कलाकार के सौ गुनाह माफ हैं ।

सुधा अरोडा सुधा अरोडा सुप्रसिद्ध कथाकार और विचारक हैं. सम्पर्क : 1702 , सॉलिटेअर , डेल्फी के सामने , हीरानंदानी गार्डेन्स , पवई ,...

संजय इंगले तिगांवकर की कवितायें

संजय इंगले संजय इंगले तिगांवकर मराठी के रचनाकार है और अंधश्रद्धा निर्मूलन के सक्रिय कार्यकर्ता हैं. संपर्क : मोबाईल : 09765047672 (...

हाँ, मैं एक स्त्री हूँ

सुशील शर्मा  हाँ, मैं एक स्त्री हूँ हाँ मैं एक स्त्री हूँ हाँ मैं एक स्त्री हूँ ,एक देह हूँ क्या तुमने देखा है मुझे देह से अलग? पिता...

दूजी मीरा : आख़िरी क़िस्त

संदीप मील संदीप मील मह्त्वपूर्ण युवा कथाकार हैं . फिलहाल राजनीति शास्त्र में शोधरत हैं . संपर्क :09636036561 (राजस्थानी परिवेश में लिखी गई संदीप मिल...

पितृसत्तात्मक हादसों से मुठभेड़ करती लेखिका की आत्मकथा: ‘हादसे’

स्त्री को सदा से पुरुष की अनुगामिनी बनकर जीवन जीने की शिक्षा दी जाती है। स्त्री  का लक्षमण रेखा लाँघना समाज के तथाकथित पहरेदारों...

प्रेम का मर्सिया

मंजरी श्रीवास्तव युवा कवयित्री मंजरी श्रीवास्तव की एक लम्बी कविता 'एक बार फिर नाचो न इजाडोरा' बहुचर्चित रही है संपर्क : ई मेल-manj.sriv@gmail.com एक अज्ञेय...

ऑब्जेक्ट से सब्जेक्ट बनने की जद्दोजहद

सुधा उपाध्याय जानकीदेवी मेमोरियल कॉलेज,दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाती हैं संपर्क:ईमेल:sudhaupadhyaya@gmail.com हमने जो तर्ज़े-फुगाँ की थी कफ़स में ईजाद फैज़ गुलशन में वही तर्ज़े-बयाँ ठहरी है….(फैज़अहमदफैज़) क्या...

कल्याणी ठाकुर चरल: बंगाल का दलित स्वर

बंगला दलित साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर कल्याणी ठाकुर चरल  के  जीवन  और  दलित  स्त्री  की  अस्मिता  को  मजबूती  से  स्थापित  करने  में  उनकी  भूमिका...

शूद्रा: एक समाज शास्त्रीय अध्ययन (धर्मशास्त्रीय दृष्टिकोण से)

डा .कौशल पंवार   युवा रचनाकार, सामाजिक कार्यकर्ता ,  मोती लाल नेहरू कॉलेज , दिल्ली विश्वविद्यालय, में संस्कृत  की  असिस्टेंट प्रोफ़ेसर संपर्क : 9999439709 सांस्कृतिक अतीत...

सांस्कृतिक पिछड़ापन और हाशिये से उभरती कविता

रविता कुमारी हिंदी विभाग, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार, उत्तराखण्ड ईमेल: ravita_kumari@yahoo.in भारत सम्मान का वह शब्द है जिसके आगे विश्व नतमस्तक होता है। इसकी कला, संस्कृति, दर्शन,...
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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।