दलितस्त्रीवाद

एक साक्षात्कार लंबाणी जनजाति की स्त्रियों से

( कन्नड़ में किया गया यह अध्ययन अंग्रेजों के ज़माने से अपराधी करार दी गई जनजातियों में से एक  लंबाणी जनजाति की स्त्रियों के जीवन...

क्यों मारी जा रही हैं दलित महिलायें

निवेदिता सूरज ने आसमान पर कब्जा जमा लिया था। घरों के उपर झुलसती हुई गरमी छा गयी थी। दिन भर के तेज और तपती हुई...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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