क्यों चुनी गई अनिता भारती की किताब ‘समकालीन नारीवाद : दलित स्त्री का प्रतिरोध”...

निर्णायक मंडल की ओर से अर्चना वर्मा  निर्णायक मंडल ( 2016)  के सदस्य :  अर्चना वर्मा, सुधा अरोड़ा, अरविंद जैन, सुजाता पारमिता, हेमलता माहिश्वर, परिमला...

कविता की प्रकृति ही है समय से आगे चलना

इन प्रमुख प्रगतिशील कवियों के पीछे प्रगतिशील लेखक संघ काम कर रहा था और साहित्‍य में प्रमुख रूप से जनवादी चेतना और फासिज़्म के विरोध के पीछे भी प्रगतिशील लेखक संघ काम कर रहा था। राजसत्‍ता, राजतंत्र के ख़िलाफ़ जनवादी आवाज़ का उठना ही तत्‍कालीन स्थिति के आधार पर बड़ी बात थी। 1942 की अगस्‍त क्रांति, भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का रूस समेत मिश्र राष्‍ट्रों का और एक तरह से ब्रिटिश सरकार का ही पक्ष समर्थन करना, इसी बीच बंगाल में भयंकर अकाल पड़ा, इस तरह देखा जाए तो 1939 से 1946 तक का दौर अनेक प्रकार के जटिल राजनीतिक और सामाजिक प्रश्‍नों का दौर बन गया।

वेश्यावृत्ति का समुदायिकरण और उसका परंपरा बनना

राहुल  सेक्स वर्क (sex work) विशेषकर वेश्यावृत्ति (prostitution) समाज के यौनिक संगठन में ‘यौनिक आनंद’ की एक विशेषीकृत संस्था के बतौर मौजूद रहा है। वेश्यावृत्ति...

शिवमूर्ति की कहानियाँ :स्त्री प्रश्न

रेणु चौधरी जे.एन.यु.में शोधरत है renu.jnu14@gmail.com शिवमूर्ति हमारे समय के महत्वपूर्ण कथाकार हैं ये महानगर जीवन के नहीं ग्रामीण जीवन के कथाकार हैं. उनकी कहानियों में...

कोई अपना और अन्य कविताएँ

प्रिया कोई अपना सुबह के पाँच बजे होंगे शायद एक हाथ उठा और शरीर पर रेंगने लगा पहले छातियों और पेट से होता हुआ नीचे तक पहुंचा... अचानक नींद से जागी स्वप्न...

आरती कुमारी की कविताएं

आरती कुमारी युवा कवयित्री, 'कैसे कह दूँ' एक काव्य संग्रह, संपर्क: sartikumari707@gmail.com 1.  स्वयं से संवाद कितना सुखद होता है अपने होने को महसूस करना और प्यार करना...

खूबसूरत हर्फों की गवाही

निवेदिता निवेदिता पेशे से पत्रकार हैं. सामाजिक सांस्कृतिक आंदोलनों में भी सक्रिय रहती हैं. हाल के दिनों में वाणी प्रकाशन से एक कविता संग्रह...

निराला की कविता में स्त्री मुक्ति का स्वर

नीरज कुमार निराला का ब्याह तेरह (13) बरस की उम्र के आस-पास हो गया था। तकरीबन सोलह (16) बरस की उम्र में उनका गौना हुआ।...

सॉफ्ट पोर्न नहीं: ये मध्यवर्गीय स्त्री की कामनाओं के नोट्स हैं

एक आंकडे के अनुसार भारत में 67 प्रतिशत लोगों के पास आज भी गैस कनेक्शन नहीं है, वे लकड़ी, कोयला या अन्य इंधन माध्यमों...

आपहुदरी : रमणिका गुप्ता की आत्मकथा : चौथी क़िस्त

रमणिका गुप्ता रमणिका गुप्ता स्त्री इतिहास की एक महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं . वे आदिवासी और स्त्रीवादी मुद्दों के प्रति सक्रिय रही हैं . 'युद्धरत...
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लोकप्रिय

रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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