“केदारनाथ सिंह की कविताओं में स्त्री”

यह सर्वविदित है कि गया वक्त पुनः लौटकर नहीं आता . फिर भी कवि का यह प्रयास है कि उस उधड़े हुए समय को फिर से सिलने का प्रयत्न किया जाए ! यहाँ हमें कवि के आशावादी होने का परिचय मिलता है . जीवंतता का परिचय मिलता है . सुई और तागे की बात करते हुए करघे की बात करना, इस बात का संकेत है कि केदारनाथ जी कहीं-न-कहीं महात्मा गांधी के लघु-कुटीर उद्योग से प्रभावित थे और हथकरघा पद्धति में भी विश्वास करते थे .

बिहार बंद तस्वीरों में: राकेश रंजन की कविता के साथ

स्त्रीकाल डेस्क  जनाक्रोश रंग ला रहा है. बिहार सरकार जनता की नजरों में कटघरे में है तो सुप्रीमकोर्ट इस मामले में स्वतः-संज्ञान लेते हुए केंद्र...

आरती कुमारी की कविताएं

आरती कुमारी युवा कवयित्री, 'कैसे कह दूँ' एक काव्य संग्रह, संपर्क: sartikumari707@gmail.com 1.  स्वयं से संवाद कितना सुखद होता है अपने होने को महसूस करना और प्यार करना...

जीवन और मृत्यु के बीच अस्तित्व की तलाश

रामजी यादव ( रामजी यादव यहां सुधा अरोडा की कहानियों से गुजरते हुए स्त्री की पीडा , उसके संघर्ष , पितृसत्ता का स्त्री के ऊपर...

70 साल गौरव के, लोकतंत्र और समतामूलक सपनों के

स्त्रीकाल (प्रिंट )के अक्टूबर-दिसंबर अंक का संपादकीय  संजीव चंदन आजादी के 70 साल में कुछ नहीं हुआ. यह हालिया समय का सबसे बड़ा और बार-बार दुहराया...

पवन करण की कवितायें (तुम जैसी चाहते हो वैसी नही हूं मैं और अन्य)

पवन करण पवन करण हिन्दी के महत्वपूर्ण कवि हैं, स्त्री मेरे भीतर, स्त्री शतक आदि काव्य संग्रह प्रकाशित. सम्पर्क: pawankaran64@rediffmail.com पढ़ें पवन करण की कवितायें. पुरुष...

स्त्रियों की अस्मिता और अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न

डॉ. परवीन कुमारी 'रमा' रचनाकार .समीक्षक . संपर्क: parvilordshiva7@gmail.com, ‘What a piece of work is a man? How noble in reason? How infinite in faculty?...

द ब्यूटी ऑफ़ नाईट इज नॉट फॉर अस (प्रियंका कुमारी नारायण की कहानी

प्रियंका कुमारी (नारायण) शोधार्थी, काशी हिन्दू विद्यापीठ, बनारस संपर्क: kumaripriyankabhu@gmail.com अरे यार !बंटा पीने का दिल कर रहा है ...चल न पीकर आते हैं |कितने दिन हो...

इकाई नही मैं करोड़ो पदचाप हूँ मैं: रजनी तिलक की काव्य-चेतना

अनिता भारती  रजनी तिलक  होतीं तो आगामी 27 मई को 60वां सालगिरह मना रही होतीं. पिछले 30 मार्च 2018 को उनका परिनिर्वाण हो गया. प्रथमतः सामाजिक...

किरायेदार

अनुपमा तिवाड़ी कविता संग्रह “आइना भीगता है“ 2011 में बोधि प्रकाशन, जयपुर से प्रकाशित. संपर्क : anupamatiwari91@gmail.com मकान नंबर ए – 41 मीता और उमेश ने...
245FollowersFollow
644SubscribersSubscribe

लोकप्रिय

रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
Loading...