दलितस्त्रीवाद

एक पत्र जो उसने आत्महत्या का निर्णय टालने के पूर्व लिखा था

शैक्षणिक संस्थाओं में कुछ सवर्ण महिलाओं द्वारा अत्याचार और उत्पीड़न की घटनाएं लोगों को अजीब लग सकती हैं यह भी तब जब स्त्रियों को भी शिक्षा प्राप्त करने में बहुत मशक्कत करनी पड़ी हो, किन्तु यह एक बड़ा सत्य है। आज सदियों बाद दलित स्त्रियों की पहली पीढ़ी उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं । घर और बाहर दोनों जगह काम उसे तो करना ही पड़ता है इसके साथ ही साथ उसके साथ जातिगत भेदभाव और उसकी अवमानना निरन्तर होती है। उसकी शिक्षा की प्रगति में बाधक कुछ सवर्ण महिलाएं विभिन्न और अतिरिक्त कार्यभार सौंप देती हैं ताकि वह वहां तक पहुंच ही न पाए।

पेरियार: महिलाओं की आजादी का पक्षधर मसीहा

ललिता धारा  महिला दिवस पर विशेष  पेरियार की मूर्ति को नुकसान पहुंचना समतावादी आंदोलन और विचार के प्रति प्रतिगामियों के गुस्से की बानगी है. आइये आज...

जाति, जेंडर और क्लास दलित स्त्रीवाद की धूरि

( काफी दिनों तक स्त्रीकाल का अपडेट नहीं हुआ. हम फिर से सक्रिय हैं. पुनः शुरू करते हुए स्त्रीकाल, साउथ एशिया वीमेन इन मीडिया, सेंट्रल यूनिवर्सिटी...

दलित छात्रा को मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय ने चयन के बाद भी नहीं दिया...

स्त्रीकाल डेस्क  मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल अपने एक विवादास्पद फैसलों के कारण सुर्ख़ियों में है. इसने अपने यहाँ एक पाठ्यक्रम के लिए चयनित दलित...

देवी से देवदासी तक संकट ही संकट: मानवाधिकार आयोग हुआ सख्त

स्त्रीकाल डेस्क  भारत में लोकतंत्र अपना काम कर रहा है. एक ओर  छतीसगढ़ में देवी पूजा के नाम पर दूसरों की आस्थाओं पर हमले पर...

हिंदी साहित्य से झाँकतीं आदिवासी स्त्रियाँ

रीता दुबे शोधर्थी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय , दिल्ली, संपर्क:ईमेल:rita.jnu@gmail.com अगर अपनी बात यशपाल की  दिव्या से शुरू करू तो जो कहना चाहती हूँ उसे...

आदिवासियों का पत्थलगड़ी आंदोलन: संघ हुआ बेचैन, डैमेज कंट्रोल को आगे आये भागवत

झारखंड, छत्तीसगढ़ के आदिवासी पत्थलगड़ी की अपनी पुरानी परम्परा का नये रूप में अपने अधिकारों को स्थापित करने के लिए राजनीतिक रूप से इस्तेमाल...

स्त्रीवाद के भीतर दलित स्त्रीवाद

साभार: विस्फोट.कॉम ‘दलित स्त्रीवाद का सभी मुक्तिकामी आन्दोलनों की उपलब्धियों पर दावा है, सबके साथ अलायंस है ,सबकी सीमाओं को अहसास कराते हुए.’ यह निष्कर्ष...

घरेलू कामगार महिलाओं की दीदी: संगीता सुभाषिणी

नवल किशोर कुमार 'स्त्री नेतृत्व की खोज’ श्रृंखला के तहत घरेलू कामगार महिलाओं को संगठित कर उनके संघर्ष की अगुआई कर रही संगीता सुभाषिणी से...

दलित स्त्रियाँ खुद लिखेंगी अपना इतिहास

हेमलता हेमलता ने 'दलित अस्मिता और शिक्षा' पर शोध किया है.सम्पर्क :hmdehrwal@gmail.com अनिता भारती आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। अपने तीखे और सटीक शब्दों...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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