वह आत्मीय और दृष्टिसंपन्न संपादक हमें अलविदा कह गयी

अनिता भारती जानी मानी लेखिका, दलित आदिवासी और स्त्री लेखन की सशक्त पैरोकार रमणिका गुप्ता जी छब्बीस मार्च...

छायावादी कविता में पितृसत्तात्मक अभिव्यक्ति

मनीष कुमार  भक्तिकाव्य के बाद छायावादी काव्य अपनी युगीन संवेदनशीलता में अद्वितीय है| दो विश्व-युद्धों के बीच के इस युग की यह अद्वितीयता महज़ कैशोर्य...

पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण और जैनेन्द्र (विशेष सन्दर्भ-‘पत्नी’ कहानी)

आदित्य कुमार गिरि शोधार्थी,कलकत्ता विश्वविद्यालय,. सम्पर्क : adityakumargiri@gmail.com - “आज का साहित्य विमर्श स्त्री विमर्श के बिना पूरा नहीं होता,लेकिन ज्यादातर इसका रूप फैशन...

हिंदी साहित्य में आदिवासी महिलाओं का योगदान

 गंगा सहाय मीणा हिंदी साहित्य में आदिवासी महिलाओं के योगदान का मूल्यांकन किया जाना दिलचस्प है क्योंकि आदिवासी लेखन में स्त्री का स्वर प्राथमिक स्वर...

आपहुदरी : रमणिका गुप्ता की आत्मकथा : चौथी क़िस्त

रमणिका गुप्ता रमणिका गुप्ता स्त्री इतिहास की एक महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं . वे आदिवासी और स्त्रीवादी मुद्दों के प्रति सक्रिय रही हैं . 'युद्धरत...

लोहिया का स्त्री विमर्श

मेधा आलोचक , सत्यवती महाविद्यालय ,दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाती है . संपर्क :medhaonline@gmail.com राम मनोहर लोहिया की ख्याति एक राजनेता के साथ-साथ एक मौलिक...

बेड़ियाँ: अरविंद जैन की कहानी

अरविंद जैन अस्पताल के वार्ड नंबर 13 में घुसते ही अम्माँ दिखाई दे गई। बिस्तर पर बैठी अखबार के पन्ने फाड़-फाड़ कर, किश्तियाँ और हवाई...

स्त्री विमर्श और ‘कठगुलाब’

सतीश कुमार  सहायक प्रोफेसर (गेस्ट फैकल्टी) हिंदी विभाग चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय भिवानी (हरियाणा) संपर्क : 9813293269 स्त्री-विमर्श रूढ़िवादी मान्यताओं, परंपराओं के प्रति अंसतोष, आक्रोश व...

आपहुदरी : रमणिका गुप्ता की आत्मकथा : आख़िरी किस्त

रमणिका गुप्ता रमणिका गुप्ता स्त्री इतिहास की एक महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं . वे आदिवासी और स्त्रीवादी मुद्दों के प्रति सक्रिय रही हैं . 'युद्धरत...

पिंजरे की तीलियों से बाहर आती मैना की कुहुक

स्मरण चंद्रकिरण सौनरेक्सा की 98 वीं जयंती पर...  सुधा अरोड़ा   ''मैं देश के निम्नमध्यवर्गीय समाज की उपज हूं। मैंने देश के बहुसंख्यक समाज को विपरीत परिस्थितियों से...
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लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।