दलितस्त्रीवाद

इकाई नही मैं करोड़ो पदचाप हूँ मैं: रजनी तिलक की काव्य-चेतना

अनिता भारती  रजनी तिलक  होतीं तो आगामी 27 मई को 60वां सालगिरह मना रही होतीं. पिछले 30 मार्च 2018 को उनका परिनिर्वाण हो गया. प्रथमतः सामाजिक...

दलित छात्रा ने की आत्महत्या मोदी सरकार के फैसले को कोर्ट में उसने दी...

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बहस करने वाली तमिलनाडु के अरियालुर जिले की दलित लड़की अनीथा  ने...

क्यों मारी जा रही हैं दलित महिलायें

निवेदिता सूरज ने आसमान पर कब्जा जमा लिया था। घरों के उपर झुलसती हुई गरमी छा गयी थी। दिन भर के तेज और तपती हुई...

युग नायिका सावित्री बाई फुले

रजनी तिलक सावित्रीबाई फुले स्मृति दिवस पर विशेष  सावित्री बाई फुले कोई साधारण महिला नहीं थी, जिन्हें इतिहास के गर्भ में छुपा दिया जाए और वे...

दलित महिलाएं और पत्रकारिता

सुशीला टाकभौरे   चर्चित लेखिका. दो उपन्यास. तीन कहानी संग्रह , तीन कविता संग्रह सहित व्यंग्य,नाटक, आलोचना की किताबें प्रकाशित. संपर्क :9422548822 दलित साहित्य के विषय...

समग्र क्रांति का स्वप्न: अखिल भारतीय दलित महिला सम्मेलन

निशा शेंडे स्त्री अध्धयन विभाग अमरावती 'विश्वविद्यालय' में प्राध्यापिका shende_nisha7@yahoo.com 20 जुलाई 1942 को पहला अखिल भारतीय दलित  महिला फेडरेशन की परिषद संपन्न हुई. यह वर्ष हम...

हिंदू कोड बिल और डॉ. अंबेडकर

डॉ. अंबेडकर राजनीति के आकाशगंगा के ऐसे देदीप्यमान नक्षत्र हैं जिनकी छवि कालांतर में भी धूमिल नहीं हो...

अस्ति कश्चित् वाग्विशेषः रामटेक पर दलित युवक

डा .कौशल पंवार   युवा रचनाकार, सामाजिक कार्यकर्ता ,  मोती लाल नेहरू कॉलेज , दिल्ली विश्वविद्यालय, में संस्कृत  की  असिस्टेंट प्रोफ़ेसर संपर्क : 9999439709 अगर तुम...

दलित स्त्रियों पर पुलिसिया बर्बरता का नाम है नीतीश सरकार

भागलपुर में विभिन्न मांगो के साथ जिला कलक्टर  ऑफिस के सामने धरने पर बैठी महिलाओं पर पुलिस ने बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज किया  तस्वीरों में बर्बरता...

प्रेमचंद का साहित्य और दलित स्त्री

( रानी कुमारी के द्वारा 'प्रेमचंद का साहित्य और दलित स्त्री' विषय पर आयोजित संगोष्ठी की रपट।  रानी दिल्ली वि वि में शोधरत  हैं....
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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