पत्रों में झांकता बच्चन का व्यक्तित्व

रविता कुमारी हिंदी विभाग, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार, उत्तराखण्ड ईमेल: ravita_kumari@yahoo.in व्यक्ति का अन्तर्बाह्य समायोजन ही व्यक्तित्व की परिभाषा है। जो प्रत्येक व्यक्ति को उसके विशेष गुणों,...

नाम जोती था मगर वे ज्वालामुखी थे

महात्मा जोतीबा  फुले की जयंती  (11 अप्रैल ) पर विशेष....  मनीषा बांगर और डा. जयंत चंद्रपाल  इनका जीवनक्रम ज्योति था बिलकुल ज्योति की तरह अन्धकार को...

पलाश दहकने का मौसम

वन्दना गुप्ता   कवयित्री, कहानीकार. एक कहानी संग्रह और एक काव्य संग्रह प्रकाशित. एक उपन्यास 'अंधेरे का मध्य बिंदु' प्रकाशित. संपर्क :rosered8flower@gmail.com उपन्यास ' अँधेरे का...

शिनाख्त के दायरे

रोहिणी अग्रवाल रोहिणी अग्रवाल स्त्रीवादी आलोचक हैं , महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं . ई मेल- rohini1959@gmail.com आधुनिक गद्य साहित्य की शुरुआत...

धूमिल और स्त्री : अर्थात् वक़्त की चैकी पर बैठा अधेड़ मुंशी: पहली क़िस्त

शंभु गुप्त  हिन्दी विश्वविद्यालय  में स्त्री अध्ययन  विभाग में  प्रोफ़ेसर.  सम्पर्क : ई  मेल- shambhugupt@gmail.com, मोबाइल:  8600552663 काव्य-सृजन की प्रक्रिया में लिंग-भेद की भूमिका कविता...

गांव की पाठशाला जिसने सबको बांध दिया:जूलिया वेबर गार्डन की डायरी

शिरीष खरे 'नन्हे बच्चे जिज्ञासु, खोजी इंसान होते हैं। वे अपनी समस्त इंद्रियों की मदद से दुनिया की अनूठी चीजें तलाशते हैं। वे समग्रता में...

प्रेम का मर्सिया

मंजरी श्रीवास्तव युवा कवयित्री मंजरी श्रीवास्तव की एक लम्बी कविता 'एक बार फिर नाचो न इजाडोरा' बहुचर्चित रही है संपर्क : ई मेल-manj.sriv@gmail.com एक अज्ञेय...

अकथनीय का कथन – एक औरत की नोटबुक

शालिनी माथुर  आलोचक. स्त्रीवादी आलोचना में सशक्त हस्तक्षेप. जो लेखिका पिछले पैंतालिस वर्षाे से निरन्तर लिख रही हो, जिसका लेखन स्तर अपनी स्तरीयता से कभी डिगा न...

पूरन सिंह की कवितायें

डा. पूरन सिंह चर्चित साहित्यकार पूरन सिंह कृषि भवन में सहायक निदेशक हैं. संपर्क : drpuransingh64@gmail.com> आई लव यू वह मुझे बहुत प्यार करता गलियों/सड़कों/चैराहों पर चीखता-चिल्लाता आई लव यू,...

स्त्री की चेतना और संसार का कहानी संग्रह है शरद सिंह की किताब ...

डॉ.जीतेंद्र प्रताप  कथाकार डॉ. शरद सिंह का कथा संग्रह तीली तीली आग मुझे जिन प्रमुख कारणों से आकर्षित और प्रभावित करता है,उन कारणों की संख्या...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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