अरुण देव की कवितायें

अरुण देव युवा कवि और आलोचक अरुण देव चर्चित वेब पत्रिका समालोचन के सम्पादक हैं. संपर्क :09412656938,devarun72@gmail.com मेरे अंदर की स्त्री तुम्हारे अंदर जो अँधेरा...

हमारे समय के अंधेरे में

स्त्रीकाल डेस्क  जनवादी लेखक संघ और राजेंद्र प्रसाद अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार दिनांक 29 अप्रैल, 2017 को आइटीओ के निकट राजेंद्र प्रसाद भवन,...

इतिहास से अदृश्य स्त्रियाँ

कुसुम त्रिपाठी स्त्रीवादी आलोचक.  एक दर्जन से अधिक किताबेंप्रकाशित हैं , जिनमें ' औरत इतिहास रचा है तुमने','  स्त्री संघर्ष  के सौवर्ष ' आदि चर्चित...

जैनेन्द्र की कहानियों में स्त्री-प्रश्न

डॉ.दीनानाथ मौर्य जूनियर प्रोजेक्ट फेलो (भाषा शिक्षा विभाग) एन0सी0आर0टी0, नई दिल्ली . संपर्क: dnathjnu@gmail.com मोबाइल : 9999108490 एक बड़े रचनाकार हैं जैनेन्द्र .अपने समय के भी और...

शालिनी मोहन की कवितायेँ : ‘परिभाषित’ व अन्य

शालिनी मोहन विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित। 'अहसास की दहलीज़ पर' साझा काव्य संग्रह प्रकाशित . सम्पर्क:  shalini.mohan9@gmail.com 1. परिभाषित विधवा शब्द का अर्थ क्या है माँग में सिंदूर और...

‘निजी’ आधार पर डा. आंबेडकर की ‘राजनीतिक छवि’ का स्त्रीवादी (?) नकार : दूसरी...

शर्मिला रेगे की किताब  'अगेंस्ट द मैडनेस ऑफ़ मनु : बी आर आम्बेडकर्स राइटिंग ऑन ब्रैहम्निकल  पैट्रीआर्की'की भूमिका का अनुवाद हम धारावाहिक प्रकाशित कर...

“केदारनाथ सिंह की कविताओं में स्त्री”

यह सर्वविदित है कि गया वक्त पुनः लौटकर नहीं आता . फिर भी कवि का यह प्रयास है कि उस उधड़े हुए समय को फिर से सिलने का प्रयत्न किया जाए ! यहाँ हमें कवि के आशावादी होने का परिचय मिलता है . जीवंतता का परिचय मिलता है . सुई और तागे की बात करते हुए करघे की बात करना, इस बात का संकेत है कि केदारनाथ जी कहीं-न-कहीं महात्मा गांधी के लघु-कुटीर उद्योग से प्रभावित थे और हथकरघा पद्धति में भी विश्वास करते थे .

ताकि बोलें वे भी, जो हैं सदियों से चुप

अनिल अनलहातु  विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में हिन्दी एवं अंग्रेजी की कविताएं प्रकाशित. “प्रतिलिपि” कविता सम्मान’2015. संपर्क :analhatukavita@gmail.com, 08986878504 (आज मनु स्मृति दहन  दिवस  के  दिन , भारतीय ...

जिद्दी लतर-सी इरोम: अनीता मिंज की कविता

अनीता मिंज असिस्टेंट प्रोफेसर, दौलतराम महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, संपर्क :anitaminz74@gmail.com . वह धरती की बेटी है धरती की गोदी में रहती है जमीन और जंगल को...

पीड़ाजन्य अनुभव और डा आंबेडकर का स्त्रीवाद

डा. भीम राम आंबेडकर के स्त्रीवादी सरोकारों की ओर, क़िस्त तीन शर्मिला रेगे की किताब  'अगेंस्ट द मैडनेस ऑफ़ मनु : बी आर आम्बेडकर्स राइटिंग...
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