दलितस्त्रीवाद

सजर्नर ट्रुथ : क्या पश्चिम की इस सावित्रीबाई को आप जानते हैं?

 प्रेमकुमार मणि  प्रेमकुमार मणि चर्चित साहित्यकार एवं राजनीतिक विचारक हैं. अपने स्पष्ट राजनीतिक स्टैंड के लिए जाने जाते हैं. संपर्क : manipk25@gmail.com प्रेमकुमार मणि भारतीय उपमहाद्वीप के...

स्त्रीवाद के भीतर दलित स्त्रीवाद

साभार: विस्फोट.कॉम ‘दलित स्त्रीवाद का सभी मुक्तिकामी आन्दोलनों की उपलब्धियों पर दावा है, सबके साथ अलायंस है ,सबकी सीमाओं को अहसास कराते हुए.’ यह निष्कर्ष...

दलित महिलाओं के संघर्ष की मशाल: मंजुला प्रदीप

दलित पितृसत्ता को भी जिसने चुनौती दी आज सावित्रीबाई फुले की जयंती (3 जनवरी) से हम एक मुहीम शुरू कर रहे हैं-स्त्रीकाल में ‘स्त्री नेतृत्व...

रजनी तिलक का स्त्री चिंतन : जाति, जेंडर, पितृसत्ता और यौनिकता के प्रश्न

स्त्री के पास अत्याचारों के अनुभवों का एक भण्डार होता है जिसकी चाभी शायद ही कभी किसी के पुरुष के हाथ लगती होगी. स्त्री के प्रति बहुत सदाशयी पुरुष भी अनुकूल समय देखकर पाला बदल देता है. रजनी ऐसे सदाशयी पुरुषों से भी सवाल करती हैं. ये सवाल करने की ताकत उन्हें जीवन में मिले अनुभवों और उनकी आंच में तपकर बाहर निकलने से आई है. स्त्री की नज़र और उसका मन हर भाव को बहुत सटीक तौलता है.

दलित लेखिका की दावेदारी: अपनी जमीं अपना आसमाँ

आत्मकथा में दूसरा महत्वपूर्ण चरित्र है ‘भाई जी’ यानि लेखिका रजनी तिलक के पिता। लेखिका के पिता जुझारू, अत्यंत मेहनती, परिस्थितियों के शिकार, अपनी दिमागी रुप से बीमार पत्नी के प्रति समर्पित पति और एक जिम्मेदार पिता के रूप में सामने आते है।

भगवान! ‘एक कटोरा भात खिला दो बस, भारत में भात नहीं मिला’

ज्योति प्रसाद  शोधरत , जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय. सम्पर्क: jyotijprasad@gmail.com स्वर्ग और नरक के बीच भूखी बच्ची वहाँ भी फंस गयी, उम्र 11 साल. क्या...

रंगकर्मियों से बलात्कार : क्या बलात्कारी पीड़िता को खुद सही-सलामत वापस छोड़ते हैं? आदिवासी...

विक्रम कुमार  रांची के खूंटी जिले के कोचांग में नुक्कड़ नाटक करने गयीं रंकर्मियों के साथ बलात्कार की घटना ने रंगकर्म की दुनिया और देश...

पहली महिला कुली, दलित महिला आंदोलन नेत्री जाईबाई चौधरी

जाई बाई चौधरी के द्वारा चलाए गए शिक्षा अभियान और उसके प्रति उनकी अप्रतिम अद्भुत समर्पण भावना का पता प्रसिदध दलित साहित्यकार कौशल्या बैसन्त्री की विश्वप्रसिद्ध आत्मकथा दोहरा अभिशाप के कई पन्नों में लिखा हुआ मिलता है। कौशल्या बैसन्त्री अपनी आत्मकथा में एक जगह लिखती है - जाई बाई चौधरी नाम की अछूत महिला ने नई बस्ती नामक जगह पर लड़कियों के लिए एक स्कूल खोला था।

किस हाल में हैं बोधगया भूमि मुक्ति आन्दोलन की जमीन मालकिनें !

संजीव चंदन  वह इस माहाद्वीप का पहला भूमि आन्दोलन माना जाता है , जिससे मुक्त हुई जमीनों के  आधिकार महिलाओं ने अपने लिए भी प्राप्त...

दलित पत्रकारिता का जूनून: कठिन डगर की राह पर डॉली कुमार

स्त्री नेतृत्व की खोज’ श्रृंखला के तहत हमने नेतृत्व के कई नामों के बारे में या तो स्वयं उनसे  स्वयं या किसी लेखक द्वारा प्रस्तुत...
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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।