समकालीन महिला लेखन को संबोधित संगोष्ठी

पहले सत्र में मुंबई के कलाकारों की एक टीम 'जश्न- ए- कलम' की शश्विता शर्मा ने इस्मत चुग़ताई की प्रसिद्ध कहानी 'छुईमुई' तथा राजेश कुमार ने राजेंद्र यादव की कहानी 'किनारे से किनारे तक' की एकल प्रस्तुति की।

नाक की फुरूहुरी: सोनी पांडेय कहानी

सोनी  पांडेय सोनी पांडेय लगातार लोक जीवन और ग्रामीण स्त्री-जीवन की प्रभावशाली कहानियाँ लिख रही हैं. ऐसे समय में जब महिला लेखन में यह परिवेश लगभग...

‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ उपन्यास में प्रकृति चित्रण

कस्तूरी चक्रवर्ती  प्रकृति व्यापक अर्थ में, प्राकृतिक, भौतिक या पदार्थिक जगत या ब्रह्माण्ड हैं। प्रकृति का मूल अर्थ ब्रह्माण्ड है। इस ब्रह्माण्ड के एक छोटे...

पिंजरे की तीलियों से बाहर आती मैना की कुहुक

स्मरण चंद्रकिरण सौनरेक्सा की 98 वीं जयंती पर...  सुधा अरोड़ा   ''मैं देश के निम्नमध्यवर्गीय समाज की उपज हूं। मैंने देश के बहुसंख्यक समाज को विपरीत परिस्थितियों से...

राष्ट्रवाद, विश्वविद्यालय और टैंक: संदीप मील की कहानी

संदीप मील ''हमारी बात की खिलाफ़त करने वालों का मुँह बंद कर दो।'' ''जनरल, सारी ताक़त इसी पर लगा रखी है। जल्द ही हो जाएगा।'' ''तुम समझ...

बेड़ियाँ: अरविंद जैन की कहानी

अरविंद जैन अस्पताल के वार्ड नंबर 13 में घुसते ही अम्माँ दिखाई दे गई। बिस्तर पर बैठी अखबार के पन्ने फाड़-फाड़ कर, किश्तियाँ और हवाई...

क्रूर और हिंसक यथार्थ में प्रेम और करुणा को बचाये रखने की कोशिश...

मीना बुद्धिराजाकविता अपनी संरचना और प्रकृति में तमाम भेद-भावों से परे और लिंग,वर्ण,समुदाय, जाति- वर्ग की अवधारणाओं से मुक्त और आज़ाद रहती है ।...

भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से करना भिखारी ठाकुर का अपमान है

आँचल  अंग्रेजी साहित्य की शोधार्थी आंचल भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से किये जाने को भिखारी ठाकुर का  अपमान बता रही हैं. इस टिप्पणी के अनुसार...

मुन्नी गुप्ता की कविताएं ( प्रेतछाया और रोटी का सवाल व अन्य)

मुन्नी गुप्ता असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, हिन्दी विभाग, प्रेसिडेंसी कॉलेज, कोलकाता, संपर्क:munnigupta1979@gmail.com कैनवास रंग और जीवन समन्दर ने चिड़िया की हथेली में तूलिका थमा दी. और, गहरे विश्वास से कहा, रचो, अपने भीतर के आकाश...

तीस घटा पाँच बराबर आज़ाद और मुकद्दस औरत (पतनशील पत्नियों के नोट्स से)

नीलिमा चौहान पेशे से प्राध्यापक नीलिमा समाकालीन बहुचर्चित लेखिकाओं में से एक हैं. प्रकाशित पुस्तकें: पतनशील पत्नियों के नोट्स, 'बेदाद ए इश्क' (संपादित) संपर्क :...
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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।