दलितस्त्रीवाद

मेरा कमरा/अपने कमरे की बात

सुशीला टाकभौरे   चर्चित लेखिका. दो उपन्यास. तीन कहानी संग्रह , तीन कविता संग्रह सहित व्यंग्य,नाटक, आलोचना की किताबें प्रकाशित. संपर्क :9422548822 वर्जीनिया वूल्फ की किताब...

दलित स्त्रीवाद जैसी कोई अवधारणा नहीं है : तेजसिंह

( मंगलवार का दिन दूसरी परम्परा के लिए कई बुरी खबरों का दिन था . सुबह खबर आई कि ब्लैक अधिकारों के लिए लड़ने...

दलित स्त्री-लेखन का पहला दस्तावेज: मांग महारों का दुःख (1855)

मुक्ता सालवे/अनुवाद: संदीप मधुकर सपकाले  फुले-दम्पति (महात्मा फुले-सावित्री बाई फुले) द्वारा स्थापित देश के पहले बालिका-विद्यालय में मात्र 3 सालों की पढ़ाई के बाद मांग...

पुलिस रिपोर्ट में हिन्दी विश्वविद्यालय की दलित छात्राएं निर्दोष, विश्वविद्यालय प्रशासन हुआ शर्मसार!

सुशील मानव पिछले दिनों हिन्दी विश्वविद्यालय की पांच दलित शोधार्थियों/ विद्यार्थियों पर कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने  उन्हें निलंबित कर दिया था, जब उनपर एक...

सदन में हम दलित महिलाओं को लड़ाने का षड्यंत्र सफल नहीं होगा: भगवती देवी

ठेकेदारी कौन करता है? ठेकेदार किनको कहते हैं? क्या राबड़ी जी का बेटा ठेकेदारी कराने जाते हैं? बिचैलिये का काम कौन करता है? किसका मोटर साइकिल पकड़ करके उड़ाया जाता है। कोई गरीब का राबड़ी जी का बेटा नहीं और जो बोलता है उसी का सारा बेटा ठीकेदार और बिचैलिये का काम करता है। अगर जांच हो तो मैं समझती हूं कि सुनिश्चित रोजगार योजना का जो पैसा है तो उसके बारे में लोग नाम गिनावे, सभापति जी, आप खुद इस पर जांच बैठाइये, कौन जेल जायेगा? गरीब का आप ठेका दिलवाते हैं और किसको ठीका मिलता है?

बहुजन आंदोलन की समर्पित शख्सियत: मनीषा बांगर

स्त्री नेतृत्व की खोज’ श्रृंखला के तहत आज मिलते हैं बामसेफ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीषा बांगर से. उनके जीवन और विचार उत्पल कान्त अनीस...

राजेंद्र यादव के अंतर्विरोध , हंस और दलित स्त्री अस्मिता के सवाल

 मनीषा कुमारी / संजीव चंदन ( ३१ जनवरी को हंस का सालाना आयोजन है हंस के  पुनर्प्रकाशन दिवस और  प्रेमचंद जयन्ती के अवसरपर. राजेन्द्र यादव...

समग्र क्रांति का स्वप्न: अखिल भारतीय दलित महिला सम्मेलन

निशा शेंडे स्त्री अध्धयन विभाग अमरावती 'विश्वविद्यालय' में प्राध्यापिका shende_nisha7@yahoo.com 20 जुलाई 1942 को पहला अखिल भारतीय दलित  महिला फेडरेशन की परिषद संपन्न हुई. यह वर्ष हम...

एक सांस्कृतिक आंदोलन के चार साल

प्रमोद रंजन व रवि प्रकाश ( देश में एक धीमा सांस्कृतिक आन्दोलन करवट ले रहा है , एक क्रांति घटित हो रही है , जिसकी...

अस्तित्व के प्रश्न खड़े करती दलित स्त्री पात्र

शिप्रा किरण सहायक प्राध्यापक, हिन्दी विभाग.बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ, संपर्क: kiran.shipra@gmail.com अभिव्यक्ति के तमाम सशक्त माध्यमों में से एक है- सिनेमा. जिसके बहुत गहरे और गंभीर सरोकार हैं....
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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