कर्मानंद आर्य की कवितायें : वसंत सेना और अन्य

कर्मानन्द आर्य कर्मानन्द आर्य मह्त्वपूर्ण युवा कवि हैं. बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय में हिन्दी पढाते हैं. संपर्क : 8092330929 ( कर्मानंद आर्य की इन कविताओं में...

जयभीम वाला दूल्हा चाहिए

शर्मिला रेगे की किताब  'अगेंस्ट द मैडनेस ऑफ़ मनु : बी आर आम्बेडकर्स राइटिंग ऑन ब्रैहम्निकल  पैट्रीआर्की'की भूमिका का अनुवाद हम धारावाहिक प्रकाशित कर...

हिंदी उपन्यास और थर्ड जेंडर

भावना मासीवाल भावना मासीवाल महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय में शोध छात्रा हैं.   संपर्क :bhawnasakura@gmail.com; हमारा पूरा समाज दो स्तम्भों पर खड़ा है...

डोंट यू नो, हंसना इज़ एन इन्वीटेशन टू रेप?

रोहिणी अग्रवाल रोहिणी अग्रवाल स्त्रीवादी आलोचक हैं , महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं . ई मेल- rohini1959@gmail.com देह के द्वार पर अनादृत...

कमल कुमार की कविताएं

कमल कुमार कहानी, उपन्यास, कविता, आलोचना, स्त्री-विमर्शआदि पर 35 पुस्तकें प्रकाशित . सम्पर्क : kamalxyz@hotmail.com जीवन से भिड़ंत की कविता मैं मुक्तिबोध नहीं, न ही...

स्त्री रचनाधर्मिता और आंदोलन का आयोजन

‘दलित लेखक संघ’ के तत्वावधान में  एक दिवसीय काव्य गोष्ठी ( महिला रचनाकारों की )  व  ‘संवैधानिक और समाजिक परिवेश में स्त्री विमर्श ’...

स्त्री-कविता: स्त्री पक्ष और उसके पार

रेखा सेठी   हिंदी विभाग, इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय, दिल्ली वि वि, में एसोसिएट प्रोफेसर. विज्ञापन डॉट कॉम सहित आधा दर्जन से अधिक आलोचनात्मक और...

इला कुमार की कवितायें

इला कुमार इला कुमार का पहला कविता संग्रह 'जिद मछली की' है । 'किन्‍हीं रात्रियों में' 'ठहरा हुआ अहसास' और 'कार्तिक का पहला...

आज चुनाव है

अनिता भारती अनिता भारती साहित्य की विविध विधाओं में जितना लिखती हैं , उतना ही या उससे अधिक सामाजिक मोर्चों पर डंटी रहती हैं...

सुल्ताना का सपना

रुकैया सखावत हुसैन  अंग्रेजी से अनुवाद : संज्ञा उपाध्याय ( पिछले 9 दिसंबर को हमने रुकैया सखावत हुसैन की रचना ' अबरोध बासिनी' का अनुवाद प्रकाशित...
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लोकप्रिय

रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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