्कूल...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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