उनकी प्रतिबद्धता हाशिये के लोगों के साथ ताउम्र रही

संजीव चंदन वे एक अभिनव समुच्चय थीं- सामाजिक समता के प्रति समर्पित एक योद्धा, आदिवासियों के अधिकारों की प्रवक्ता, स्त्री-पुरुष समता के...

वह आत्मीय और दृष्टिसंपन्न संपादक हमें अलविदा कह गयी

अनिता भारती जानी मानी लेखिका, दलित आदिवासी और स्त्री लेखन की सशक्त पैरोकार रमणिका गुप्ता जी छब्बीस मार्च...

एक विदुषी पतिता की आत्मकथा

इस मायने में दोनों ग्राहक हैं औरत और मर्द जो उत्तेजनाओं को बैलेंस करने के लिए एडजेस्टिव बिहैवियर की तलाश में अगर जा सकें तो सेंसेसरी डिसऑर्डर होने से बचा जा सकता है. बेस्ट सोशल ऑर्डर और बेहतर उत्पादन हो सकता है. अन्तःग्राहक इनके भीतरी इलाके में सें सोरी चैनल और सेन्सस ओर्गंस को बेहतर तरीके से मुकम्मिल रिजल्ट्स दे सकते हैं. सेंसेसंस के इन घटकों में औरतें और मर्द दोनों में ही क्वालिटी, इन्टेनसिटी और विविदनेस के कारण मेंटल इम्प्रेसंस का क्वांटीटेटीव इफेक्ट समझा जा सकता है.

समकालीन महिला लेखन को संबोधित संगोष्ठी

पहले सत्र में मुंबई के कलाकारों की एक टीम 'जश्न- ए- कलम' की शश्विता शर्मा ने इस्मत चुग़ताई की प्रसिद्ध कहानी 'छुईमुई' तथा राजेश कुमार ने राजेंद्र यादव की कहानी 'किनारे से किनारे तक' की एकल प्रस्तुति की।

नाक की फुरूहुरी: सोनी पांडेय कहानी

सोनी  पांडेय सोनी पांडेय लगातार लोक जीवन और ग्रामीण स्त्री-जीवन की प्रभावशाली कहानियाँ लिख रही हैं. ऐसे समय में जब महिला लेखन में यह परिवेश लगभग...

‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ उपन्यास में प्रकृति चित्रण

कस्तूरी चक्रवर्ती  प्रकृति व्यापक अर्थ में, प्राकृतिक, भौतिक या पदार्थिक जगत या ब्रह्माण्ड हैं। प्रकृति का मूल अर्थ ब्रह्माण्ड है। इस ब्रह्माण्ड के एक छोटे...

पिंजरे की तीलियों से बाहर आती मैना की कुहुक

स्मरण चंद्रकिरण सौनरेक्सा की 98 वीं जयंती पर...  सुधा अरोड़ा   ''मैं देश के निम्नमध्यवर्गीय समाज की उपज हूं। मैंने देश के बहुसंख्यक समाज को विपरीत परिस्थितियों से...

राष्ट्रवाद, विश्वविद्यालय और टैंक: संदीप मील की कहानी

संदीप मील ''हमारी बात की खिलाफ़त करने वालों का मुँह बंद कर दो।'' ''जनरल, सारी ताक़त इसी पर लगा रखी है। जल्द ही हो जाएगा।'' ''तुम समझ...

बेड़ियाँ: अरविंद जैन की कहानी

अरविंद जैन अस्पताल के वार्ड नंबर 13 में घुसते ही अम्माँ दिखाई दे गई। बिस्तर पर बैठी अखबार के पन्ने फाड़-फाड़ कर, किश्तियाँ और हवाई...
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भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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