दलितस्त्रीवाद

नागपुर में अखिल भारतीय महिला क्रांति परिषद (1942) का अमृत महोत्सव

डा. बाबा साहेब अम्बेडकर की उपस्थिति में नागपुर में 20 जुलाई 1942 को हुई अखिल भारतीय महिला परिषद का के 75वें  वर्ष में कई...

देवी से देवदासी तक संकट ही संकट: मानवाधिकार आयोग हुआ सख्त

स्त्रीकाल डेस्क  भारत में लोकतंत्र अपना काम कर रहा है. एक ओर  छतीसगढ़ में देवी पूजा के नाम पर दूसरों की आस्थाओं पर हमले पर...

सावित्रीबाई फुले : शैक्षिक –सामाजिक क्रान्ति की अगुआ

आज भारत की आद्यशिक्षिका सावित्री बाई फुले का जन्मदिन है. आज के इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए ....

नैन्सी तुम मारी नहीं गई तुम तो यूपीएससी टॉप कर रही हो, सीबीएसई टॉप...

संपादकीय नैन्सी, मैं कई दिनों से तुम्हारे मारे जाने की खबर पढ़ रहा था, सोशल मीडिया में तुम्हारे मृत शरीर पर की गई हैवानियत की तस्वीरों...

वे कुन्तियाँ नहीं गौरव से भरी माँ हैं

संजीव चंदन  वह कहती है, "मैं विकलांग हूँ, मेरा बच्चा ही मेरा सहारा होने वाला था, इसलिए मैंने निर्णय लिया कि मैं उसे जन्म दूंगी....

पुलिस रिपोर्ट में हिन्दी विश्वविद्यालय की दलित छात्राएं निर्दोष, विश्वविद्यालय प्रशासन हुआ शर्मसार!

सुशील मानव पिछले दिनों हिन्दी विश्वविद्यालय की पांच दलित शोधार्थियों/ विद्यार्थियों पर कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने  उन्हें निलंबित कर दिया था, जब उनपर एक...

घरेलू कामगार महिलाओं की दीदी: संगीता सुभाषिणी

नवल किशोर कुमार 'स्त्री नेतृत्व की खोज’ श्रृंखला के तहत घरेलू कामगार महिलाओं को संगठित कर उनके संघर्ष की अगुआई कर रही संगीता सुभाषिणी से...

समकालीन नारीवाद और दलित स्त्री का प्रश्न

समकालीन नारीवाद और दलित स्त्री का प्रश्न: अनिता भारती के भाषण का वीडियो देखें

पहली महिला कुली, दलित महिला आंदोलन नेत्री जाईबाई चौधरी

जाई बाई चौधरी के द्वारा चलाए गए शिक्षा अभियान और उसके प्रति उनकी अप्रतिम अद्भुत समर्पण भावना का पता प्रसिदध दलित साहित्यकार कौशल्या बैसन्त्री की विश्वप्रसिद्ध आत्मकथा दोहरा अभिशाप के कई पन्नों में लिखा हुआ मिलता है। कौशल्या बैसन्त्री अपनी आत्मकथा में एक जगह लिखती है - जाई बाई चौधरी नाम की अछूत महिला ने नई बस्ती नामक जगह पर लड़कियों के लिए एक स्कूल खोला था।

‘छोटके चोर’

श्रीमती मोहिनी चमारिन जब-जब हिन्दी दलित साहित्य की बात चलती है, तब-तब प्रथम दलित रचना की प्रामणिकता को लेकर यह प्रश्न उठता है कि आखिर...
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