मैं अमर बेल को गाली नहीं देता और अन्य कविताएं (कवि:एस एस पंवार)

कितनी ही बार वो मर्लिन मुनरो होते-होते बची और उसने अपनी दीवार पर नए कैलेंडर टांगे, एक अस्तित्वहीन मुल्क का समाजशास्त्र उसे काटता रहा बार-बार

वह हमेशा रहस्यमयी आख्यायित की गयी

प्रज्ञा पांडे कवयित्री , कथाकार प्रज्ञा पांडे निकट पत्रिका की कार्यकारी सम्पादक हैं और वर्तमान अंक की अतिथि संपादक. संपर्क : ई-मेल :...

हव्वा की बेटी : उपन्यास अंश, भाग 2

जयश्री रॉय जयश्री रॉय कथा साहित्य में एक मह्त्वपूर्ण नाम हैं. चार  कहानी संग्रह , तीन उपन्यास और एक कविता संग्रह प्रकाशित हैं ....

एक कविता पाब्लो नेरुदा के लिए

मंजरी श्रीवास्तव युवा कवयित्री मंजरी श्रीवास्तव की एक लम्बी कविता 'एक बार फिर नाचो न इजाडोरा' बहुचर्चित रही है संपर्क : ई मेल-manj.sriv@gmail.com 12 जुलाई...

महिलाएँ-जाति, वर्ग या एक उत्पीड़ित लिंग

  इविलीन  रीड /अनुवाद-प्रोमिला प्रोमिला , असिस्टैंट प्रोफ़ेसर , हिन्दी विभाग ,अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, हैदराबाद के द्वारा अनूदित इविलीन रीड का आलेख '...

अखिलेश्वर पांडेय की कविताएं

अखिलेश्वर पांडेय 'पानी उदास है' कविता संग्रह प्रकाशित.एनएफआई का फेलोशिप और नेशनल मीडिया अवार्ड., प्रभात खबर में कार्यरत. संपर्क:apandey833@gmail.com मोबाइल : 8102397081 पतरा परदेस जाने से पहले गांव में...

दूजी मीरा : आख़िरी क़िस्त

संदीप मील संदीप मील मह्त्वपूर्ण युवा कथाकार हैं . फिलहाल राजनीति शास्त्र में शोधरत हैं . संपर्क :09636036561 (राजस्थानी परिवेश में लिखी गई संदीप मिल...
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लोकप्रिय

रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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