समकालीन हिंदी आलोचना का स्त्री स्वर

कर्मानन्द आर्य कर्मानन्द आर्य मह्त्वपूर्ण युवा कवि हैं. बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय में हिन्दी पढाते हैं. संपर्क : 8092330929 इक्कीसवीं सदी संक्रमण के दौर से गुजर...

केजरीवाल सर, हिन्दी अकादमी में आपकी उपाध्यक्ष साहित्यिक झूठ खड़ा कर रही हैं?...

स्त्रीकाल डेस्क  प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका समालोचन में मैत्रेयी पुष्पा की किताब ‘वह सफ़र था कि मुकाम था’ का एक अंश छपा. यह अंश हंस के...

अंजना टंडन की कविताएँ

अंजना टंडन विजिटिंग प्रोफेसर, राजस्थान विश्वविद्यालय. आई क्रिएट नामक संस्थान में मास्टर ट्रेनर. छः काव्य संग्रह प्रकाशित. सम्पर्क :anjanatandon87@gmail.com मो.09314881179 1 प्रेम  जो मुझ से लिखा गया वो सहज नैसर्गिक...

तीस घटा पाँच बराबर आज़ाद और मुकद्दस औरत (पतनशील पत्नियों के नोट्स से)

नीलिमा चौहान पेशे से प्राध्यापक नीलिमा समाकालीन बहुचर्चित लेखिकाओं में से एक हैं. प्रकाशित पुस्तकें: पतनशील पत्नियों के नोट्स, 'बेदाद ए इश्क' (संपादित) संपर्क :...
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लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।