प्रेम के भीतर देह ने केंद्रीय विमर्श खड़ा किया है: अनामिका

रानी कुमारी  “स्त्री क्या है? क्या स्त्री, पुरुष का अन्य है/ अदर है। जो पुरुष को पूरा करते हुए निस्तेज हो जाती है। क्या स्त्री...

रूद्र मोहम्मद शहिदुल्लाह की कविताएँ

 सुलोचना वर्मा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित. छायाचित्रण और चित्रकारी में रुचि. सम्पर्क:  verma.sulochana@gmail.com प्रेम और क्रांति के कवि रूद्र मोहम्मद शहिदुल्लाह की कविताओं का अनुवाद सुलोचना...

तुम्हारा माँ होना

अंकिता रासुरी म.गां.अं.हिं.वि. में शोधरत हैं. संपर्क: ankitarasuri@gmail.com स्टीरियो टाइप से अलग माँ, फिर भी उतनी ही माँ.  जब मदर्स डे पर  सोशल मीडिया में स्नेहिल,...

क्या पुरुष अपने समदुखी ‘मीत’ की व्यथा -कथा समानुभूति से लिखेंगे ?

सुधा अरोड़ा सुधा अरोड़ा सुप्रसिद्ध कथाकार और विचारक हैं. सम्पर्क : 1702 , सॉलिटेअर , डेल्फी के सामने , हीरानंदानी गार्डेन्स ,...

औरत ’चुप‘ रहे, तभी ’महान‘ है

सुधा अरोड़ा  आज स्त्रीकाल के पाठकों के लिए सुधा अरोड़ा की एक छोटी सी टिप्पणी जो १९९७ में जनसत्ता में छपी थी . यह टिप्पणी...

‘आपहुदरी’: ‘अपने शर्तों पर जीने की आत्मकथा’

कुमारी ज्योति गुप्ता कुमारी ज्योति गुप्ता भारत रत्न डा.अम्बेडकर विश्वविद्यालय ,दिल्ली में हिन्दी विभाग में शोधरत हैं सम्पर्क: jyotigupta1999@rediffmail.com ‘आपहुदरी’ रमणिका गुप्ता की आत्मकथा की...

भारतीय उपमहाद्वीप का स्त्री लेखन: स्त्री सशक्तीकरण की अनुगूंजें(दूसरी किस्त)

रोहिणी अग्रवाल रोहिणी अग्रवाल स्त्रीवादी आलोचक हैं , महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं . ई मेल- rohini1959@gmail.com धर्म और कानून: समदरसी है...

“रूह कंपाने वाली यात्रा–डायरी”

चैताली सिन्हा  शोधार्थी - जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, भारतीय भाषा केंद्र (हिंदी विभाग) . सम्पर्क:  .chaitalisinha4u@gmail.com ‘बनमाली गो तुमि पर जनमे होइयो राधा’ बांगला में गाया जानेवाला यह बाउल...

मारे गये बच्चों की याद में हेम्ंत जोशी , राजेश जोशी और उदय प्रकाश...

( तालिबानी चरमपंथियों के द्वारा मारे गये बच्चों को आओ श्रद्धांजलि दें ! हम एक ऐसे तनाव की दुनिया रच रहे हैं , जहां...

रीतिकाल में स्त्रीं-यौनिकता का सवाल उर्फ देह अपनी बाकी उनका

नीलिमा चौहान पेशे से प्राध्यापक नीलिमा 'आँख की किरकिरी ब्लॉग का संचालन करती हैं. संपादित पुस्तक 'बेदाद ए इश्क' प्रकाशित संपर्क : neelimasayshi@gmail.com. भारतीय संदर्भों...
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लोकप्रिय

रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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